नासिक फर्जी बाबा अशोक खरात केस में गिरफ्तारी के बाद नए-नए खुलासे हो रहे हैं। महिला आयोग की भूमिका और रूपाली चाकणकर के नाम आने से मामला सियासी बन गया है। SIT जांच में राजनीतिक संरक्षण और जांच पर असर के सवाल उठ रहे हैं।
Nasik Farji Baba Video Case: नासिक में तथाकथित फर्जी बाबा अशोक खरात की गिरफ्तारी के बाद उसके अपराधों से जुड़े कई चौंकाने वाले खुलासे सामने आ रहे हैं। यह मामला अब सिर्फ एक क्राइम तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि सत्ता और संरक्षण के संभावित गठजोड़ की ओर भी इशारा कर रहा है। अब सवाल केवल यह नहीं है कि आरोपी ने क्या किया, बल्कि यह भी है कि वह इतने लंबे समय तक कानून के शिकंजे से आखिर बचा कैसे रहा?
राजनीतिक कनेक्शन पर उठे सवाल
इस मामले में रूपाली चाकणकर का नाम सामने आने के बाद विवाद और बढ़ गया है। क्या आरोपी को किसी राजनीतिक संरक्षण का फायदा मिला?, क्या प्रभावशाली लोगों ने जांच को प्रभावित करने की कोशिश की? इस तरह के सवाल अब जांच का सबसे अहम हिस्सा बन चुके हैं और इन्हीं के जवाब खोजे जा रहे हैं।
महिला आयोग की भूमिका पर बढ़ी शंका
यह मामला अब केवल आपराधिक नहीं रहा, बल्कि इसमें सियासी रंग भी दिखने लगा है। जिस महिला आयोग से पीड़ितों को न्याय की उम्मीद होती है, उसी संस्था की भूमिका पर सवाल उठ रहे हैं। अगर किसी आरोपी को अप्रत्यक्ष रूप से मदद मिलने के संकेत मिलते हैं, तो इससे पूरे सिस्टम पर भरोसा कमजोर होना स्वाभाविक है।
SIT जांच और नोटिस से आया नया मोड़
इस केस में SIT की जांच और पुलिस को भेजे गए नोटिस ने मामले को नया मोड़ दे दिया है। इन घटनाओं के बाद रूपाली चाकणकर की भूमिका को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं और अब उनकी भूमिका की गहराई से जांच की जा रही है।
पीड़ित महिलाओं के आरोप और खुलासे
अशोक खरात की गिरफ्तारी के बाद कई पीड़ित महिलाएं सामने आई हैं। उन्होंने आरोपी के खिलाफ गंभीर आरोप लगाए हैं, जिससे मामले की गंभीरता और बढ़ गई है। इसी दौरान यह भी सामने आया कि एक पीड़िता की शिकायत पर दर्ज केस में महिला आयोग ने हस्तक्षेप किया था और पुलिस को नोटिस जारी किया गया था। इससे जांच की दिशा प्रभावित होने की आशंका जताई जा रही है।
शिरडी केस: दुष्कर्म के आरोप और आयोग की कार्रवाई
फरवरी में शिरडी पुलिस स्टेशन में एक मामला दर्ज किया गया था, जिसमें एक युवती ने अशोक खरात पर दुष्कर्म का आरोप लगाया था। इस केस में महिला आयोग ने खुद संज्ञान लिया, सुनवाई तय की और पुलिस को नोटिस भेजा। नोटिस में पीड़िता को 17 मार्च को आयोग के सामने पेश होने के लिए कहा गया था। यह कदम अब जांच के दायरे में है, क्योंकि उसी समय यह मामला SIT को सौंपा जा चुका था।
आयोग के पत्र और जांच पर असर की आशंका
जांच में यह भी सामने आया है कि महिला आयोग ने 5 और 9 मार्च को भी पुलिस को पत्र भेजे थे। इन पत्रों में केस की प्रगति और सुनवाई से जुड़े निर्देश दिए गए थे। इससे यह सवाल उठ रहा है कि क्या आयोग ने अपनी सीमाओं से आगे जाकर काम किया और क्या इससे आरोपी को अप्रत्यक्ष रूप से फायदा मिला। इसी वजह से अब पूरे घटनाक्रम में रूपाली चाकणकर की भूमिका की विस्तार से जांच की जा रही है। हालांकि, एनसीपी नेता रूपाली ने महाराष्ट्र महिला विंग के अध्यक्ष पद के अलावा महाराष्ट्र राज्य महिला आयोग के अध्यक्ष पद से भी इस्तीफा दे दिया है।


