अमेरिकी उपराष्ट्रपति वान्स ने ईरान युद्ध पर पेंटागन के दावों पर संदेह जताया है। उन्हें 8 हफ्तों में अमेरिकी मिसाइल भंडार घटने की चिंता है, जबकि खुफिया रिपोर्ट के अनुसार ईरान की सैन्य ताकत अभी भी बरकरार है।

वॉशिंगटन: नई रिपोर्ट्स के मुताबिक, अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वान्स ने ईरान युद्ध को लेकर पेंटागन (अमेरिकी रक्षा मंत्रालय) के दावों पर गहरा शक जताया है। रक्षा सचिव पीट हेगसेथ और जनरल डैन केन का दावा है कि अमेरिकी सेना जंग में बड़ी जीत हासिल कर रही है और ईरान की नौसेना और एयर डिफेंस को तबाह कर दिया गया है। लेकिन वान्स को चिंता है कि इन दावों के पीछे की सच्चाई कुछ और हो सकती है।

वान्स को शक है कि कहीं पेंटागन राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को गुमराह तो नहीं कर रहा। उन्होंने बंद दरवाजों के पीछे हुई बैठकों में कहा है कि आठ हफ्ते से चल रहे इस युद्ध में अमेरिका का मिसाइल भंडार काफी कम हो गया है। इससे भविष्य में चीन या रूस से निपटने में मुश्किल आ सकती है। हालांकि, वो सार्वजनिक तौर पर रक्षा सचिव की तारीफ करते हैं, लेकिन अंदरखाने उनके उठाए सवाल ट्रंप प्रशासन में मतभेद का इशारा कर रहे हैं।

पेंटागन के दावों की हवा निकालते खुफिया इनपुट

रक्षा मंत्रालय का भले ही दावा हो कि ईरान की सैन्य ताकत पूरी तरह खत्म हो गई है, लेकिन खुफिया रिपोर्ट कुछ और ही कहानी बयां कर रही हैं। रिपोर्ट्स के मुताबिक, ईरान की दो-तिहाई वायुसेना अब भी सुरक्षित है। साथ ही, उसके पास होर्मुज जलडमरूमध्य में खतरा पैदा करने के लिए मिसाइलें और नावें भी मौजूद हैं। इसी बीच, एक बड़े थिंक टैंक CSIS (सेंटर फॉर स्ट्रैटेजिक एंड इंटरनेशनल स्टडीज) ने खुलासा किया है कि अमेरिका अपने आधे से ज्यादा जरूरी हथियार इस्तेमाल कर चुका है।

वान्स उन कुछ लोगों में से एक हैं, जिन्होंने युद्ध शुरू होने से पहले ही इसका विरोध किया था। उन्होंने पहले ही चेतावनी दी थी कि इस जंग से बड़े पैमाने पर जानें जाएंगी और इलाके में अस्थिरता फैलेगी। माना जा रहा है कि वान्स 2028 में राष्ट्रपति चुनाव लड़ना चाहते हैं। ऐसे में इस युद्ध का नतीजा उनके राजनीतिक भविष्य के लिए काफी अहम होगा। यह भी बता दें कि पाकिस्तान में हुई शांति वार्ता का नेतृत्व भी वान्स ने ही किया था।