'ट्रैफिक चालान स्कैम' से बचें। धोखेबाज नकली SMS व लिंक भेजकर पैसे ठग रहे हैं। चालान का भुगतान सिर्फ आधिकारिक 'परिवहन' वेबसाइट पर करें। अनजान लिंक पर क्लिक न करें व OTP न बताएं। धोखाधड़ी पर 1930 पर कॉल करें।
देश में साइबर फ्रॉड की हैरान करने वाली कहानियां खत्म ही नहीं हो रहीं। हाल के दिनों में हमने केरल समेत कई जगहों पर साइबर स्कैम की खबरें देखी हैं। पुलिस और साइबर एजेंसियां भले ही इन मामलों पर सख्ती कर रही हैं, लेकिन धोखेबाज भी लोगों को फंसाने के लिए नए-नए पैंतरे आजमा रहे हैं। हाल में सबसे ज्यादा चर्चा में रहा है 'ट्रैफिक चालान स्कैम'। इस एक ही स्कैम से कई लोगों के पैसे डूब गए। तो चलिए, ट्रैफिक चालान स्कैम में फंसने से बचने के लिए क्या-क्या ध्यान रखना है, इस पर विस्तार से बात करते हैं।
नकली ट्रैफिक चालान क्या हैं?
साइबर ठग नकली ट्रैफिक चालान के मैसेज भेजकर लोगों को अपने जाल में फंसाते हैं। लोगों को SMS, वॉट्सऐप मैसेज और ईमेल के जरिए ट्रैफिक चालान भरने के लिए फर्जी निर्देश मिलते हैं। ये मैसेज PDF अटैचमेंट के साथ भी आ सकते हैं। ये मैसेज असली लगें, इसके लिए धोखेबाज कुछ खास तरीके अपनाते हैं, जिनके संकेत ये हैं।
- आपको अनजान लोगों से SMS, व्हाट्सएप मैसेज या मेल आएगा कि आपका ट्रैफिक फाइन बाकी है। इस मैसेज को सरकारी दिखाने के लिए इसमें आधिकारिक भाषा और लोगो का इस्तेमाल किया जा सकता है।
- तुरंत पैसे भेजने के लिए मैसेज के साथ एक लिंक या QR कोड दिया होगा।
- चेतावनी दी जाएगी कि अगर जल्द से जल्द पैसे नहीं भरे, तो आपका लाइसेंस रद्द कर दिया जाएगा और अन्य कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
- आपसे 'परिवहन' पोर्टल जैसी दिखने वाली नकली वेबसाइट, थर्ड-पार्टी ऐप्स या एजेंटों के जरिए पैसे भरने के लिए कहा जाएगा।
- लेकिन ऐसे नकली संदेशों में, आपको दिए गए नोटिस का नंबर, गाड़ी का विवरण या अपराध की जगह जैसी कोई जानकारी नहीं मिलेगी।
- सरकारी 'परिवहन' वेबसाइट पर जाने के बजाय, मैसेज में आपसे बैंक अकाउंट की जानकारी, CVV और OTP मांगा जाएगा।
ट्रैफिक चालान धोखाधड़ी से कैसे बचें?
लेकिन जैसे ही आप मैसेज में दिए गए लिंक पर क्लिक करते हैं या QR कोड स्कैन करते हैं, आपका बैंक अकाउंट खाली हो सकता है। इससे बचने के लिए सबसे पहले आपको मिले मैसेज या ईमेल की जांच करनी होगी कि वो असली है भी या नहीं। यह भी पक्का कर लें कि चालान में आपकी गाड़ी या लाइसेंस का नंबर दिया गया है। ट्रैफिक नियम तोड़ने का जुर्माना हमेशा 'परिवहन' या MVD जैसी सरकारी वेबसाइटों से ही भरें। पेमेंट करने से पहले, वेबसाइट का URL जरूर चेक कर लें।
- किसी भी अनजान व्यक्ति के साथ OTP, बैंक खाते की जानकारी, कार्ड नंबर या CVV शेयर न करें।
- पेमेंट करने के लिए भेजे गए लिंक पर क्लिक न करें या QR कोड स्कैन न करें।
- ट्रैफिक फाइन भरने के लिए कभी भी थर्ड-पार्टी ऐप्स या एजेंटों पर भरोसा न करें।
अगर आपको जरा भी शक हो कि आप किसी साइबर ठगी का शिकार हो गए हैं, तो फौरन नेशनल साइबर क्राइम हेल्पलाइन नंबर 1930 पर कॉल करें। आप https://cybercrime.gov.in/ वेबसाइट पर जाकर भी अपनी शिकायत दर्ज करा सकते हैं। ध्यान दें, साइबर फ्रॉड होने के बाद पहले 60 मिनट, जिसे 'गोल्डन आवर' भी कहते हैं, बहुत कीमती होते हैं। इस दौरान शिकायत करने से आपके पैसे बचने की संभावना बढ़ जाती है।
