Trump vs Iran: समुद्र में 'आर-पार' की तैयारी, अगले 72 घंटे में हो सकता है बड़ा ऐलान!
Iran vs America: मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव के बीच अब समुद्र में भी बड़ा टकराव देखने को मिल सकता है। रिपोर्ट्स के मुताबिक अमेरिका जल्द ही कई देशों के साथ मिलकर एक नेवल कोएलिशन बनाने का ऐलान कर सकता है। आइए जानते हैं यह इतना अहम क्यों है...

ट्रंप का प्लान क्या है?
नेवल कोएलिशन (Naval Coalition) का मकसद दुनिया के सबसे अहम तेल मार्गों में से एक हॉर्मुज स्ट्रेट (Strait of Hormuz) में जहाजों को सुरक्षा देना होगा। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, यह ऐलान अगले कुछ दिनों में हो सकता है। उम्मीद जताई जा रही है कि इस हफ्ते में अगले 72 घंटे अहम हो सकते हैं। अगर ऐसा होता है तो यह ईरान और अमेरिका के बीच समुद्री टकराव को और बढ़ा सकता है।
हॉर्मुज जलमार्ग इतना अहम क्यों है?
दुनिया के तेल व्यापार के लिए हॉर्मुज जलमार्ग बेहद अहम रास्ता है। अनुमान है कि दुनिया के करीब 20% कच्चे तेल की सप्लाई इसी समुद्री मार्ग से गुजरती है। लेकिन मिडिल ईस्ट में जारी संघर्ष के बाद यहां जहाजों की आवाजाही लगभग ठप हो गई है। इसी वजह से कई देशों में ईंधन की कीमतों में उछाल देखने को मिल रहा है। अगर यह रास्ता लंबे समय तक बंद रहा तो इसका असर भारत समेत पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था पर पड़ सकता है।
ट्रंप ने कई देशों से मांगे युद्धपोत
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (Donald Trump) ने कई देशों से अपील की है कि वे अपने युद्धपोत (Warships) इस इलाके में भेजें ताकि तेल और कंटेनर जहाज सुरक्षित तरीके से गुजर सकें। इस मिशन के लिए जिन देशों का नाम सामने आया है, उनमें चीन, फ्रांस, जापान, साउथ कोरिया और यूनाइटेड किंगडम शामिल हैं। हालांकि अभी तक किसी भी देश ने सार्वजनिक रूप से पक्का समर्थन नहीं दिया है।
अमेरिका का दावा- कई देशों से चल रही बातचीत
अमेरिकी ऊर्जा मंत्री Chris Wright ने कहा कि कई देशों के साथ इस मुद्दे पर बातचीत चल रही है। उनका कहना है कि अगर अंतरराष्ट्रीय सहयोग मिला तो जल्द ही एक मल्टीनेशनल नेवल मिशन बनाया जा सकता है जो इस समुद्री रास्ते को दोबारा खोलने में मदद करेगा। ब्रिटेन के प्रधानमंत्री Keir Starmer ने इस मुद्दे पर ट्रंप से बातचीत की। बताया जा रहा है कि उन्होंने वैश्विक शिपिंग को हो रही परेशानी पर चिंता जताई और जल्द समाधान खोजने की जरूरत पर जोर दिया। इसके अलावा कनाडा के प्रधानमंत्री Mark Carney से भी इस विषय पर चर्चा हुई है। चीन ने कहा है कि सभी देशों की जिम्मेदारी है कि वैश्विक ऊर्जा सप्लाई बाधित न हो। वहीं, साउथ कोरिया ने कहा है कि वह अमेरिका के साथ स्थिति की समीक्षा कर रहा है। हालांकि, दोनों देशों ने अभी तक सीधे तौर पर युद्धपोत भेजने की घोषणा नहीं की है।
समुद्र में बढ़ रहा खतरा
रिपोर्ट्स के मुताबिक, ईरान ने कई व्यापारिक जहाजों को चेतावनी दी है कि वे इस समुद्री रास्ते से गुजरने की कोशिश न करें। पिछले हफ्ते इराकी समुद्री इलाके में दो तेल टैंकरों पर विस्फोटक से भरी नावों से हमला किया गया था। इस हमले में एक भारतीय नागरिक की मौत भी हो गई थी। यही वजह है कि अब कई शिपिंग कंपनियां इस रास्ते से जहाज भेजने से बच रही हैं।
भारत पर क्या पड़ सकता है असर?
भारत अपनी तेल जरूरतों का बड़ा हिस्सा आयात करता है। अगर हॉर्मुज जलमार्ग में तनाव बढ़ता है तो इसके कई असर हो सकते हैं। इससे पेट्रोल-डीजल महंगे हो सकते हैं, एलपीजी और गैस की कीमत बढ़ सकती है और शिपिंग और व्यापार की लागत बढ़ सकती है।
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