ब्रिटेन में एक महिला ने मृत डोनर से मिली बच्चेदानी के ट्रांसप्लांट के बाद एक बेटे को जन्म दिया है। महिला की अपनी बच्चेदानी मजबूत नहीं थी। इस मेडिकल चमत्कार के बाद जन्मे बच्चे का नाम ह्यूगो है और मां-बेटा दोनों स्वस्थ हैं।
आजकल कई कपल्स के लिए बच्चा पैदा करना एक बड़ी चुनौती बन गया है। कम उम्र की लड़कियां भी PCOD जैसी समस्याओं से जूझ रही हैं, जिससे प्रेग्नेंसी में दिक्कतें आती हैं। लेकिन ब्रिटेन से एक ऐसी कहानी सामने आई है, जो किसी चमत्कार से कम नहीं है। यहां एक महिला, जिसकी बच्चेदानी (गर्भाशय) बच्चे को जन्म देने के लिए मजबूत नहीं थी, उसने एक डोनेट की हुई बच्चेदानी की मदद से एक प्यारे से बेटे को जन्म दिया है।
आपने अंगदान (ऑर्गन डोनेशन) के बारे में तो सुना ही होगा, जिसमें लोग दिल, किडनी, लिवर जैसी चीजें दान करते हैं। किडनी और लिवर को छोड़कर ज्यादातर अंग किसी व्यक्ति की मौत या ब्रेन डेड होने के बाद ही दान किए जाते हैं। ठीक इसी तरह, इस मामले में एक महिला को एक मृत महिला की बच्चेदानी ट्रांसप्लांट की गई। इसी ट्रांसप्लांट की हुई बच्चेदानी से वह एक बेटे की मां बनी हैं। इस घटना ने अंगदान को लेकर एक नई बहस छेड़ दी है।
बच्चेदानी ट्रांसप्लांट के बाद मां बनीं महिला
यह मेडिकल चमत्कार ब्रिटेन में हुआ है, जहां ट्रांसप्लांट की गई बच्चेदानी से एक बच्चे का जन्म हुआ है। यह ब्रिटेन का पहला ऐसा मामला है, जिसमें किसी मृत महिला की डोनेट की गई बच्चेदानी से बच्चे का जन्म हुआ हो। बच्चे का नाम ह्यूगो है और वह अब 10 हफ़्ते का हो चुका है और पूरी तरह स्वस्थ है। लोग इसे एक चमत्कार ही मान रहे हैं। बच्चे की मां का नाम ग्रेस बेल है। ग्रेस की बच्चेदानी इतनी मजबूत नहीं थी कि वह एक बच्चे को गर्भ में रख सकें। इसलिए, डॉक्टरों ने एक मृत महिला की बच्चेदानी को उनमें ट्रांसप्लांट किया। इस सफल ऑपरेशन के बाद, ग्रेस ने स्वस्थ बच्चे ह्यूगो को जन्म दिया।
यूनाइटेड किंगडम (UK) के केंट में रहने वाली ग्रेस बेल और उनके पति स्टीव पॉवेल ने उस डोनर महिला और उनके परिवार का शुक्रिया अदा किया है, जिनके इस तोहफे की वजह से वे माता-पिता बन पाए। उन्होंने ऑक्सफोर्ड और लंदन की मेडिकल टीम को भी धन्यवाद कहा। ग्रेस ने कहा, "मैं उस महिला को हमेशा याद रखूंगी, जिन्होंने मुझे अपनी बच्चेदानी दान की। उन्हीं की वजह से मैं मां बनने की खुशी महसूस कर पाई।"
ग्रेस ने अपनी खुशी ज़ाहिर करते हुए कहा, "मुझे याद है जब मैं सुबह उठी और उसका छोटा सा चेहरा, उसकी छोटी सी नाक देखी, तो मुझे लगा कि मैं कोई सपना देख रही हूं।" इस ट्रांसप्लांट और डिलीवरी में शामिल डॉक्टरों ने इसे एक "क्रांतिकारी पल" बताया है। उन्होंने कहा कि यह उन जैसी कई और महिलाओं को उम्मीद देगा जो ऐसी ही समस्याओं से जूझ रही हैं।
