“19 मिनट 34 सेकंड” वायरल वीडियो को लेकर इंटरनेट पर इन दिनों उत्सुकता के साथ ही भ्रम की भी स्थिति है। इसके असली होने का कोई सबूत नहीं है। फर्जी लिंक और डीपफेक के जरिए साइबर ठग यूजर्स को निशाना बना रहे हैं। सावधानी बरतना जरूरी है।

19 Minute 34 Second Viral Video: सोशल मीडिया पर पिछले कुछ दिनों से '19 मिनट 34 सेकंड का वायरल वीडियो' काफी सुर्खियों में है। लोग इस वीडियो को लेकर तमाम तरह के दावे कर रहे हैं। यहां तक कि इसके इसके पार्ट 2 और पार्ट 3 के रिलीज होने की खबर ने भी इंटरनेट पर तहलका मचा रखा है। इस वीडियो को दस्तु सोनाली और सोफिक एसके से जोड़कर देखा जा रहा है। कई लोग इसे खोज रहे हैं, जबकि कुछ लोग इसे देखने का दावा भी कर रहे हैं। लेकिन अभी तक इस वीडियो के अस्तित्व का कोई ठोस या विश्वसनीय प्रमाण सामने नहीं आया है।

'Part 2' और 'Part 3' की बढ़ती खोज

दरअसल, सोफिक SK और दुस्तु सोनाली के प्राइवेट वीडियो को लेकर भी चौंकाने वाले खुलासे हुए हैं। सोफिक और सोनाली के नाम पर नए सीजन 2 और 3 के दावे तेजी से वायरल हो रहे हैं। इन खबरों के चलते इंटरनेट यूजर्स के बीच उत्सुकता के साथ ही भ्रम भी फैल रहा है। हालांकि, जब इस पूरे मामले की सच्चाई सामने आई तो लोगों के होश उड़ गए। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर ये खबर तेजी से वायरल हुई कि सोफिक और सोनाली के कथित प्राइवेट वीडियो के नए पार्ट्स सीजन 2 और 3 आ चुके हैं। इसी वजह से कई यूजर्स इन वीडियोज को खोजने में लगे हुए हैं। हालांकि, जांच में सामने आया है कि इस तरह का कोई भी असली वीडियो या उसका कोई नया पार्ट मौजूद नहीं है। इस तरह के दावे पूरी तरह फर्जी हैं।

फर्जी लिंक और साइबर फ्रॉड का खतरा

साइबर एक्सपर्ट बताते हैं कि इस वायरल मुद्दे का फायदा उठाकर साइबर ठग एक्टिव हो गए हैं। इंटरनेट पर कई लिंक शेयर किए जा रहे हैं, जो दावा करते हैं कि वे इस वीडियो को पूरा या उसके कुछ हिस्से दिखाते हैं। साइबर सिक्योरिटी एक्सपर्ट्स के अनुसार, ऐसे ज्यादातर लिंक पूरी तरह फर्जी होते हैं। इनका उद्देश्य यूजर्स को खतरनाक वेबसाइट्स पर ले जाना होता है, जहां से उनके डिवाइस में मैलवेयर इंस्टॉल हो सकता है। यह मैलवेयर यूजर्स की संवेदनशील जानकारी जैसे पासवर्ड, बैंक डिटेल्स और पर्सनल डेटा चोरी कर सकता है। यह एक आम स्कैम तकनीक है, जिसमें अलग-अलग हिस्सों के नाम पर कई नकली लिंक बनाए जाते हैं। इसका मकसद यूजर्स को बार-बार क्लिक करने के लिए उकसाना होता है।

डीपफेक तकनीक का शक

यह भी संभावना जताई जा रही है कि इंटरनेट पर मौजूद कुछ वीडियो डीपफेक तकनीक से बनाए गए हो सकते हैं। डीपफेक एक AI आधारित तकनीक है, जिससे ऐसे वीडियो तैयार किए जाते हैं जो देखने में असली लगते हैं, लेकिन वास्तव में पूरी तरह नकली होते हैं। ठग इस तकनीक का उपयोग लोगों को भ्रमित करने और ज्यादा से ज्यादा ट्रैफिक खींचने के लिए करते हैं।

वायरल ट्रेंड कैसे बनते हैं जाल?

ऐसे वायरल विवाद यह दिखाते हैं कि कैसे इंटरनेट पर तेजी से फैलने वाली खबरें यूजर्स के लिए खतरा बन सकती हैं। लोगों की जिज्ञासा उन्हें बिना सोचे-समझे लिंक पर क्लिक करने के लिए मजबूर कर देती है। इससे वे अनजाने में फर्जी वेबसाइट्स पर पहुंच जाते हैं और अपनी निजी जानकारी जोखिम में डाल देते हैं।

यूजर्स के लिए जरूरी सावधानियां

  • किसी भी अनजान या संदिग्ध लिंक पर क्लिक न करें।
  • फुल वीडियो' जैसे दावों पर तुरंत भरोसा न करें।
  • किसी भी जानकारी को शेयर करने से पहले उसकी पुष्टि करें।
  • संदिग्ध वेबसाइट या गतिविधि की रिपोर्ट करें।