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भारत में LPG संकट: गैस सप्लाई में देरी से 56% परिवार प्रभावित, LocalCircles की चौंकाने वाली रिपोर्ट
क्या आपकी रसोई में LPG सिलेंडर समय पर पहुंच रहा है? पिछले 5 हफ़्तों में 56% परिवारों ने सप्लाई में देरी का सामना किया और 12% को ब्लैक मार्केट से ज़्यादा कीमत चुकानी पड़ी। कमर्शियल LPG में यह आंकड़ा 35% तक! क्या आप भी इस संकट के दायरे में हैं?

नई दिल्ली, 9 अप्रैल 2026: पिछले 5 हफ़्तों में भारत के कई शहरों में LPG (कुकिंग गैस) सिलेंडरों की सप्लाई में बड़ी रुकावटें आई हैं। LocalCircles के सर्वे के अनुसार, 56% परिवारों ने सिलेंडर रिफिल में देरी या सप्लाई में दिक्कत का सामना किया। कई परिवारों को अपने रोज़मर्रा के खाने-पीने और खाना पकाने की योजनाओं में बदलाव करना पड़ा। हालांकि कुछ राज्यों में स्थिति स्थिर रही, लेकिन बड़े शहरों जैसे लखनऊ, दिल्ली और NCR के कुछ हिस्सों में लोग बुकिंग के बाद भी कई दिन या हफ़्तों तक इंतज़ार कर रहे थे। ऐसे में कुछ परिवारों को लकड़ी या पोर्टेबल स्टोव जैसे पुराने तरीकों से खाना बनाने पर मजबूर होना पड़ा।
ब्लैक मार्केट की बढ़ती धमक
सर्वे से पता चला कि 12% घरेलू परिवारों ने मजबूरी में ब्लैक मार्केट से सिलेंडर खरीदे। कीमतें सामान्य से दो-तीन गुना तक बढ़ गईं। उदाहरण के लिए, दिल्ली में 14 किलो का सिलेंडर 4,000 रुपये में बिक रहा था, जबकि लखनऊ में इसकी कीमत 60 रुपये से 300 रुपये प्रति किलो तक पहुंच गई। कमर्शियल LPG पर निर्भर लगभग 35% व्यवसायों और रेस्टोरेंट्स ने भी कालाबाज़ार से गैस खरीदी। इसका मतलब है कि ब्लैक मार्केट केवल आम घरेलू परिवारों तक सीमित नहीं रहा, बल्कि व्यापारिक क्षेत्रों में भी फैल गया।
क्यों आई यह समस्या?
विशेषज्ञों का कहना है कि इस संकट की जड़ें वैश्विक स्तर की आपूर्ति रुकावटों में हैं। भारत अपनी लगभग 60% LPG जरूरतों के लिए आयात पर निर्भर है। इनमें से ज़्यादातर गैस ‘स्ट्रेट ऑफ़ होर्मुज़’ के रास्ते आती है। US और ईरान के बीच पिछले हफ़्तों के संघर्ष और वैश्विक भू-राजनीतिक तनाव के कारण सप्लाई चेन प्रभावित हुई। जैसे-जैसे अंतरराष्ट्रीय सप्लाई में दिक्कतें बढ़ीं, घरेलू वितरण प्रणाली पर दबाव बढ़ा और सिलेंडरों की उपलब्धता कम हो गई।
आम जनता की ज़िंदगी पर क्या हो रहा असर?
सर्वे में यह भी सामने आया कि असमानता और बढ़ गई है। अमीर परिवार बढ़ी हुई कीमत आसानी से वहन कर सकते हैं, जबकि गरीब परिवारों को रोज़मर्रा के लिए खाना पकाने का ईंधन भी मुश्किल से मिलता है। प्रवासी मज़दूर और दिहाड़ी मजदूर सबसे ज्यादा प्रभावित हुए हैं। कई लोग पोर्टेबल या छोटे सिलेंडरों पर निर्भर रहते हैं, जो अक्सर अनौपचारिक सप्लाई चैन से मिलते हैं। जब अवैध रिफिलिंग और ब्लैक मार्केट पर सख्ती बढ़ी, तो इन परिवारों के पास सस्ता और भरोसेमंद ईंधन नहीं बचा। नतीजतन, कई लोग अपने गाँव लौटने को मजबूर हुए।
सरकार और नीतियां: समाधान की दिशा में
सरकार ने स्थिति को नियंत्रण में लाने के लिए कई कदम उठाए हैं। इनमें घरेलू उत्पादन बढ़ाना, जमाखोरी पर सख्ती करना, और बुकिंग पर अस्थायी रोक लगाना शामिल हैं। नीति-निर्माता पाइप वाली प्राकृतिक गैस (PNG) और इथेनॉल जैसे विकल्पों को भी बढ़ावा दे रहे हैं। इसका मकसद सप्लाई को स्थिर बनाना और भविष्य में होने वाले अस्थिरता से निपटना है। LocalCircles का यह सर्वे यह भी दिखाता है कि सरकार और नागरिकों को मिलकर ऐसे उपाय करने होंगे जिससे कालाबाज़ारियों को मौका न मिले और हर परिवार तक समय पर और उचित मूल्य पर LPG पहुंच सके।
LocalCircles सर्वे का सारांश
- 20,549 परिवारों में से:37% को सप्लाई में कोई दिक्कत नहीं।
- 37% को सप्लाई में देरी हुई।
- 25% को बुकिंग में परेशानी।
- 12% ने ब्लैक मार्केट से खरीदी।
- 3% ने अन्य इंतज़ाम किए।
- 7% ने बुकिंग/डिलीवरी में धोखाधड़ी देखी।
सर्वे में उत्तर देने वालों में 66% पुरुष, 34% महिलाएँ थीं। उत्तरदाता टियर 1 से 45%, टियर 2 से 30% और टियर 3-5 ज़िलों से 25% थे।
वर्तमान में एलपीजी सप्लाई में सुधार के संकेत
हालांकि घरेलू LPG सप्लाई में हाल ही में सुधार आया है, फिर भी 56% परिवारों को पिछले 5 हफ़्तों में देरी और 12% को ब्लैक मार्केट से खरीदने की मजबूरी का सामना करना पड़ा। यह संकट हमें याद दिलाता है कि भारत की ऊर्जा सुरक्षा और वितरण प्रणाली में सुधार की ज़रूरत है। अगर आप भी LPG सप्लाई से प्रभावित हुए हैं, तो LocalCircles पर अपनी प्रतिक्रिया साझा कर सकते हैं।
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