Neha Singh Rathore on Operation Sindoor :  जैसे ही भारत ने "ऑपरेशन सिंदूर" के तहत पाकिस्तान और पीओके में आतंकी ठिकानों पर सटीक स्ट्राइक की, देशभर में प्रतिक्रियाओं की बाढ़ आ गई। लेकिन इस बार चर्चा में वो नाम है जो आमतौर पर सत्ता के खिलाफ सवालों से पहचाना जाता है—लोकगायिका नेहा सिंह राठौर। भारतीय सेना की इस कार्यवाही के बाद नेहा ने सोशल मीडिया पर ऐसा बयान दे डाला, जिसने सबका ध्यान खींच लिया।

नेहा सिंह राठौर ने 'एक्स' पर क्या लिखा? (Neha Singh Rathore reacts to Operation Sindoor) 

भारतीय सेना की एयरस्ट्राइक के कुछ ही घंटों बाद, नेहा ने माइक्रोब्लॉगिंग प्लेटफॉर्म X (पूर्व में ट्विटर) पर दो तीखे पोस्ट किए। पहले पोस्ट में उन्होंने लिखा: "भारतीय सेना ज़िंदाबाद… जय हिन्द…" 

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वहीं, दूसरे पोस्ट में नेहा ने कहा:"एक चुटकी सिंदूर की ताक़त देख ली आतंकवादियों..!"

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नेहा का यह बयान "ऑपरेशन सिंदूर" के नाम से खेलते हुए आया, जिसमें भारतीय सशस्त्र बलों ने पाकिस्तान और पीओके में जैश-ए-मोहम्मद जैसे आतंकी संगठनों के ठिकानों को निशाना बनाया।

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पहलगाम आतंकी हमले के बाद विवादों में आई थीं नेहा

यह पहली बार नहीं है जब नेहा सिंह राठौर आतंकवाद और सुरक्षा मुद्दों पर सोशल मीडिया पर एक्टिव दिखी हैं।

22 अप्रैल को जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकी हमले के बाद नेहा ने कुछ वीडियो साझा किए थे, जो बाद में पाकिस्तान-समर्थित सोशल मीडिया अकाउंट्स से भी पोस्ट किए गए। इन वीडियोज को लेकर लखनऊ और पटना में एफआईआर दर्ज की गईं, जबकि अयोध्या में उनके खिलाफ परिवाद दाखिल किया गया।

इन पर राष्ट्रद्रोह की धाराओं के तहत केस दर्ज किया गया था।

नेहा ने क्या कहा था अपनी सफाई में?

आरोपों पर प्रतिक्रिया देते हुए नेहा ने पहले ही स्पष्ट कर दिया था कि "सवाल पूछना उनका कर्तव्य है और वह इससे पीछे नहीं हटेंगी।"

इलाहाबाद हाईकोर्ट पहुंचा मामला, अगली सुनवाई 12 मई को

नेहा सिंह राठौर ने अब लखनऊ स्थित इलाहाबाद हाईकोर्ट की खंडपीठ में याचिका दायर कर अपने खिलाफ दर्ज एफआईआर को चुनौती दी है। याचिका में उन्होंने कहा है कि उनके पोस्ट का उद्देश्य किसी धर्म या समुदाय को भड़काना नहीं था। राज्य सरकार ने कोर्ट से उनके खिलाफ सामग्री पेश करने के लिए समय मांगा, जिसके चलते कोर्ट ने अगली सुनवाई की तारीख 12 मई तय की है।

यह आदेश न्यायमूर्ति विवेक चौधरी और न्यायमूर्ति बीआर सिंह की पीठ द्वारा दिया गया। याचिका में लखनऊ के हजरतगंज थाने में दर्ज एफआईआर को चुनौती दी गई है, जिसे अभय प्रताप सिंह नामक व्यक्ति ने दर्ज कराया था।

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