Talking About Periods: पीरियड्स पर खुलकर बात करना जरूरी है ताकि बेटियां बदलते शरीर को समझें और आत्मविश्वासी बनें। टैबू तोड़ें, सही समय पर बात करें, आरामदायक माहौल बनाएं और संवेदनशीलता से जानकारी दें।
Daughter Period Guidance: मेरी बेटी 10 साल की होने जा रही है और मुझे पता है कि उसे जल्द ही पीरियड्स शुरू होंगे। मुझे भी जब मैं 8वीं क्लास में थी, तब पहली बार पीरियड्स आए थे। लेकिन उस समय मां ने मुझे इसके बारे में कुछ नहीं बताया था, जिसकी वजह से समझना और संभालना मुश्किल हो गया था। अब बारी मेरी बेटी की है, लेकिन उससे इस बारे में खुलकर बात करने में मुझे शर्म और संकोच महसूस होता है। कई बार कोशिश करने के बाद भी मैं शुरू नहीं कर पाती। यह कहना है रोहिणी का, जो मध्य प्रदेश में रहने वाली एक हाउसवाइफ हैं। रोहिणी जैसी कई मांएं हैं, जो अपनी बेटियों से इस विषय पर समय रहते बातचीत नहीं कर पातीं। ऐसे में सवाल उठता है कि क्या बेटी के बड़े होने पर इस बारे में खुलकर बात करना जरूरी है? और अगर हां, तो कैसे? आइए जानते हैं विस्तार से।
आज भी हमारे समाज में पीरियड्स को लेकर टैबू हैं। हम खुलकर इस पर बात नहीं करते हैं। लेकिन एक मां को इसे लेकर ओपन होने की जरूरत है। बेटियों को पीरियड्स के बारे में सही जानकारी देना बहुत ज्यादा जरूरी है। वो अगर पहले से इसके बारे में जान लेती हैं, तो वो इसे सही तरीके से हैंडल कर सकती हैं। वो अपने नए शरीर से जुड़ पाती हैं।
बेटी के अंदर पीरियड्स को लेकर टैबू ना पैदा होने दें
जिस समाज में महिलाओं को पीरियड्स के दर्द और दाग छुपाने पड़ते हैं, अगर आपकी बेटी उसकी को देखेगी तो वो भी ऐसा ही करेंगी, जो उसे मेंटली डिस्टर्ब करती रहेगी। वो पीरियड्स के दौरान अपने भी भाइयों के सामने सहज नहीं रह पाएगी। पापा के नजदीक नहीं जाएगी। इसलिए पीरियड्स शुरू होने से पहले उन्हें बताएं कि आने वाले वक्त में उनकी बॉडी में क्या-क्या बदलाव होने वाले हैं। वो इसे बिल्कुल भी शर्मिंदगी के साथ ना जोड़ें, इसके लिए एक मां को जागरूक होना जरूरी है।
पीरियड्स को लेकर मूल बात और शुरुआत कैसे करें
टैबू को तोड़ें: पीरियड एक नेचुरल और सामान्य और हेल्दी प्रक्रिया है। हर महिला को इससे गुजरना होता है। इसके बावजूद कई समाजों में यह विषय संकोच और शर्म की भावना से जुड़ा होता है। लेकिन आप अपनी बेटी के साथ संकोच ना करें और टैबू को तोड़ते हुए बातचीत करें। बेटी को पीरियड्स आने के एक से दो साल पहले से इस पर बात करें।
पहले अनुभव का असर: पहली पीरियड का अनुभव यदि डिटेल्स में और सहानुभूतिपूर्ण तरीके से न हो, तो यह लड़की के आत्मविश्वास और समझ पर लम्बे समय तक असर डाल सकता है
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मां के लिए सिंपल टिप्स
बिना झिझक, सरल बातचीत करें: विषय को वैज्ञानिक, सुलभ और तथ्यपूर्ण तरीके से समझाएं। उदाहरण स्वरूप, आप बता सकती हैं कि यह शारीरिक वृद्धि और हार्मोनल बदलावों का हिस्सा है
बातचीत शुरू करें-देर न करें: आमतौर पर लड़कियों को पहला पीरियड्स 9 से 15 वर्ष की उम्र के बीच होती है, और इसकी शुरुआत अक्सर ब्रेस्ट्स के विकास के दो साल बाद होती है। जैसे ही अन्य बदलाव (जैसे प्यूबिक बाल, मूड स्विंग्स, मुंहासे आदि) दिखें, उसी समय यह बातचीत शुरू करें
समय और माहौल चुनें: बातचीत के लिए एक शांत, आरामदायक और निजी स्थान चुनें, जहां बच्चे को किसी बाधा या शर्म महसूस न हो। इसके अलावा आप उनके साथ अपना अनुभव भी शेयर करें।
स्पष्ट और संवेदनशील बातचीत: अपने सवालों का जवाब सहजता और सहानुभूति के साथ दें। जानकारीपूर्ण और साफ बातचीत से लड़की आत्मविश्वास के साथ अपनी पीरियड का अनुभव संभाल सकती है। बेटियों को बताएं कि अगर उन्हें स्कूल में पीरियड्स आ जाए तो संकोच ना करें और महिला टीचर के पास जाकर इसके बारे में बताएं।
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