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शिबू सोरेन का श्राद्ध भोज: जुटे 2 लाख लोग, राजनाथ सिंह, बाबा रामदेव समेत पहुंचे कई दिग्गज, देखें Photo
Shibu Soren Shraddh ceremony: झारखंड के पूर्व सीएम शिबू सोरेन के नेमरा गांव में आयोजित श्राद्ध भोज में लगभग 2 लाख लोग जुटे। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, तेलंगाना के सीएम रेवंत रेड्डी, बाबा रामदेव समेत कई जानी-मानी हस्तियाँ इस कार्यक्रम में शामिल हुईं।
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पूर्व मुख्यमंत्री शिबू सोरेन का श्राद्ध कार्यक्रम
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, रक्षा राज्य मंत्री संजय सेठ, तेलंगाना के मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी, राज्यपाल संतोष गंगवार और योग गुरु बाबा रामदेव शनिवार को झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री शिबू सोरेन के पैतृक गांव नेमरा पहुंचे। उनके श्राद्ध कर्म में शामिल होने के लिए देश भर से गणमान्य व्यक्ति, सांसद, विधायक और कई अन्य नेता राजधानी रांची से लगभग 70 किलोमीटर दूर नेमरा पहुंचे। संस्कार भोज में लगभग दो लाख लोग के शामिल हुए।
गुरुजी का व्यक्तित्व मुझे प्रभावित करता था - राजनाथ
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा कि दिशोम गुरु शिबू सोरेन जी से मेरी कई बार मुलाक़ातें हुईं। उनकी सहजता, सरलता और व्यक्तित्व मुझे प्रभावित करता था। गुरुजी न केवल आदिवासियों, बल्कि अन्य समाजों के भी संरक्षक माने जाते थे। मैं अपनी ओर से उन्हें विनम्र श्रद्धांजलि अर्पित करता हूं।
बाबा रामदेव, अश्विनी चौबे, पप्पू यादव और आरके आनंद नेमरा पहुंचे
पूर्व केंद्रीय मंत्री अश्विनी कुमार चौबे, सांसद पप्पू यादव और पूर्व राज्यसभा सांसद आरके आनंद आज मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के पैतृक गांव नेमरा में राज्य के पूर्व मुख्यमंत्री दिशोम गुरु शिबू सोरेन के "संस्कार भोज" में शामिल हुए। सभी ने दिवंगत गुरुजी की तस्वीर पर माल्यार्पण कर उन्हें नमन किया और मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन व उनके परिजनों से मिलकर अपनी संवेदनाएं व्यक्त कीं।
संस्कार भोज के मद्देनजर व्यापक व्यवस्थाएं
संस्कार भोज के मद्देनजर व्यापक व्यवस्थाएं की गई थी। पांच बड़े पंडाल बनाए गए थे। पंडालों के बाहर गुरुजी की तस्वीर लगाई गई। जहां लोगों ने उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की। सुरक्षा के भी कड़े इंतजाम किए गए थे। 3 हज़ार पुलिसकर्मियों को तैनात किया गया था। सुरक्षा व्यवस्था में भारतीय पुलिस सेवा (IPS) के 10 अधिकारी, 60 पुलिस उपाधीक्षक और 65 पुलिस निरीक्षक तैनात थे। पुलिस, प्रशासनिक कर्मचारियों और स्वयंसेवकों की एक बहु-एजेंसी टीम ने प्रभावी भीड़ प्रबंधन, आपातकालीन स्थिति और कानून-व्यवस्था सुनिश्चित करने के लिए 24 घंटे काम किया।
सुविधा के लिए 300 से ज़्यादा ई-रिक्शा की व्यवस्था
आदिवासी रीति-रिवाजों के अनुसार श्राद्ध कर्मकांडों के लिए भी व्यवस्था की गई थी सुविधाजनक आवागमन के लिए निर्धारित पार्किंग क्षेत्रों और आयोजन स्थल के बीच 300 से ज़्यादा ई-रिक्शा की व्यवस्था की गई। तीन बड़े पार्किंग क्षेत्र विकसित किए गए हैं, जिनमें से प्रत्येक में बायो-टॉयलेट, इसके अलावा, आगंतुकों की सुविधा के लिए विश्राम स्थल और विशेष पैदल मार्ग भी बनाए गए हैं।
शिबू सोरेन के जीवन से जुड़ी दुर्लभ तस्वीरें और ऐतिहासिक दस्तावेज़
तीन बड़े भोजन पंडालों में खानपान की व्यवस्था की गई। जहां पारंपरिक श्राद्ध भोजन और प्रसाद परोसा गया। गुरुजी के नाम से प्रसिद्ध शिबू सोरेन के जीवन और योगदान को याद करने के लिए एक विशेष प्रदर्शनी और स्मृति दीर्घा भी स्थापित की गई। इस प्रदर्शनी में उनके राजनीतिक जीवन की दुर्लभ तस्वीरें, ऐतिहासिक दस्तावेज़ और प्रमुख पड़ाव प्रदर्शित किए गए, जिनमें आदिवासी कल्याण और जनसेवा में उनके योगदान पर विशेष ध्यान दिया गया। बड़ी संख्या में लोग श्राद्ध कर्म के लिए पहुंचे।
हेमंत सोरेन 5 अगस्त से नेमरा गांव में हैं
दिशोम गुरु शिबू सोरेन का 4 अगस्त को नई दिल्ली के सर गंगा राम अस्पताल में निधन हो गया था। उनका अंतिम संस्कार 5 अगस्त को नेमरा गांव में किया गया। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने अपने पिता की चिता को मुखाग्नि दी। तब से हेमंत सोरेन नेमरा गांव में ही हैं।