Kerala Official Name Change Update: क्या चुनावी साल में केरल का नाम बदलकर केरलम किया जाएगा? केंद्र सरकार ने प्रस्ताव पर विचार शुरू किया। संविधान, आर्टिकल 3 और मलयालम पहचान के साथ इतिहास में नया पन्ना खुलने वाला है।
Kerala Name Change: केरल का नाम बदलकर “केरलम” करने का प्रस्ताव अब केंद्र में चर्चा का विषय बन गया है। यह प्रस्ताव सबसे पहले 2024 में मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन ने विधानसभा में पेश किया था। उनका तर्क था कि अंग्रेज़ी में ‘केरल’ शब्द राज्य की वास्तविक भाषा और सांस्कृतिक पहचान को पूरी तरह दर्शाता नहीं। मलयालम में इसे हमेशा “केरलम” कहा जाता रहा है। अगर मंज़ूरी मिल जाती है, तो संविधान के आर्टिकल 3 के तहत पहले शेड्यूल में बदलाव होगा और “केरलम” को राज्य का ऑफिशियल नाम बना दिया जाएगा।
क्यों बदलना चाहते हैं नाम?
मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन ने प्रस्ताव पेश करते हुए कहा कि राज्य का असली नाम मलयालम में “केरलम” है, लेकिन संविधान और अंग्रेज़ी रिकॉर्ड में इसे केवल “केरल” लिखा है। उनका तर्क है कि अंग्रेज़ी ट्रांसलेशन राज्य की भाषा और ऐतिहासिक पहचान को सही ढंग से नहीं दिखाता। विजयन ने कहा, "हम चाहते हैं कि संविधान में नाम बदलकर इसे मलयालम रूप में सभी भाषाओं में दिखाया जाए, ताकि हमारी सांस्कृतिक और ऐतिहासिक पहचान सुरक्षित रहे।" केंद्र को भेजे गए प्रस्ताव में भी यह कहा गया कि बदलाव आठवें शेड्यूल में सभी भाषाओं के लिए लागू होना चाहिए।

राजनीतिक और चुनावी पृष्ठभूमि
यह प्रस्ताव राज्य विधानसभा चुनाव से पहले आया है। मई 2026 से पहले केरल में 140 सदस्यों की विधानसभा के लिए चुनाव होने हैं। इस चुनावी साल में नाम बदलने का प्रस्ताव राजनीतिक चर्चा का हिस्सा बन गया है। राजनीतिक समर्थन भी है: केरल BJP प्रेसिडेंट राजीव चंद्रशेखर ने इस पहल का समर्थन किया और इसे राज्य की सांस्कृतिक जड़ों को दिखाने वाला कदम बताया।
संविधानिक प्रक्रिया कैसे काम करती है?
नाम बदलने के लिए:
- राज्य विधानसभा प्रस्ताव पास करती है।
- केंद्र सरकार संविधान में आर्टिकल 3 के तहत संशोधन की प्रक्रिया शुरू करती है।
- संशोधन संसद में पारित होता है।
- राष्ट्रपति की मंज़ूरी के बाद नया नाम सभी आधिकारिक रिकॉर्ड और भाषाओं में लागू होता है।
- अगर सब सही हुआ, तो केरल अब “केरलम” के रूप में सभी सरकारी और सांस्कृतिक दस्तावेज़ों में दिखाई देगा।

नए नाम “केरलम” के रहने वालों को क्या कहा जाएगा: केरलाइट, केरल्मियन या केरलमैन?
केरल का नाम बदलकर “केरलम” करना भाषा और सांस्कृतिक पहचान को मजबूत करने वाला कदम माना जा रहा है। इसे संविधानिक प्रक्रिया के तहत मंज़ूरी मिलना अभी बाकी है, लेकिन राजनीतिक और सांस्कृतिक असर पहले ही दिख रहा है। यह कदम उन राज्यों और शहरों की श्रृंखला में शामिल होगा जिन्होंने हाल के दशकों में लोकल भाषा और विरासत को सम्मान देने के लिए नाम बदलने का फैसला किया। कांग्रेस सांसद शशी थरूर ने सोशल मीडिया प्लेटफार्म एक्स पर लिखा, सब अच्छा है, इसमें कोई शक नहीं, लेकिन हमारे बीच एंग्लोफोन्स के लिए एक छोटा सा भाषा से जुड़ा सवाल: नए “केरलम” के रहने वालों के लिए “केरलाइट” और “केरलैन” शब्दों का अब क्या होगा? “केरलमाइट” एक माइक्रोब जैसा लगता है और “केरलमियन” एक रेयर अर्थ मिनरल जैसा…!
@CMOKerala इस चुनावी जोश से निकले नए शब्दों के लिए एक कॉम्पिटिशन शुरू कर सकते हैं।


