Jharkhand Triple Murder Shock! झारखंड के साहिबगंज में ज़मीन विवाद ने ली खौफनाक मोड़! बज्जल हेम्ब्रम ने लोहे की रॉड से एक ही परिवार के 3 लोगों की हत्या कर दी। तीनों शव अलग-अलग जगह मिले और फिर आरोपी थाने पहुंचकर खुद ही कर बैठा सरेंडर!

Sahibganj Family Murder Case: झारखंड के साहिबगंज ज़िले में एक दिल दहला देने वाली घटना ने सभी को झकझोर दिया। Jharkhand Land Dispute Murder से जुड़ा यह मामला उस समय सुर्खियों में आ गया, जब एक ही परिवार के तीन लोगों को Iron Rod से बेरहमी से पीटकर मार डाला गया। हैरानी की बात यह है कि हत्यारा कोई बाहरी नहीं, बल्कि पीड़ितों का अपना रिश्तेदार बज्जल हेम्ब्रम निकला।

हत्या का कारण-क्या यह सिर्फ ज़मीन का विवाद था?

पुलिस रिपोर्ट के अनुसार, मृतकों की पहचान नोहा बेसरा, उनकी बेटी बड़की मुर्मू और दामाद नथानिएल हांसदा के रूप में हुई। उनके रिश्तेदार बज्जल हेम्ब्रम ने पहले नोहा बेसरा को आंगन में लोहे की रॉड से मार डाला। फिर उसने घर के अंदर बेटी बड़की मुर्मू और सड़क पर दामाद नथानिएल हांसदा को निशाना बनाते हुए हत्या कर दी।

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क्या घटनास्थल पर मिले सुराग खोलेंगे साजिश का राज़? 

जब पुलिस मौके पर पहुंची, तो शव तीन अलग-अलग स्थानों पर मिले-एक आंगन में, एक सड़क पर और तीसरा घर के अंदर। पुलिस ने घटना में प्रयुक्त रॉड बरामद कर ली है। मौके पर पहुंचे डीएसपी विमलेश कुमार त्रिपाठी और एसपी अमित कुमार सिंह ने मामले की पुष्टि की और कहा कि गहन जांच जारी है।

कैसे सामने आई वारदात की सच्चाई?

हत्या के बाद बज्जल हेम्ब्रम खुद तालझारी पुलिस स्टेशन गया और आत्मसमर्पण कर दिया। आत्मसमर्पण एक सोची-समझी योजना थी या अपराधबोध का असर? पुलिस अब इस पहलू पर भी जांच कर रही है।

क्या ज़मीन विवाद का यह मामला था पहले से सुलगती चिंगारी? 

स्थानीय सूत्रों के मुताबिक, आरोपी और पीड़ितों के बीच ज़मीन को लेकर लंबे समय से विवाद चल रहा था। हालांकि यह विवाद इस कदर हिंसक हो जाएगा, किसी ने नहीं सोचा था। यह भी जाँच का विषय है कि कहीं यह हत्या पहले से योजनाबद्ध तो नहीं थी।

ग्रामीणों में भय का माहौल, क्या फिर से उठेगा भरोसा? 

घटना के बाद पूरे गांव में दहशत फैल गई। ग्रामीणों की भारी भीड़ ने घटनास्थल को घेर लिया और स्थिति को नियंत्रित करने में पुलिस को काफ़ी मशक्कत करनी पड़ी। फिलहाल गांव में तनाव बना हुआ है।

क्या कानून देगा अब समय पर इंसाफ़? 

हत्या, वह भी अपने ही परिजन की-यह घटना सिर्फ अपराध नहीं, बल्कि सामाजिक विघटन का भी प्रतीक है। सवाल उठता है कि क्या ऐसी घटनाओं से निपटने के लिए हमारे पास पर्याप्त सुरक्षा और जागरूकता है?

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