Afghanistan Pakistan Border Clash: अफगानिस्तान और पाकिस्तान की सीमा पर सीजफायर खत्म होते ही फिर हिंसा भड़क गई। दोनों देशों के बीच गोलाबारी में नागरिकों की मौत और कई लोग घायल हुए हैं। TTP हमलों और एयरस्ट्राइक के बाद हालात फिर तनावपूर्ण हो गए हैं।

अफगानिस्तान और पाकिस्तान के बीच सीमा पर हालात एक बार फिर बिगड़ गए हैं। ईद के मौके पर घोषित अस्थायी युद्धविराम खत्म होते ही दोनों देशों के बीच गोलीबारी और तोपों से हमले शुरू हो गए। अफगान तालिबान अधिकारियों के अनुसार इस हिंसा में दो आम नागरिकों की मौत हो गई है और आठ लोग घायल हुए हैं। वहीं पाकिस्तान की तरफ भी एक नागरिक के मारे जाने की खबर सामने आई है। यह घटना ऐसे समय हुई है जब दोनों देशों के बीच पिछले कुछ हफ्तों से लगातार तनाव बढ़ता जा रहा है और सीमा पर हालात लगभग जंग जैसे बनते जा रहे हैं।

सीजफायर खत्म होते ही शुरू हुई गोलाबारी

अफगानिस्तान और पाकिस्तान ने ईद के मौके पर पांच दिनों का अस्थायी युद्धविराम घोषित किया था। यह युद्धविराम 25 मार्च को खत्म हुआ। इसके तुरंत बाद सीमा पर फिर से झड़प शुरू हो गई।

न्यूज एजेंसी AP की रिपोर्ट के मुताबिक, एक अफगान अधिकारी ने बताया कि युद्धविराम खत्म होने के कुछ ही समय बाद पाकिस्तानी सेना ने नरई और सरकानो इलाकों में दर्जनों तोप के गोले दागे। अफगान अधिकारियों का कहना है कि इसके जवाब में अफगान सीमा बलों ने भी जवाबी कार्रवाई की और तीन पाकिस्तानी सैन्य चौकियों को निशाना बनाया। इस दौरान एक व्यक्ति की मौत हो गई।

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पहले हुए हमलों ने बढ़ाया तनाव

सीमा पर यह नई झड़प उस समझौते के करीब एक सप्ताह बाद हुई है, जिसमें दोनों देशों ने अस्थायी रूप से लड़ाई रोकने पर सहमति जताई थी। यह समझौता सऊदी अरब, तुर्किये और कतर की मध्यस्थता के बाद हुआ था। इससे पहले 17 मार्च की रात पाकिस्तान ने अफगानिस्तान के अंदर हवाई हमले किए थे। अफगान तालिबान सरकार का दावा है कि इन हमलों में काबुल के एक नशा मुक्ति अस्पताल को निशाना बनाया गया था, जिसमें 400 से ज्यादा लोगों की मौत हुई।

हालांकि पाकिस्तान ने इस आरोप को खारिज किया है। पाकिस्तान का कहना है कि उसने नागरिक ठिकानों पर नहीं बल्कि एक गोला-बारूद के भंडार को निशाना बनाया था। संयुक्त राष्ट्र और कुछ मीडिया रिपोर्टों में नशा मुक्ति केंद्र पर हमले का जिक्र जरूर किया गया, लेकिन पाकिस्तान की सेना ने नागरिकों के मारे जाने की बात स्वीकार नहीं की।

पाकिस्तान का आरोप: तालिबान दे रहा आतंकियों को पनाह

पाकिस्तान लंबे समय से आरोप लगाता रहा है कि अफगानिस्तान की तालिबान सरकार अपने देश में ऐसे समूहों को पनाह देती है जो पाकिस्तान में हमले करते हैं।

पाकिस्तानी सेना के प्रवक्ता अहमद शरीफ चौधरी ने यह भी आरोप लगाया कि तालिबान नशे के आदी लोगों को आत्मघाती हमलों के लिए इस्तेमाल करता है। हालांकि उन्होंने अपने इस दावे के समर्थन में कोई ठोस सबूत पेश नहीं किया। दूसरी तरफ अफगान तालिबान इन सभी आरोपों को लगातार खारिज करता रहा है और कहता है कि पाकिस्तान अपनी आंतरिक समस्याओं का दोष अफगानिस्तान पर डाल रहा है।

TTP ने भी तोड़ा अपना युद्धविराम

इसी बीच पाकिस्तान तालिबान यानी तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (TTP) ने भी अपने तीन दिन के युद्धविराम को खत्म कर दिया है। संगठन ने घोषणा की है कि वह पाकिस्तान के अंदर फिर से हमले शुरू कर रहा है। TTP अफगान तालिबान से अलग संगठन है, लेकिन दोनों के बीच वैचारिक और रणनीतिक संबंध माने जाते हैं। 2021 में अफगान तालिबान के सत्ता में आने के बाद से पाकिस्तान में TTP के हमलों में तेजी देखी गई है। अमेरिका और संयुक्त राष्ट्र TTP को आतंकवादी संगठन घोषित कर चुके हैं।

पाकिस्तान-अफगानिस्तान संघर्ष की पृष्ठभूमि

दोनों देशों के बीच मौजूदा तनाव की शुरुआत फरवरी में हुई थी। 22 फरवरी को पाकिस्तान ने अफगानिस्तान के सीमावर्ती इलाकों में एयरस्ट्राइक की थी। पाकिस्तान के उप गृह मंत्री तलाल चौधरी ने दावा किया था कि इन हमलों में TTP के कम से कम 70 लड़ाके मारे गए। बाद में पाकिस्तानी मीडिया ने यह संख्या 80 तक बताई। इसके जवाब में 27 फरवरी को अफगानिस्तान ने भी पाकिस्तान पर हमला किया और कहा कि वह अपनी संप्रभुता की रक्षा करेगा। अफगान रक्षा मंत्रालय ने उस समय कहा था कि पाकिस्तान को सही समय पर कड़ा जवाब दिया जाएगा।

पाकिस्तान और TTP के बीच दुश्मनी क्यों?

पाकिस्तान और तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान के बीच संघर्ष की जड़ें करीब दो दशक पुरानी हैं। 2001 में जब अमेरिका ने अफगानिस्तान पर हमला किया था, तब पाकिस्तान ने अमेरिका का साथ दिया था। TTP ने इसे इस्लाम के खिलाफ कदम बताया और पाकिस्तान सरकार के खिलाफ लड़ाई शुरू कर दी। TTP का मानना है कि पाकिस्तान सरकार इस्लामी सिद्धांतों के अनुसार शासन नहीं करती, इसलिए वह उसके खिलाफ हमले करता है। अफगानिस्तान और पाकिस्तान के बीच सीमा पर बढ़ता तनाव पूरे क्षेत्र के लिए चिंता का कारण बन गया है। दोनों देशों के बीच आरोप-प्रत्यारोप और सैन्य कार्रवाई के चलते हालात लगातार बिगड़ते जा रहे हैं।

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