Madhya Pradesh Village Declares Itself Abuse-Free: मध्य प्रदेश के बुरहानपुर जिले का बोरसर गांव गाली-मुक्त गांव बन गया है। पंचायत ने नियम बनाया है कि गाली देने पर जुर्माना या गांव की सफाई करनी होगी। टीवी कलाकार अश्विन पाटील की पहल से शुरू हुई यह मुहिम अब जिलेभर में चर्चा का विषय बन गई है।
मध्य प्रदेश के बुरहानपुर जिले का एक छोटा सा गांव इन दिनों पूरे इलाके में चर्चा का विषय बना हुआ है। यहां के लोगों ने मिलकर ऐसा नियम बनाया है, जिसने गांव की पहचान ही बदल दी है। जिला मुख्यालय से करीब 20 किलोमीटर दूर स्थित बोरसार गाँव को अब “गाली-मुक्त गांव” घोषित किया गया है। ग्राम पंचायत का दावा है कि यहां अब कोई भी व्यक्ति गाली-गलौज नहीं करता। अगर कोई ऐसा करता हुआ पकड़ा जाता है तो उसके खिलाफ कार्रवाई तय है। यह पहल सिर्फ नियम बनाने तक सीमित नहीं है, बल्कि गांव के लोग इसे अपने व्यवहार में भी उतार चुके हैं।
गाली देने पर लगता है जुर्माना
करीब 6000 की आबादी वाले इस गांव में पंचायत ने साफ नियम बनाया है कि गाली देने वालों को सजा मिलेगी। ग्राम पंचायत के फैसले के मुताबिक अगर कोई व्यक्ति गाली देता हुआ पाया जाता है तो उस पर जुर्माना लगाया जाता है। अगर कोई जुर्माना नहीं भर पाता, तो उसे गांव में एक घंटे तक साफ-सफाई का काम करना पड़ता है। गांव के लोगों का कहना है कि इस नियम के बाद माहौल काफी बदल गया है। अब लोग बोलचाल में ज्यादा सभ्य भाषा का इस्तेमाल करने लगे हैं।
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गांव की सहमति से लागू हुआ फैसला
यह नियम किसी एक व्यक्ति ने नहीं बनाया, बल्कि पूरे गांव की सहमति से लागू किया गया है। पंचायत ने पहले ग्रामीणों से बातचीत की और फिर इस पहल को शुरू किया गया। लोगों को जागरूक करने के लिए गांव में कई जगह पोस्टर लगाए गए, जिन पर साफ लिखा गया है -“गाली देना मना है।” इसके अलावा मुनादी कराकर भी लोगों को इस नियम की जानकारी दी गई। ग्रामीणों ने इसे सकारात्मक तरीके से स्वीकार किया।
टीवी कलाकार की पहल से शुरू हुई मुहिम
इस अनोखी पहल की शुरुआत गांव के ही निवासी और टीवी कलाकार अश्विन पाटिल ने की। उन्होंने बताया कि गांव में पहले गंदगी और गाली-गलौज की आदत एक बड़ी समस्या बन गई थी। इसे बदलने के लिए सबसे पहले सफाई अभियान शुरू किया गया।
बाद में उन्होंने पंचायत को सुझाव दिया कि गांव में गाली-गलौज पर रोक लगाने के लिए नियम बनाया जाए। इस प्रस्ताव पर सरपंच और उपसरपंच से चर्चा हुई और फिर पूरे गांव में इस मुहिम को लागू कर दिया गया।
जिले में हो रही पहल की सराहना
ग्राम पंचायत के सरपंच विनोद शिंदे का कहना है कि यह बदलाव सभी ग्रामीणों के सहयोग से संभव हुआ है। अब गांव में माहौल पहले से ज्यादा शांत और सकारात्मक हो गया है। लोग आपस में सम्मान के साथ बात करते हैं। इस पहल की सराहना सिर्फ गांव में ही नहीं, बल्कि पूरे बुरहानपुर जिले में हो रही है।
समाज के लिए बन सकता है उदाहरण
बोरसर गांव की यह पहल बताती है कि अगर लोग मिलकर तय कर लें तो छोटे-छोटे नियम भी समाज में बड़ा बदलाव ला सकते हैं। अगर इसी तरह दूसरे गांव और कस्बे भी इस मॉडल को अपनाएं, तो सार्वजनिक जीवन में भाषा और व्यवहार दोनों में सकारात्मक बदलाव देखने को मिल सकता है।
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