India China Relations: भारत-चीन संबंधों में सकारात्मक गति आ रही है। पीएम नरेंद्र मोदी ने अपनी जापान यात्रा और 2025 के शंघाई सहयोग संगठन (SCO) शिखर सम्मेलन के लिए आगामी चीन यात्रा के दौरान स्थिर और मैत्रीपूर्ण संबंधों के महत्व पर जोर दिया।

Narendra Modi Message: पीएम नरेंद्र मोदी जापान की यात्रा पर हैं। इसके बाद चीन जाने वाले हैं। उन्होंने शुक्रवार को जापान से चीन को लेकर संदेश दिया। कहा कि चीन के साथ मजबूत संबंध महत्वपूर्ण हैं। इससे क्षेत्रीय शांति और समृद्धि पर सकारात्मक प्रभाव पड़ेगा और वैश्विक अर्थव्यवस्था में स्थिरता आएगी।

बहुध्रुवीय विश्व के लिए जरूरी है भारत और चीन के अच्छे संबंध

जापानी अखबार योमिउरी शिंबुन को दिए इंटरव्यू में पीएम मोदी ने कहा, "राष्ट्रपति शी जिनपिंग के निमंत्रण पर मैं एससीओ शिखर सम्मेलन (SCO Summit) में भाग लेने के लिए यहां से तियानजिन जाऊंगा। पिछले वर्ष कजान (रूस में, SCO की पिछली बैठक के दौरान) में राष्ट्रपति शी के साथ मेरी मुलाकात के बाद से हमारे द्विपक्षीय संबंधों में स्थिर और सकारात्मक प्रगति हुई है।" दिल्ली में चीनी विदेश मंत्री वांग यी से मुलाकात के बाद कही गई अपनी बात दोहराते हुए पीएम ने कहा,

धरती के दो सबसे बड़े राष्ट्रों, भारत और चीन के बीच स्थिर, पूर्वानुमानित और सौहार्दपूर्ण द्विपक्षीय संबंध, क्षेत्रीय और वैश्विक शांति और समृद्धि पर सकारात्मक प्रभाव डाल सकते हैं। यह बहुध्रुवीय एशिया और विश्व के लिए भी महत्वपूर्ण है।

भारत-चीन का मिलकर काम करना अहम

पीएम ने कहा, "विश्व अर्थव्यवस्था में इस समय अस्थिरता है। इसे देखते हुए दो प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं के रूप में भारत और चीन के लिए विश्व आर्थिक व्यवस्था में स्थिरता लाने के लिए मिलकर काम करना महत्वपूर्ण है। भारत आपसी सम्मान, आपसी हित और आपसी संवेदनशीलता के आधार पर आगे बढ़ने को तैयार है।"

SCO समिट पर है दुनिया की नजर

बता दें कि चीन के तियानजिन में 31 अगस्त से 1 सितंबर तक SCO शिखर सम्मेलन (SCO summit) होने वाला है। पूरी दुनिया की नजर इसपर है। इस दौरान भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग और रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन साथ आएंगे। रूस-यूक्रेन लड़ाई और अमेरिका द्वारा भारत से होने वाले आयात पर 50% टैरिफ लगाए जाने से इस बैठक का महत्व बढ़ गया है।

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भारत अपने निर्यात के लिए नए बाजार की तलाश में है। अमेरिकी टैरिफ दशकों से चले आ रहे भारत-चीन सैन्य तनाव में कमी आई है। दोनों एशियाई देश संभावित आर्थिक नुकसान की भरपाई के लिए संबंधों को फिर से संतुलित कर रहे हैं।