तमिलनाडु में मुख्यमंत्री एमके स्टालिन ने 1.31 करोड़ महिलाओं के खाते में 5000-5000 रुपये भेजे हैं। 'कलैगनार मगलिर उरिमाई थोगई' योजना के तहत दी गई इस मदद को विपक्ष को मात देने की एक राजनीतिक चाल माना जा रहा है।

चेन्नई: तमिलनाडु में करोड़ों महिलाएं सुबह सोकर उठीं भी नहीं थीं कि उनके खातों में 5000-5000 रुपये आ गए। मुख्यमंत्री एमके स्टालिन के इस मास्टरस्ट्रोक को राजनीतिक दुनिया एक 'सर्जिकल स्ट्राइक' बता रही है, जिसने विधानसभा चुनाव से पहले सरकारी योजनाओं को रोकने की विपक्ष की कोशिशों को नाकाम कर दिया। 'कलैगनार मगलिर उरिमाई थोगई' योजना के तहत शुक्रवार सुबह करीब 6 बजे 1.31 करोड़ महिलाओं के खाते में यह रकम जमा हुई। हर महिला को 5,000 रुपये मिले, जिसमें फरवरी, मार्च और अप्रैल की 3,000 रुपये की किस्त और 2,000 रुपये का एक खास समर पैकेज शामिल है।

सरकार ने यह तेज कदम इसलिए उठाया क्योंकि उसे खबर मिली थी कि चुनाव आचार संहिता लागू होते ही इस योजना को अदालत के जरिए रोकने की कोशिशें हो सकती हैं। स्टालिन ने सोशल मीडिया पर साफ कहा, "जब वे रुकावटें डालने की कोशिश कर रहे थे, तो द्रविड़ मॉडल सरकार एक कदम आगे निकल गई।" खास बात यह है कि पैसा खातों में पहुंचने के बाद ही आधिकारिक घोषणा की गई। इसके अलावा, मुख्यमंत्री ने यह भी ऐलान किया कि अगर डीएमके फिर से सत्ता में आई तो हर महीने मिलने वाली 1,000 रुपये की मदद को बढ़ाकर 2,000 रुपये कर दिया जाएगा।

तमिलनाडु में बड़ी चर्चा

इस कदम ने तमिलनाडु की राजनीति में एक बड़ी बहस छेड़ दी है। डीएमके समर्थक इसे ऐसे बता रहे हैं जैसे विपक्ष के जागने से पहले ही स्टालिन ने 'सिक्सर' मार दिया हो। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि यह कदम सरकार विरोधी लहर को कम करने और महिला वोटरों को अपने साथ बनाए रखने में मदद करेगा। एआईएडीएमके ने आरोप लगाया कि यह पैसा चुनाव के डर से दिया जा रहा है, लेकिन यह तय है कि आने वाले विधानसभा चुनाव में यह एक अहम मुद्दा बनेगा। आने वाले दिनों में एआईएडीएमके भी महिलाओं के खातों में 2,000 रुपये देने की अपनी योजना के साथ मैदान में उतर रही है, जिससे तमिलनाडु की राजनीति और गरमा गई है।