आतंक के मामले में Top पर पाकिस्तान, जानें GTI 2026 रिपोर्ट के हैरान करने वाले फैक्ट
GTI 2026: क्या दुनिया सच में आतंक से सुरक्षित हो रही है या 2026 में पाकिस्तान-अफगान तनाव और IS की वापसी नया खतरा लेकर आएगा? मौतों में गिरावट, लेकिन बच्चों और lone actors पर बढ़ते हमले, ग्लोबल टेररिज्म इंडेक्स की चेतावनी क्या दर्शाती है?

Global Terrorism Index 2026: GTI 2026 की नई रिपोर्ट ने दुनिया को एक साथ राहत और डर-दोनों का संकेत दिया है। एक तरफ आंकड़े बताते हैं कि आतंकवाद से होने वाली मौतों में बड़ी गिरावट आई है, लेकिन दूसरी तरफ रिपोर्ट साफ चेतावनी देती है कि सबसे बुरा दौर अभी आना बाकी हो सकता है। सबसे ज्यादा खराब हालात पाकिस्तान के हैं, जो खतरनाक मोड़ पर पहुंच गया है। 2026 का ग्लोबल टेररिज्म इंडेक्स (GTI) रिपोर्ट बताती है कि पाकिस्तान आतंकवाद से सबसे ज्यादा प्रभावित देश बन चुका है। क्या यह सिर्फ एक दौर का बदलाव है या दीर्घकालिक संकट की शुरुआत? आइए इसे आसान भाषा में समझें।
पहले राहत की खबर-मौतें घटीं
2024 से 2025 में वैश्विक आतंकवाद से होने वाली मौतें 7,714 से घटकर 5,582 हो गईं, यानी 28% की गिरावट। हमलों की संख्या भी 22% कम होकर 2,944 पर आ गई।
- बुर्किना फासो में JNIM ने 120 सैनिकों को मारा, जो सबसे घातक हमला था।
- IS, JNIM, TTP और अल-शबाब ने कुल मौतों का 70% जिम्मेदार।
- MENA क्षेत्र में मौतों में 81% गिरावट (1,064 से घटकर 205)।
- इराक ने पिछले दो दशकों में मौतों में 99% की गिरावट दर्ज की।
- लेकिन इन आंकड़ों के बावजूद खतरे पूरी तरह खत्म नहीं हुए।
यह पिछले कई सालों में सबसे सकारात्मक संकेत माना जा रहा है। करीब 21 देशों में सुधार दर्ज हुआ, जबकि सिर्फ 19 देशों में हालात खराब हुए-जो एक अच्छा संकेत है।
पाकिस्तान बना सबसे खतरनाक देश-क्यों बढ़ा आतंक?
2025 में पाकिस्तान आतंकवाद से सबसे ज्यादा प्रभावित देश बन गया। इसने बुर्किना फासो को पीछे छोड़ दिया। पाकिस्तान के आंकड़े चौंकाने वाले हैं:
- 1,139 मौतें
- 1,045 आतंकी घटनाएं
- पिछले 10+ सालों में सबसे खराब स्थिति
यह कोई अचानक बदलाव नहीं, बल्कि एक लंबे समय से बढ़ती समस्या का परिणाम है। इसके मुख्य कारण 2021 में अफगानिस्तान में तालिबान की वापसी, खुली सीमाओं से आतंकी संगठनों को फायदा और TTP (Tehrik-e-Taliban Pakistan) का मजबूत होना बताया गया है। क्योकि सिर्फ 2025 में TTP हमलों में 24% बढ़ोतरी हुई। इस दौरान 595 हमले और 637 मौतें हुईं। इसके अलावा बलूचिस्तान में भी हिंसा बढ़ी, जहां बलूचिस्तान लिबरेशन आर्मी की ओर से जाफ़र एक्सप्रेस ट्रेन हाईजैक जैसी घटनाएं सामने आईं। भारत-पाक सीमा तनाव के कारण मई 2025 में एयर स्ट्राइक हुईं, जिससे क्षेत्रीय अस्थिरता बढ़ी।
इन सब वजहों से पाकिस्तान GTI में पहले स्थान पर है और यह संकेत देता है कि आने वाले समय में हालात और गंभीर हो सकते हैं।
दक्षिण एशिया सबसे ज्यादा प्रभावित-भारत कहां खड़ा है?
रिपोर्ट के अनुसार, दक्षिण एशिया में पाकिस्तान और अफ़गानिस्तान के बाद भारत तीसरे स्थान पर है। लेकिन भारत ने अपने आतंकवाद प्रोफ़ाइल में काफी सुधार किया। भारत के जो आंकड़े पेश किए गए हैं, उनके मुताबिक:
- GTI रैंक: भारत का 13वां स्थान है।
- 2025 में आतंकवादी हमलों में 43% की गिरावट।
- पिछले दस सालों में GTI स्कोर 0.415 अंक कम हुआ।
- भारत का वैश्विक रैंकिंग में दो पायदान ऊपर चढ़ना।
पिछले दशक में लगातार सुधार यानी जहां पाकिस्तान और अफगानिस्तान संघर्ष में फंसे हैं, वहीं भारत धीरे-धीरे स्थिति संभाल रहा है। इसके विपरीत बांग्लादेश और नेपाल ने और भी बेहतर प्रदर्शन किया। बांग्लादेश में हमलों में 100% गिरावट, नेपाल में लगातार तीसरे साल कोई हमला दर्ज नहीं।
अफ्रीका बना नया युद्धक्षेत्र-लेकिन उलझी हुई कहानी
Sub-Saharan Africa, खासकर Sahel region, आज आतंकवाद का नया केंद्र बन गया है। दुनिया के टॉप 10 में से 6 देश इसी क्षेत्र से हैं। कुल मौतों का 50% से ज्यादा हिस्सा यहीं से आता है, लेकिन ट्विस्ट ये है कि मौतें कम हुई हैं, पर खतरा खत्म नहीं हुआ। बुर्किना फासो में मौतें 45% घटीं लेकिन प्रति हमले मौतें बढ़कर 14.3 हो गईं। मतलब हमले कम, लेकिन ज्यादा खतरनाक हुए हैं। सब-सहारा अफ्रीका में हालात जटिल हैं। नाइजीरिया में आतंकवाद से मौतें 46% बढ़ीं (750 मौतें) हुईं। ISWAP ने हमले तेज़ कर दिए, 2024 में 20 से बढ़कर 2025 में 92 हों गईं। डेमोक्रेटिक रिपब्लिक ऑफ कांगो में 35 घटनाओं में 467 मौतें हुईं हैं। यह क्षेत्र अब भी वैश्विक आतंकवाद के सबसे सक्रिय हॉटस्पॉट में शामिल है।
पश्चिमी देशों में नया ट्रेंड-Lone Wolf Attack
पश्चिमी देशों में आतंकवाद का नया रूप सामने आया है। 2025 में मौतों में 280% बढ़ोतरी हुई। जिनमें ज्यादातर हमले lone actor (अकेले हमलावर) था। पिछले 5 सालों में 93% हमले अकेले लोगों ने किए।यही वजह है कि यह और ज्यादा खतरनाक है क्योंकि इन्हें ट्रैक करना मुश्किल होता है और ये अचानक हमला करते हैं। आंकड़ों की बात करें तो अमेरिका में 27 मौतें, ब्रिटेन में मैनचेस्टर हमले में 2 मौतें हुई हैं। इसी प्रकार ऑस्ट्रेलिया में बॉन्डी बीच पर गोलीबारी में 15 मौतें और 40 घायल हुए हैं। राजनीतिक हिंसा और आतंकवाद की सीमा धुंधली होती जा रही है।
सबसे बड़ा खतरा-बच्चे बन रहे हैं नया टारगेट
रिपोर्ट का सबसे चिंताजनक हिस्सा यही है। 2025 में 42% आतंकी जांच में नाबालिग शामिल थे। जो 2021 के मुकाबले 3 गुना ज्यादा है। कट्टरपंथ (Radicalization) अब बहुत तेज हो गया है। रिसर्च के मुताबिक पहले कट्टरपंथता में पहले 16 महीने लगते थे अब यह बच्चों के दिमाग में सिर्फ कुछ हफ्ते में ही घर कर जाती है। इसका कारण सोशल मीडिया एल्गोरिद्म और एन्क्रिप्टेड ऐप्स को बताया गया है। इसे “एक्सेलरेशन गैप” कहा जा रहा है (सरकार की प्रतिक्रिया से तेज़ कट्टरपंथ फैल रहा है)।
क्या आने वाला है सबसे खतरनाक दौर?
रिपोर्ट साफ कहती है कि अभी जो सुधार दिख रहा है, वह स्थायी नहीं भी हो सकता। खतरे के बड़े संकेत:
- ISIS का सीरिया में फिर सक्रिय होना।
- 20,000 कैदियों का IS हिरासत केंद्रों से भागना।
- साहेल क्षेत्र में जिहादियों का दबदबा बढ़ा।
- पाकिस्तान-अफगान युद्ध जैसी स्थिति
- अमेरिका-इजरायल ऑपरेशन के बाद ईरान तनाव
इन सबका मतलब कि दुनिया एक नए, ज्यादा खतरनाक आतंक दौर के करीब हो सकती है।
2026 ग्लोबल टेररिज्म इंडेक्स की मुख्य बातें
- दक्षिण एशिया सबसे प्रभावित क्षेत्र (औसत GTI स्कोर 3.465)।
- पाकिस्तान सबसे खतरनाक, अफ़गानिस्तान 11वें, भारत 13वें।
- वैश्विक मौतों में 28% गिरावट, हमलों में 22% कमी।
- प्रमुख खतरे: TTP, IS, JNIM, अल-शबाब और lone-actor हमले।
- युवा और बच्चे अधिक प्रभावित।
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