सार
दिगंतारा रिसर्च एंड टेक्नोलॉजीज प्राइवेट लिमिटेड (DIGANTARA RESEARCH AND TECHNOLOGIES PRIVATE LIMITED) उत्तराखंड में स्थित एक भारतीय अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी स्टार्टअप है, जिसने भारतीय स्टार्टअप पारिस्थितिकी तंत्र में अपनी अलग पहचान बनाई है। यह कंपनी वर्ष 2018 में बेंगलुरु से अनिरुद्ध शर्मा और राहुल रावत द्वारा स्थापित की गई थी। दिगंतारा विश्व का पहला इन-सिटु एक्टिव ऑर्बिटल सर्विलांस प्लेटफॉर्म (स्पेस-मैप) बना रहा है, जो लो अर्थ ऑर्बिट (LEO) में मौजूद अंतरिक्ष वस्तुओं (RSO) का पता लगाने, ट्रैक करने और उनके पूर्वानुमान के लिए उच्च-रिज़ॉल्यूशन नैनोसेटेलाइट्स के समूह का उपयोग करता है। स्टार्टअप के नैनोसेटेलाइट सिस्टम प्रोटोटाइपिंग, सत्यापन या असेंबली चरण में हैं, लेकिन अपनी क्षेत्र में यह क्रांति ला रहा है।
प्रमुख उत्पाद और उपलब्धियां:
1.दिगंतारा डीपीआईआईटी स्टार्टअप इंडिया नेशनल स्टार्टअप अवार्ड 2022 का विजेता भी रहा है। दिगंतारा को यह सम्मान इसलिए दिया गया था क्योंकि दिगंतारा ने एंड-टू-एंड इकोसिस्टम अंतरिक्ष संचालन और स्थितिजन्य जागरूकता की जटिलताओं को सरल बनाकर सभी हितधारकों के लिए इसे आसान बनाया है।
2.स्पेस क्लाइमेट एंड ऑब्जेक्ट ट्रैकर (SCOT): वहीं, इस स्टार्टअप ने (Space Climate and Object Tracker) की शुरूआत की है। इसकी मदद से अंतरिक्ष में मौजूद वस्तुओं (RSO) को ट्रैक करता है और अंतरिक्ष मौसम की निगरानी करता है।
3. ऑर्बिटल इंजन-यह एक सॉफ्टवेयर पैकेज है, जो SCOT डेटा को प्रोसेस कर कक्षीय अंतदर्ष्टि (Orbital Insights) प्रदान करता है।
4. स्पेस-अवेयरनेस डेटा और एनालिसिस प्रोडक्ट (Space-ADAPT):यह SCOT और Engine से प्राप्त डेटा से निर्मित उत्पादों का एक समूह है।
दिगंतारा रिसर्च एंड टेक्नोलॉजीज प्राइवेट लिमिटेड की यह उपलब्धि उत्तराखंड और उसके बाहर नवाचारी स्टार्टअप्स के बढ़ते प्रभाव को दर्शाती है। निश्चित ही दिगंतारा ने इस शानदार खोज ने भारत के अंतरिक्ष अनुसंधान को नया आयाम दिया है। इसकी वजह से भारत की प्रतिष्ठा बढ़ी है।
मुख्य सचिव श्रीमती राधा रतूड़ी ने राज्य सरकार के सभी कार्मिक को मिशन कर्म योगी के तहत क्षमता विकास के ऑनलाइन प्रशिक्षण हेतु अनिवार्यतः iGOT डिजिटल प्लेटफॉर्म पर पंजीकरण के निर्देश दिए हैं। उन्होंने इस मामले में शत प्रतिशत लक्ष्य को समयबद्धता से पूरा करने के निर्देश दिए हैं। इसके साथ ही मुख्य सचिव ने सचिव महिला सशक्तिकरण एवं बाल विकास को सभी विभागों में कार्य स्थल पर महिलाओं के विरुद्ध होने वाले यौन शोषण से संबंधित कानून की जानकारी एवं प्रशिक्षण के कार्यक्रम तत्काल संचालित करने के निर्देश दिए हैं। इसके साथ ही सीएस श्रीमती रतूड़ी ने सभी विभागों के सचिवों एवं विभागाध्यक्षों को उनके विभाग के तहत संचालित की जा रही जनकल्याणकारी योजनाओं के लाभार्थियों हेतु भी जानकारी एवं जागरूकता प्रशिक्षण कार्यक्रम संचालित करने की हिदायत दी है ताकि अधिक से अधिक नागरिक जनकल्याणकारी योजनाओं का आसानी से लाभ उठा सके।
उत्तराखंड सचिवालय में मुख्य सचिव श्रीमती राधा रतूड़ी ने भारत सरकार की क्षमता निर्माण आयोग (सीबीसी) की सदस्य डॉ अलका मित्तल के साथ राज्य सरकार के सभी विभागों के सचिवों एवं विभागाध्यक्षों के साथ समीक्षा बैठक के दौरान क्षमता निर्माण आयोग से अनुरोध किया है कि सरकारी कार्मिकों की भांति ही नव निर्वाचित जन प्रतिनिधियों के लिए भी प्रशिक्षण कार्यक्रम संचालित किए जाए ताकि उन्हे भी प्रशासनिक प्रक्रियाओं तथा योजनाओं की जानकारी प्राप्त हो सके। इसके साथ ही उन्होंने आग्रह किया कि नागरिकों हेतु विकसित भारत सहित सभी जन कल्याणकारी योजनाओं की जानकारी एवं जागरूकता से सम्बन्धित प्रशिक्षण की व्यवस्था की जाए।
बैठक में क्षमता निर्माण आयोग की सदस्य डा0 अल्का मित्तल ने बताया कि कर्मयोगी मिशन के तहत भारत सरकार का मुख्य फोकस सभी सरकारी कार्मिकों के क्षमता निर्माण एवं प्रशिक्षण पर हैं। अभी तक 100 केन्द्रीय संगठनों के लिए क्षमता निर्माण योजनाएं बन चुके हैं। सिविल सर्विस प्रशिक्षण के लिए राष्ट्रीय मानक निर्धारित करते हुए 166 संस्थानों को मान्यता दी गई है। 10 लाख सिविल सेवकों के लिए बड़े स्तर पर जनसेवा कार्यक्रम प्रशिक्षण कार्यक्रम किए जा रहे हैं। iGOT डिजिटल प्लेटफॉर्म पर 75 लाख अधिकारियों को प्रशिक्षण दिया गया है। 14 राज्यों एवं संघ शाषित प्रदेशों के साथ मिशन कर्मयोगी को लागू करने के लिए एमओयू किए गए हैं।
बैठक में क्षमता निर्माण आयोग के सदस्यों एवं अधिकारियों के साथ ही प्रमुख सचिव एल फैनई, सचिव बी के संत, चंद्रेश यादव, डॉ. नीरज खैरवाल सहित सभी विभागों के सचिव एवं विभागाध्यक्ष मौजूद रहे।