Autism Awareness Day: 2 अप्रैल को मनाए जाने वाले World Autism Awareness Day के मौके पर जानिए ऑटिज्म से पीड़ित बच्चों के लिए घर पर की जाने वाली 4 असरदार थेरेपी। ये आसान तरीके बच्चों के व्यवहार, बोलने और सीखने की क्षमता में सुधार ला सकते हैं।
2 अप्रैल को ऑटिज्म अवेयरनेस डे (Autism Awareness Day) मनाया जाता है। इस दिन को मनाने का उद्देश्य लोगों के बीच ऑटिज्म स्पेक्ट्रम डिसऑर्डर (ASD) के बारे में समझ, स्वीकार्यता और सम्मान का बढ़ाना है। ऑटिज्म से पीड़ित बच्चों को समझना और फिर उन्हें सही थेरेपी देना बच्चों के विकास में मदद करता है। कुछ लोगों को ऐसा लगता है कि ऑटिस्टिक बच्चों का इलाज केवल क्लिनिक जाकर ही होता है, जबकि ऐसा बिल्कुल नहीं है। कुछ ऐसी थेरेपीज होती हैं, जो घर में ही की जा सकती हैं। इससे बच्चों में पॉजिटिव बदलाव देखने को मिलता है। आइए जानते हैं ऐसी कौन सी थेरेपी है, जो पेरेंट्स घर पर ही बच्चों को दे सकते हैं।
अप्लाइड बिहेवियर एनालिसिस
अप्लाइड बिहेवियर एनालिसिस यानी ABA थेरेपी बड़ी और इफेक्टिव थेरेपी मानी जाती है। इस थेरेपी से बच्चों के बिहेवियर को समझ कर उनके व्यवहार में बदलाव लाया जाता है। अच्छे व्यवहार पर बच्चों को आप तुरंत रिवॉर्ड दे सकते हैं। ऐसे उन्हें पता चलेगा कि उन्होंने जो काम किया है, वह सराहनीय है। आप बच्चों को छोटी-छोटी चीजें सिखा सकते हैं।
स्पीच थेरेपी
ऑटिस्टिक बच्चे देर से बोलना सीखते हैं। बोलने और समझने की क्षमता बढ़ाने के लिए उन्हें घर में स्पीच थेरेपी दी जा सकती है। बच्चे से धीरे-धीरे और साफ बोलें। फ्लैश कार्ड का इस्तेमाल करके आप उन्हें बोलना सीख सकते हैं। इस तरह की थेरेपी प्रोफेशनल्स देते हैं, लेकिन आप भी घर में ऐसे ट्राई कर सकते हैं।
ऑक्यूपेशनल थेरेपी
पेरेंट्स बच्चों को थेरेपी देते समय कई रोजमर्रा के काम भी सिखा सकते हैं। ऑक्यूपेशनल थेरेपी काफी मददगार होती है। इसमें बच्चों को ड्रॉइंग, ब्लॉक्स, या पजल्स खिलाएं। हाथों की एक्टिविटी भी इसे बढ़ती है। आप कुछ काम जैसे कि खाना अपने आप खाना, कपड़े पहनना आदि सीखा सकते हैं।
प्ले थेरेपी
कहते हैं कि खेल के माध्यम से बच्चे कई सारी चीज सीख जाते हैं। ऑटिस्टिक बच्चों में भी यही बात लागू होती है। खेल-खेल में बच्चे के दिमाग को डेवलप करने के लिए घर से शुरुआत करें। आप रोल प्ले गेम्स खेल सकते हैं। बच्चों के साथ इंटरएक्टिव गेम्स खेलें ताकि वह ज्यादा से ज्यादा उसमें भाग लें और बात करें। चूंकि हर बच्चा अलग होता है इसलिए थेरेपी का असर भी अलग-अलग होता है। घर में थेरेपी नहीं दे पा रहे हैं, तो डॉक्टर या थैरेपिस्ट से सलाह जरूर ले सकते हैं।
