Rinku Singh Rahi IAS Resignation: यूपी कैडर के IAS अधिकारी रिंकू सिंह राही ने राष्ट्रपति को पत्र लिखकर खुद को IAS से मुक्त कर PCS में वापस भेजने की मांग की है। आठ महीने से काम न मिलने की बात कहते हुए उन्होंने सिस्टम पर सवाल उठाए हैं। अब इस पर केंद्र और यूपी सरकार की नजरें टिकी हैं।

उत्तर प्रदेश कैडर के एक आईएएस अधिकारी का फैसला इन दिनों प्रशासनिक गलियारों में चर्चा का विषय बना हुआ है। 2023 बैच के आईएएस अधिकारी रिंकू सिंह राही ने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू को 7 पन्नों का एक ‘तकनीकी त्यागपत्र’ भेजा है। इस पत्र में उन्होंने आईएएस सेवा से मुक्त करने और उन्हें दोबारा पीसीएस (प्रांतीय सिविल सेवा) में भेजने की अपील की है।

राही का कहना है कि उन्हें पिछले कई महीनों से कोई ठोस जिम्मेदारी नहीं दी गई है। सैलरी तो मिल रही है, लेकिन जनसेवा का मौका नहीं मिल रहा। उनके मुताबिक यह स्थिति उनके नैतिक सिद्धांतों के खिलाफ है।

“सैलरी मिल रही है, लेकिन काम नहीं”

अपने पत्र में रिंकू सिंह राही ने लिखा है कि पिछले करीब आठ महीनों से उन्हें कोई महत्वपूर्ण जिम्मेदारी नहीं दी गई। फिलहाल उन्हें राजस्व परिषद में अटैच किया गया है, जहां उन्हें सिर्फ वेतन मिल रहा है, लेकिन कोई वास्तविक काम नहीं दिया जा रहा। बताया जाता है कि जब वह Shahjahanpur में एसडीएम के पद पर तैनात थे, तब उन्होंने कई सख्त कार्रवाई की थी। इसके बाद उन्हें साइडलाइन किए जाने की बात सामने आई।

राही ने अपने पत्र में यह भी आरोप लगाया है कि सिस्टम में एक तरह का “पैरलल सिस्टम” चल रहा है, जिसमें ईमानदारी से काम करने वाले अधिकारियों को पर्याप्त जिम्मेदारी नहीं मिलती।

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क्या IAS को वापस PCS बनाया जा सकता है?

इस पूरे मामले ने एक बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है, क्या कोई आईएएस अधिकारी दोबारा पीसीएस में लौट सकता है? इस सवाल पर उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्य सचिव Alok Ranjan का कहना है कि यह प्रक्रिया बेहद दुर्लभ और जटिल है। उनके अनुसार दोनों सेवाएं पूरी तरह अलग हैं।

  • आईएएस सेवा संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) के तहत आती है
  • पीसीएस राज्य सरकार की प्रांतीय सेवा होती है

जब कोई अधिकारी आईएएस में चयनित होता है, तो वह पीसीएस सेवा से औपचारिक रूप से इस्तीफा देता है। ऐसे में तकनीकी रूप से उसे दोबारा पीसीएस में भेजना संभव नहीं माना जाता।

यूपी कैडर होने से राज्य सरकार की राय अहम

इस मामले में अंतिम फैसला केंद्र स्तर पर होगा। रिंकू सिंह राही का पत्र केंद्र सरकार के कार्मिक विभाग (DoPT) और राष्ट्रपति के पास गया है। हालांकि, चूंकि वह उत्तर प्रदेश कैडर के अधिकारी हैं, इसलिए राज्य सरकार की राय भी महत्वपूर्ण मानी जाएगी। फिलहाल इस मामले पर Yogi Adityanath सरकार की ओर से कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है। पूर्व मुख्य सचिव आलोक रंजन का कहना है कि यह मामला बातचीत से भी सुलझाया जा सकता है। अगर अधिकारी पूरी तरह इस्तीफा देना चाहते तो वह सीधे अपने विभागाध्यक्ष या संबंधित प्राधिकरण को इस्तीफा भेजते।

संघर्ष भरी रही रिंकू सिंह राही की कहानी

रिंकू सिंह राही की कहानी भी काफी संघर्ष से भरी रही है। वह उत्तर प्रदेश के Hathras जिले के रहने वाले हैं।

  • 2004 में उन्होंने यूपीपीएससी पास कर पीसीएस अधिकारी बने
  • समाज कल्याण विभाग में सोशल वेलफेयर ऑफिसर के रूप में काम किया

2008-09 में मुजफ्फरनगर में उन्होंने छात्रवृत्ति और पेंशन घोटाले का खुलासा किया था। इस मामले में करीब 83 से 100 करोड़ रुपये के फर्जीवाड़े की बात सामने आई थी। इस खुलासे के बाद माफिया ने उन पर हमला कर दिया और उन पर सात गोलियां चलाई गईं। इस हमले में उन्होंने अपनी एक आंख खो दी, लेकिन इसके बावजूद उन्होंने हार नहीं मानी।

16 बार UPSC देने के बाद बने IAS

रिंकू सिंह राही ने हार नहीं मानी और लगातार कोशिश करते रहे। उन्होंने 16 बार UPSC की परीक्षा दी और आखिरकार 2022 में उनका चयन आईएएस के रूप में हुआ। आईएएस बनने के बाद माना जा रहा था कि उन्हें बड़े स्तर पर काम करने का मौका मिलेगा। लेकिन अब महज दो साल बाद ही उन्होंने खुद डिमोशन की मांग कर दी है। राही ने साफ कहा है कि उनका राजनीति में जाने का कोई इरादा नहीं है। उनका सिर्फ एक ही मकसद है, काम करना और लोगों की सेवा करना।

उनके पिता ने भी इस पूरे मामले पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा है कि अगर ईमानदार अधिकारियों को उनका हक नहीं मिलेगा तो देश में ईमानदारी बचाना मुश्किल हो जाएगा।उनके पिता ने भी इस पूरे मामले पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा है कि अगर ईमानदार अधिकारियों को उनका हक नहीं मिलेगा तो देश में ईमानदारी बचाना मुश्किल हो जाएगा।

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