CM Mohan Yadav Samuhik Marriage Conference: राजस्थान के कोटा में सामूहिक विवाह सम्मेलन में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि बेटियां भगवान का अवतार हैं और उनके माध्यम से दो परिवार जुड़ते हैं। उन्होंने सादगी से विवाह और सिंहस्थ महाकुंभ का भी संदेश दिया।
शादी केवल दो लोगों का साथ नहीं, बल्कि दो परिवारों के मिलन का संस्कार मानी जाती है। भारतीय परंपरा में विवाह को सिर्फ सामाजिक व्यवस्था नहीं, बल्कि एक पवित्र संस्कार के रूप में देखा जाता है। इसी भावना को दोहराते हुए मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने राजस्थान के कोटा में आयोजित सामूहिक विवाह सम्मेलन में बेटियों के महत्व पर भावुक और प्रेरक संदेश दिया।
उन्होंने कहा, “बेटियां भगवान का अवतार होती हैं। उनके माध्यम से दो परिवार एक-दूसरे से जुड़ते हैं। विवाह संस्कार से बेटियों को नया घर, नए माता-पिता और नया परिवार मिलता है।” मुख्यमंत्री 26 अप्रैल को कोटा के ग्राम रींछी में आयोजित निशुल्क सामूहिक विवाह सम्मेलन को संबोधित कर रहे थे। यह आयोजन मुल्की पंचायत यदुवंशी अहिरान एवं यदुवंशी मुल्की अहीर समिति के तत्वावधान में आयोजित किया गया था।
38वां सामूहिक विवाह सम्मेलन, बड़ी संख्या में पहुंचे लोग
यह संस्था का 38वां सामूहिक विवाह सम्मेलन था, जिसमें बड़ी संख्या में नवविवाहित जोड़े, परिवारजन और समाज के गणमान्य लोग शामिल हुए। कार्यक्रम से पहले आयोजन समिति के पदाधिकारियों ने मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव का आत्मीय स्वागत किया। इस अवसर पर लोकसभा अध्यक्ष Om Birla और राजस्थान सरकार के शिक्षा मंत्री Madan Dilawar भी मौजूद रहे। दोनों नेताओं ने भी विवाह सम्मेलन को संबोधित किया और सामूहिक विवाह जैसे आयोजनों को सामाजिक दृष्टि से महत्वपूर्ण बताया।
यह भी पढ़ें: ‘मैं मरना नहीं चाहती, मगर…’ बाराबंकी की नवविवाहिता ने डायरी में लिखा दर्द, फिर लगा ली फांसी
“विवाह संस्कार सबसे श्रेष्ठ परंपराओं में से एक”
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने अपने संबोधन में कहा कि सनातन धर्म के 16 संस्कारों में विवाह संस्कार का विशेष महत्व है। उन्होंने कहा कि विवाह केवल एक सामाजिक आयोजन नहीं, बल्कि जीवन की दिशा तय करने वाला संस्कार है। उन्होंने कहा कि भगवान श्रीकृष्ण ने अपने जीवन से पराक्रम, पुरुषार्थ और धर्म के मार्ग पर चलने का संदेश दिया। कठिन परिस्थितियों में भी उन्होंने धर्म का साथ नहीं छोड़ा। समाज को भी उन्हीं मूल्यों पर आगे बढ़ना चाहिए। सीएम ने कहा कि राज्य सरकारों द्वारा सामूहिक विवाह सम्मेलनों को प्रोत्साहन दिया जाना सराहनीय है, क्योंकि इससे समाज में सादगी और समानता का संदेश जाता है।
“मैंने भी अपने बेटे का विवाह सामूहिक सम्मेलन में कराया”
मुख्यमंत्री ने अपने निजी जीवन का उदाहरण देते हुए कहा कि उन्होंने स्वयं अपने बेटे का विवाह एक सामूहिक विवाह सम्मेलन में कराया था। उन्होंने कहा कि शादी-विवाह में दिखावे और फिजूलखर्ची की प्रवृत्ति को रोकना जरूरी है। समाज को कर्ज लेकर शादी करने की बजाय सादगी और गरिमा के साथ विवाह संपन्न करने की दिशा में आगे बढ़ना चाहिए। उन्होंने लोगों से अपील की कि विवाह जैसे पवित्र अवसर को आर्थिक बोझ नहीं, सामाजिक उत्सव के रूप में देखा जाए।
उज्जैन सिंहस्थ महाकुंभ के लिए दिया निमंत्रण
कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री ने उपस्थित सभी लोगों को उज्जैन में आयोजित होने जा रहे सिंहस्थ महाकुंभ के लिए भी आमंत्रित किया। उन्होंने कहा कि मध्यप्रदेश सरकार भव्य सिंहस्थ आयोजन की तैयारी कर रही है और देशभर से श्रद्धालुओं का स्वागत करने के लिए सभी व्यवस्थाएं की जा रही हैं। उज्जैन का सिंहस्थ केवल धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि भारतीय संस्कृति और आध्यात्मिक विरासत का बड़ा प्रतीक है।
नदी जोड़ो परियोजना से खुलेगा समृद्धि का रास्ता
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने पार्वती-काली सिंध-चंबल नदी परियोजना का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि यह परियोजना राजस्थान और मध्यप्रदेश के बीच विकास और सहयोग का नया अध्याय खोलेगी। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री Modi के मार्गदर्शन में यह कार्य आगे बढ़ रहा है और इससे दोनों राज्यों में जल, कृषि और समृद्धि के नए अवसर पैदा होंगे। मुख्यमंत्री ने कहा कि मध्यप्रदेश नदियों का मायका है और राज्यों को परस्पर सहयोग की भावना के साथ आगे बढ़ना चाहिए।
प्राचीन मंदिर के विकास में सरकार देगी सहयोग
सीएम ने रामगंज मंडी के पास स्थित प्राचीन मंदिर के विकास के लिए भी राज्य सरकार की ओर से पूर्ण सहयोग देने की घोषणा की। उन्होंने कहा कि मध्यप्रदेश सरकार भगवान श्रीकृष्ण से जुड़े सभी धर्मस्थलों को तीर्थ के रूप में विकसित करने की दिशा में काम कर रही है। धार्मिक पर्यटन और सांस्कृतिक विरासत का संरक्षण सरकार की प्राथमिकताओं में शामिल है।
बेटियों के सम्मान से मजबूत होता है समाज
अपने संबोधन के अंत में मुख्यमंत्री ने कहा कि बेटियों का सम्मान केवल परिवार नहीं, पूरे समाज की जिम्मेदारी है। विवाह संस्कार के माध्यम से वे दो घरों को जोड़ती हैं, इसलिए उनका आदर और संरक्षण सबसे महत्वपूर्ण होना चाहिए। कोटा का यह सामूहिक विवाह सम्मेलन सिर्फ एक सामाजिक आयोजन नहीं, बल्कि भारतीय संस्कृति, सादगी और पारिवारिक मूल्यों को मजबूत करने वाला संदेश बनकर सामने आया।
यह भी पढ़ें: ‘YOU SHUT UP’ एक मिनट में 10 बार चिल्लाई हरदोई की प्रिंसिपल! बाहर से किताब खरीदना पड़ा भारी
