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Ganesh Chaturthi : एक ही राज्य में 5 चमत्कारिक मंदिर, हर एक की अद्भुत कहानी, जानें कहां?
Unique Ganesh Temples : राजस्थान के जोधपुर, रणथंभौर, जयपुर और कोटा के अनोखे और प्रसिद्ध गणेश मंदिरों की भव्य परंपराओं और चमत्कारों से रमणीय गणेश चतुर्थी का उत्सव पूरे प्रदेश में मनाया जा रहा है। श्रद्धालुओं की आस्था का अद्भुत संगम दिखता है।
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राजस्थान के 5 चमत्कारिक मंदिर
भाद्रपद की चतुर्थी यानि 27 अगस्त बुधवार को पूरे देश में गणपति बप्पा मोरिया की गूंज है। मुंबई से लेकर इंदौर तक हर चौंक-चौराहों पर गणपति जी की झांकी विराजमान है। 10 दिन तक चलने वाले गणेश उत्सव के लिए देशभर के सभी गणेश मंदिर दुल्हन की तरह सजा दिए गए हैं। इस अवसर पर राजस्थान के कुछ अनोखे गणेश मंदिरों की चर्चा जरूरी है, जो अपनी अनूठी मान्यताओं और चमत्कार के लिए प्रसिद्ध हैं।
जोधपुर का इश्किया गणेश मंदिर
प्रेमियों का मिलनस्थल जोधपुर की तंग गलियों में स्थित करीब सौ साल पुराना इश्किया गणेश मंदिर प्रेम करने वालों के लिए विशेष माना जाता है। मान्यता है कि यहां धोक लगाने वाले प्रेमी जोड़े विवाह के बंधन में अवश्य बंधते हैं। छोटा सा मंदिर होने के बावजूद, इसकी मान्यता के चलते यहां प्रेमी जोड़ों का तांता लगा रहता है।
रणथंभौर का त्रिनेत्र गणेश मंदिर
सवाई माधोपुर स्थित रणथंभौर किले में बना त्रिनेत्र गणेश मंदिर भारत ही नहीं, बल्कि दुनिया का एकमात्र मंदिर है जहां भगवान गणेश अपने पूरे परिवार के साथ विराजमान हैं। खास बात यह है कि देशभर से लोग अपने मांगलिक कार्यों का पहला निमंत्रण पत्र यहीं भेजते हैं। मंदिर के पुजारी इन पत्रों को भगवान के समक्ष पढ़ते हैं, जो श्रद्धालुओं की अटूट आस्था का प्रमाण है।
कोटा का खड़ा गणेश मंदिर
अनोखी खड़ी प्रतिमा कोटा के रंगबाड़ी क्षेत्र में स्थित खड़ा गणेश मंदिर अपनी दुर्लभ खड़ी मूर्ति के लिए प्रसिद्ध है। गणेश चतुर्थी पर यहां विशाल मेला लगता है, जिसमें लाखों श्रद्धालु शामिल होते हैं। जिन्हें कोटा के खड़े गणेश मंदिर के नाम से जाना जाता है।
जयपुर का श्वेत सिद्धि विनायक
जयपुर के सूरजपोल बाजार स्थित यह मंदिर विशेष है क्योंकि यहां गणेशजी की सफेद प्रतिमा पर सूर्य की पहली किरणें पड़ती हैं। इस मंदिर में सिंदूर नहीं चढ़ाया जाता, बल्कि दूध से अभिषेक होता है।
जयपुर का मोती डूंगरी गणेश मंदिर
500 साल पुरानी प्रतिमा जयपुर का मोती डूंगरी गणेश मंदिर शहर का प्रमुख धार्मिक स्थल है। यहां स्थापित गणेश प्रतिमा पांच सौ साल से अधिक पुरानी मानी जाती है। हर बुधवार को लगने वाला मेला हजारों श्रद्धालुओं को आकर्षित करता है।