ईरान के रिवोल्यूशनरी गार्ड्स कॉर्प्स (IRGC) ने अपने खुफिया चीफ ब्रिगेडियर जनरल सरदार माजिद खादेमी की मौत की पुष्टि की है. ईरान का आरोप है कि तेहरान में हुए एक हवाई हमले में उनकी जान गई, जिसके पीछे अमेरिका और इजरायल का हाथ है.
तेहरान: ईरान के रिवोल्यूशनरी गार्ड्स कॉर्प्स (IRGC) ने पुष्टि की है कि उसके खुफिया विभाग के चीफ, ब्रिगेडियर जनरल सरदार माजिद खादेमी मारे गए हैं। ईरानी मीडिया के मुताबिक, सोमवार तड़के हुए एक हमले में उनकी मौत हुई। ईरान ने इस हमले के लिए सीधे तौर पर अमेरिका और इजरायल को जिम्मेदार ठहराया है। खादेमी पिछले पांच दशकों से ईरान के सुरक्षा और खुफिया तंत्र का एक अहम चेहरा थे।
28 फरवरी को अमेरिका-इजरायल के हमले शुरू होने के बाद से मारे गए टॉप ईरानी अधिकारियों की लिस्ट में खादेमी का नाम भी जुड़ गया है। पिछले महीने ही सुरक्षा प्रमुख अली लारिजानी, खुफिया मंत्री इस्माइल खतीब, कमांडर मोहम्मद पाकपूर, IRGC के प्रवक्ता अली मोहम्मद नईनी और बासिज फोर्स के चीफ गुलामरेजा सुलेमानी भी मारे गए थे। IRGC ने एक बयान में कहा कि खादेमी ने दुश्मन देशों की घुसपैठ को रोकने में बड़ी भूमिका निभाई थी।
IRGC ने यह साफ नहीं किया है कि खादेमी की मौत कहां और कैसे हुई। हालांकि, रिपोर्ट्स के मुताबिक, सोमवार तड़के राजधानी तेहरान के आसपास रिहायशी इलाकों में कई हवाई हमले हुए थे। इसके कुछ देर बाद ही IRGC ने खुफिया चीफ की मौत की पुष्टि की। ईरान ने अपने बयान में कहा है कि खादेमी अमेरिका और इजरायल के एक ज्वाइंट ऑपरेशन में मारे गए। लेकिन हमले के तरीके या सही जगह के बारे में ज्यादा जानकारी अभी तक सामने नहीं आई है।
हवाई हमले में 13 लोगों की मौत
तेहरान में एक के बाद एक हुए इन हवाई हमलों में कुल 13 लोगों के मारे जाने की खबर है। बीती रात हुए हमले में कई लोग घायल भी हुए हैं। यह हवाई हमला तेहरान के दक्षिण-पश्चिम में बसे एक शहर के रिहायशी इलाके में सुबह-सुबह हुआ। ईरान की फार्स और नूर न्यूज एजेंसियों ने बताया कि हमला इस्लामशहर के पास हुआ। हालांकि, यह साफ नहीं है कि किस इमारत को निशाना बनाया गया था।
यह हमला ट्रंप के 'ट्रुथ सोशल' पर किए गए उस पोस्ट के बाद हुआ, जिसमें उन्होंने होर्मुज जलडमरूमध्य न खोलने पर गंभीर अंजाम भुगतने की धमकी दी थी। हालांकि, अभी तक इजरायल या अमेरिका ने इस हमले की जिम्मेदारी नहीं ली है।
इसके अलावा, तेहरान की शरीफ यूनिवर्सिटी को भी निशाना बनाया गया। माना जाता है कि यहां ईरान के बैलिस्टिक मिसाइल प्रोग्राम से जुड़ा रिसर्च का काम होता है। इस हमले में यूनिवर्सिटी के पास मौजूद एक नेचुरल गैस सप्लाई सेंटर को भी नुकसान पहुंचा है।