उत्तर प्रदेश में स्मार्ट प्रीपेड बिजली मीटर को लेकर नया नियम लागू होने जा रहा है। इससे लाखों उपभोक्ताओं को राहत मिलेगी और बिजली सेवा में पारदर्शिता बढ़ाने की कोशिश की गई है।
नए नियम के अनुसार अगर उपभोक्ता स्मार्ट मीटर रिचार्ज कर देता है और दो घंटे के भीतर बिजली सप्लाई बहाल नहीं होती, तो बिजली विभाग को मुआवजा देना होगा।
यदि रिचार्ज के बाद भी बिजली नहीं आती है तो बिजली विभाग को उपभोक्ता को 50 रुपये प्रतिदिन के हिसाब से मुआवजा देना पड़ेगा। यह नियम लाखों लोगों को राहत देगा।
उत्तर प्रदेश में करीब 70 लाख स्मार्ट प्रीपेड बिजली मीटर उपभोक्ता हैं। नए नियम लागू होने के बाद इन सभी उपभोक्ताओं को इस व्यवस्था का सीधा लाभ मिलने की उम्मीद है।
13 मार्च के बाद यदि स्मार्ट मीटर का बैलेंस खत्म हो जाता है तो बिजली सप्लाई अपने आप बंद हो जाएगी। यह पूरी प्रक्रिया ऑटोमैटिक होगी और लाइन काटने की जरूरत नहीं पड़ेगी।
स्मार्ट प्रीपेड मीटर में उपभोक्ता जितना रिचार्ज करेगा उतनी ही बिजली इस्तेमाल कर पाएगा। इससे गलत बिलिंग और औसत बिल जैसी पुरानी समस्याएं कम हो सकती हैं।
जानकारी के अनुसार फिलहाल स्मार्ट मीटर उपभोक्ताओं के खातों में करीब 1400 करोड़ रुपये का निगेटिव बैलेंस दर्ज है, जिसे लेकर भी चर्चा हो रही है।
नियामक आयोग ने बिजली कंपनियों को निर्देश दिया है कि स्मार्ट मीटर के नाम पर ली गई अतिरिक्त रकम उपभोक्ताओं को वापस की जाए और बिल में समायोजित किया जाए।
आयोग के फैसले के बाद करीब 127 करोड़ रुपये की अतिरिक्त वसूली उपभोक्ताओं को लौटाई जाएगी। इसे प्रदेश के बिजली उपभोक्ताओं के लिए बड़ी राहत माना जा रहा है।