ईरान पर इजरायली-अमेरिकी कार्रवाई के बाद वहां और कट्टर सरकार बनी है। IRGC नियंत्रित इस नई सत्ता को इजरायल बड़ा खतरा मान रहा है। शांति वार्ता के बीच भी इजरायल के बयानों से जंग का खतरा बना हुआ है।

जेरूसलम: ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई को सैन्य कार्रवाई में मारने का इजरायल और अमेरिका का दांव उल्टा पड़ता दिख रहा है। खुद इजरायली डिफेंस फोर्सेज (IDF) ने अपनी संसद को चेतावनी दी है कि ईरान में जो नई सरकार आई है, वो पहले से कहीं ज़्यादा कट्टर और खतरनाक है। खुफिया रिपोर्ट्स बताती हैं कि मौजूदा लीडरशिप पर इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) के कट्टरपंथियों का कंट्रोल है। इसे इजरायल अपने वजूद के लिए एक बड़ा खतरा मान रहा है।

यह नया खुलासा ऐसे समय में हुआ है, जब 40 दिनों से ज़्यादा समय से चल रही जंग ने दुनियाभर में तेल और पेट्रोकेमिकल सेक्टर में भारी संकट पैदा कर दिया है। ईरान के साथ जंग में अमेरिका को लाखों डॉलर की मिलिट्री संपत्ति का नुकसान हुआ और बेहद खतरनाक हालात में अपने दो वायु सेना के जवानों को बचाना पड़ा। इतने नुकसान और जवाबी हमलों के बाद भी ईरान में हालात और बिगड़ गए हैं। इस आकलन ने पश्चिमी ताकतों को मुश्किल में डाल दिया है। इजरायल का दावा है कि उसने ईरान में 8,000 से ज़्यादा हवाई हमले किए हैं।

शांति वार्ता की कोशिशें

इस बीच, तनाव कम करने के लिए शनिवार को पाकिस्तान में एक अहम शांति वार्ता शुरू होगी। इसमें अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वान्स, विशेष प्रतिनिधि स्टीव विटकॉफ और जेरेड कुशनर के नेतृत्व में एक अमेरिकी टीम हिस्सा लेगी। माना जा रहा है कि ईरान की तरफ से बातचीत के लिए वहां के संसद स्पीकर मोहम्मद बागेर गालिबाफ की अगुवाई में एक टीम आएगी। अगले हफ्ते वॉशिंगटन में लेबनान और इजरायल के बीच भी संघर्षविराम पर बातचीत होगी। लेकिन इजरायल का यह कहना कि ईरान में अभी भी उसके 'कुछ काम अधूरे' हैं, इस इलाके पर फिर से जंग के काले बादल मंडरा रहे हैं।