मिडिल ईस्ट संघर्ष से प्रभावित कारोबारियों के लिए सरकार 26.7 अरब डॉलर का क्रेडिट गारंटी पैकेज ला रही है। यह 4-वर्षीय स्कीम बैंकों को लोन पर 90% गारंटी देगी। इसका उद्देश्य टेक्सटाइल जैसे संकटग्रस्त क्षेत्रों को आर्थिक राहत देना है।

भारत सरकार मिडिल ईस्ट में चल रहे संघर्ष से प्रभावित कारोबारियों को बचाने के लिए 26.7 अरब डॉलर (करीब 2.5 लाख करोड़ रुपये) का एक सॉवरेन क्रेडिट गारंटी पैकेज तैयार कर रही है। यह स्कीम चार साल तक चलेगी। इसके तहत, अगर कोई कारोबारी लोन नहीं चुका पाता है, तो सरकार बैंकों को 90% गारंटी देगी, यानी नुकसान की भरपाई करेगी।

अधिकारियों का कहना है कि यह योजना ठीक वैसी ही है जैसी कोरोना महामारी के दौरान लागू की गई इमरजेंसी क्रेडिट लाइन गारंटी स्कीम (ECLGS) थी। उस समय भी बैंकों को इसी तरह की गारंटी दी गई थी। इस नए पैकेज पर सरकार को करीब 170 से 180 अरब रुपये (1.83 से 1.94 अरब डॉलर) खर्च करने पड़ सकते हैं। इस स्कीम के तहत 1 अरब रुपये (1.075 करोड़ डॉलर) तक के लोन कवर किए जाएंगे। इन गारंटियों को नेशनल क्रेडिट गारंटी ट्रस्टी कंपनी (NCGTC) मैनेज करेगी।

टेक्सटाइल इंडस्ट्री पर सबसे ज़्यादा दबाव

जो इंडस्ट्रीज़ एक्सपोर्ट पर निर्भर हैं, उन पर सबसे ज़्यादा मार पड़ी है, खासकर टेक्सटाइल और ग्लास इंडस्ट्री पर। भारत की 174 अरब डॉलर की टेक्सटाइल इंडस्ट्री कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों, महंगे कच्चे माल, घटती मांग और मजदूरों के पलायन जैसी समस्याओं से जूझ रही है। पहले अनुमान था कि यह इंडस्ट्री 2030 तक 350 अरब डॉलर तक पहुंच जाएगी, लेकिन युद्ध ने इस ग्रोथ पर ब्रेक लगा दिया है।

सरकार के इस कदम का मकसद इन सेक्टर्स को थोड़ी राहत देना है, जो ग्लोबल आर्थिक अनिश्चितता के बीच अपना काम जारी रखने के लिए संघर्ष कर रहे हैं। भारतीय शेयर बाजार पर भी इसका दबाव साफ दिखा है। मार्च का महीना काफी उतार-चढ़ाव भरा रहा। जनवरी से मार्च की तिमाही के दौरान शेयरों में बड़ी बिकवाली देखी गई। निफ्टी इंडेक्स में 13% तक की गिरावट आई, जो इस संकट को लेकर निवेशकों की चिंता को दिखाता है।

उम्मीद है कि यह सॉवरेन गारंटी स्कीम बैंकों से लोन मिलने की प्रक्रिया को स्थिर करेगी और उन्हें भरोसा देगी। इससे यह सुनिश्चित होगा कि बढ़ते जोखिम के बावजूद कारोबारियों को फंड मिलता रहे। भले ही युद्ध की वजह से व्यापार और सप्लाई चेन में रुकावट आ रही है, सरकार को उम्मीद है कि इस दखल से गहरे आर्थिक नुकसान को रोका जा सकेगा और मुश्किल समय में इंडस्ट्रीज़ को डूबने से बचाया जा सकेगा।