Thackeray Brothers Defeat: BEST सोसाइटी चुनाव में ठाकरे ब्रदर्स को बड़ा झटका। उद्धव-राज गठबंधन का उत्कर्ष पैनल 21 में से एक भी सीट नहीं जीत पाया। शशांक राव पैनल ने 14 सीटें और महायुति ने 7 सीटें जीतीं। क्या यह हार BMC चुनावों का ट्रेलर है?

Uddhav-Raj Thackeray Alliance Shock: महाराष्ट्र की राजनीति में बड़ा उलटफेर देखने को मिला है। BEST सोसाइटी चुनाव (BEST Society Election) में उद्धव ठाकरे (Uddhav Thackeray) और राज ठाकरे (Raj Thackeray) के गठबंधन को करारी शिकस्त का सामना करना पड़ा। ठाकरे ब्रदर्स (Thackeray Brothers) की ओर से समर्थित उत्कर्ष पैनल (Utkarsh Panel) 21 सीटों में से एक भी सीट नहीं जीत पाया। वहीं शशांक राव (Shashank Rao) के पैनल ने 14 सीटें और महायुति गठबंधन (Mahayuti Alliance) ने सात सीटें अपने नाम कीं। इस हार ने न केवल ठाकरे ब्रदर्स की साख को झटका दिया है बल्कि BMC Election 2025 को लेकर भी सवाल खड़े कर दिए हैं।

ठाकरे ब्रदर्स की एकजुटता नाकाम क्यों रही?

सालों से राजनीतिक रूप से आमने-सामने खड़े रहे उद्धव ठाकरे की शिवसेना (UBT) और राज ठाकरे की एमएनएस (MNS) पहली बार एक साथ आए थे। इस गठबंधन को मराठी भाषी समुदाय और BEST कर्मचारियों के वोट बैंक को साधने की रणनीति माना जा रहा था। लेकिन नतीजे उम्मीद के उलट निकले। क्या यह गठबंधन वाकई मतदाताओं को प्रभावित नहीं कर पाया या फिर मतदाता पहले से ही बदलाव चाहते थे?

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क्या शशांक राव का पैनल बना नई ताकत?

BEST चुनावों में शशांक राव पैनल ने 14 सीटें जीतकर खुद को सबसे मजबूत साबित किया। ट्रेड यूनियन लीडर शशांक राव की जमीनी पकड़ और कामगारों से जुड़ाव ने इस जीत को संभव बनाया। वहीं महायुति गठबंधन (जिसमें बीजेपी और सहयोगी दल शामिल हैं) ने सात सीटें जीतकर मजबूती दिखाई। क्या ये नतीजे आने वाले मुंबई नगर निगम चुनाव के लिए भी संकेत हैं?

क्या BMC चुनाव में भी दोहराई जाएगी यह हार?

उद्धव ठाकरे (Uddhav Thackeray) की शिवसेना (UBT) और राज ठाकरे की MNS के लिए यह हार एक बड़ा सवाल छोड़ती है-क्या उनकी संयुक्त ताकत BMC Election 2025 में भी कमजोर साबित होगी? Brihanmumbai Municipal Corporation (BMC) पर कब्जा हमेशा से मुंबई की राजनीति का सबसे बड़ा दांव रहा है। ऐसे में BEST चुनाव का यह नतीजा आने वाले बड़े चुनावों का ‘ट्रेलर’ माना जा रहा है।

क्या ठाकरे ब्रदर्स की रणनीति पर सवाल उठ रहे हैं?

एकजुट होकर मैदान में उतरने के बावजूद ठाकरे गुट एक भी सीट क्यों नहीं जीत पाया? क्या ये संगठनात्मक कमजोरी थी, वोट बैंक की असंतुष्टि या फिर महायुति की रणनीति ज्यादा कारगर रही? इस हार ने विपक्ष को ठोस हथियार दे दिया है और ठाकरे ब्रदर्स की राजनीति पर एक बार फिर सवाल उठ गए हैं।

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