Bhujal Punarbharn Scheme: उत्तराखण्ड विधानसभा सत्र में सीएम पुष्कर सिंह धामी ने गैरसैंण से डायरेक्ट इंजेक्शन जल पुनर्भरण योजना की शुरुआत की और सिंगटाली पुल निर्माण को 57 करोड़ की स्वीकृति दी। यह कदम जल संरक्षण व संपर्क व्यवस्था में बड़ा बदलाव लाएगा।

Uttarakhand Assembly Session: उत्तराखण्ड विधानसभा के मानसून सत्र की शुरुआत कई अहम पहलों और भावनात्मक पलों के साथ हुई। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने जहाँ गैरसैंण से जल संरक्षण की ऐतिहासिक योजना का शुभारंभ किया, वहीं स्व. मुन्नी देवी को श्रद्धांजलि भी दी। इसके साथ ही लंबे समय से प्रतीक्षित सिंगटाली पुल को वित्तीय स्वीकृति देकर जनता की मांग पूरी करने की दिशा में बड़ा कदम उठाया गया।

क्यों ज़रूरी है भूजल पुनर्भरण योजना?

राज्य में बढ़ते जल संकट से निपटने के लिए भराड़ीसैंण से “डायरेक्ट इंजेक्शन जल स्रोत पुनर्भरण योजना” की शुरुआत की गई। इस योजना के तहत उपचारित वर्षा जल को बंद पड़े हैंडपंपों में डालकर भूजल स्तर को बढ़ाया जाएगा। पहले चरण में गैरसैंण और चौखुटिया ब्लॉकों के 20 चयनित हैंडपंपों को फिर से सक्रिय किया जाएगा।

मुख्यमंत्री धामी ने कहा कि सरकार तकनीकी नवाचारों को अपनाकर जल संकट से निपटने के लिए प्रतिबद्ध है। वहीं विधानसभा अध्यक्ष ऋतु खण्डूड़ी ने इसे “भविष्य की जल सुरक्षा का आधार” बताते हुए कहा कि यह पहल आने वाले समय में मील का पत्थर साबित होगी।

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क्या होगा इस तकनीक का फायदा?

स्वामी राम हिमालयन विश्वविद्यालय, जौलीग्रांट के विशेषज्ञों द्वारा विकसित इस तकनीक से वर्षा जल को फ़िल्टर और ट्रीट कर सीधे भूजल भंडार तक पहुँचाया जाएगा। इससे न केवल सूखे हैंडपंप फिर से जीवित होंगे, बल्कि ग्रामीण इलाकों में पानी की समस्या का स्थायी समाधान भी मिलेगा।

विधानसभा सत्र का भावनात्मक पल: स्व. मुन्नी देवी को श्रद्धांजलि

मानसून सत्र के पहले दिन थराली की पूर्व विधायक स्वर्गीय मुन्नी देवी को मुख्यमंत्री धामी ने श्रद्धांजलि दी। उन्होंने याद किया कि आपदा प्रभावित क्षेत्रों में कठिन हालात के बावजूद मुन्नी देवी हमेशा जनता के बीच मौजूद रहीं। धामी ने कहा कि उनकी कमी राजनीति और समाज दोनों के लिए अपूरणीय है।

क्या है सिंगटाली पुल की अहमियत?

गढ़वाल और कुमाऊँ को जोड़ने वाला बहुप्रतीक्षित सिंगटाली पुल अब हकीकत बनने जा रहा है। मुख्यमंत्री धामी ने 57 करोड़ रुपये की वित्तीय और प्रशासनिक स्वीकृति दी है। यह पुल गंगानदी पर कौडियाला-व्यासघाट मार्ग में बनेगा, जिसकी कुल लंबाई 150 मीटर होगी।

जनता की लंबे समय से चली आ रही मांग को पूरा करते हुए अब निर्माण कार्य शीघ्र शुरू होगा। मुख्यमंत्री ने कहा कि इस पुल से गढ़वाल और कुमाऊँ के बीच सड़क संपर्क और मजबूत होगा, जिससे दोनों क्षेत्रों के बीच आवागमन और आर्थिक गतिविधियाँ सुगम होंगी।

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