Jharkhand jail reforms 2025: झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की अध्यक्षता में हुई सजा समीक्षा बोर्ड की बैठक में आजीवन कारावास की सजा काट रहे 51 कैदियों की रिहाई पर सहमति बनी। इन कैदियों को सामाजिक सुरक्षा योजनाओं से जोड़ने के भी निर्देश दिए गए। 

Jharkahnd News: मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की अध्यक्षता में रांची स्थित सीएम आवासीय कार्यालय में राज्य सजा समीक्षा बोर्ड की 35वीं बैठक हुई। इस बैठक में राज्य के विभिन्न जिलों में आजीवन कारावास की सजा काट रहे कुल 51 कैदियों को रिहा करने को लेकर सहमति बनी है। इन बैठकों में रिहाई से संबंधित 37 नए मामलों के साथ-साथ 66 कैदियों के उन मामलों पर भी पुनर्विचार किया गया, जिन्हें झारखंड राज्य सजा समीक्षा बोर्ड की पिछली बैठकों में खारिज कर दिया गया था।

बैठक में कई अधिकारी रहें उपस्थित

इस बैठक में मुख्यमंत्री के अपर मुख्य सचिव अविनाश कुमार, गृह, कारा एवं आपदा प्रबंधन विभाग की प्रधान सचिव वंदना दादेल, पुलिस महानिदेशक अनुराग गुप्ता, प्रधान सचिव-सह-विधि सलाहकार विधि (न्याय) नीरज कुमार श्रीवास्तव, कारा एवं सुधार सेवाएं महानिरीक्षक सुदर्शन प्रसाद मंडल, न्याय आयुक्त अनिल कुमार मिश्रा, मुख्य परिवीक्षा अधिकारी सहित कई अधिकारी मौजूर रहो।

51 कैदियों की रिहाई पर बनी सहमति

मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने राज्य सजा समीक्षा बोर्ड की अनुशंसा के बाद राज्य की विभिन्न जेलों में आजीवन कारावास की सजा काट रहे कुल 103 कैदियों की रिहाई के प्रस्ताव पर अधिकारियों के साथ बिंदुवार गहन चर्चा की। इन अपराधियों की रिहाई के लिए प्रत्येक कैदी की फाइल पर गंभीरता से विचार किया गया। इसके बाद मुख्यमंत्री ने कैदियों के बारे में हर तरह की जानकारी ली। रिहाई के लिए अनुशंसित कैदियों की उम्र और पारिवारिक, सामाजिक एवं एजुकेशनल स्थिति की जानकारी लेने के बाद, सीएम हेमंत सोरेन ने कुल 51 कैदियों की रिहाई के निर्णय पर अपनी सहमति दी।

सामाजिक सुरक्षा योजनाओं से जोड़ने के निर्देश

इस रिहाई से संबंधित मामलों में कुछ ऐसे मामले भी हैं जिनमें कैदियों के बीमार होने और कुछ की मानसिक स्थिति ठीक न होने की बात कही गई है। ऐसे मामलों में कैदियों को फिजिकल और मेंटल इलाज किया गया। ताकि वे अपना जीवन सुचारू रूप से जी सकें। डॉक्टर द्वारा टेस्ट रिपोर्ट आने के बाद ऐसे कैदियों की रिहाई पर विचार किया जाएगा। हेमंत सोरेन ने अधिकारियों को रिहा होने वाले कैदियों को हर हाल में सामाजिक सुरक्षा योजनाओं से जोड़ने का निर्देश दिया है। इस बैठक में समीक्षा के दौरान, राज्य की जेलों में 14 वर्ष या उससे अधिक की सजा काट रहे, वृद्ध हो चुके और जेल में उनके आचरण को देखते हुए रिहा किए जा रहे कैदियों को रिहा करने का निर्देश दिया गया। साथ ही, अधिकारियों को रिहा होने वाले कैदियों को बेहतर सामाजिक जीवन शुरू करने के लिए प्रेरित करने का निर्देश दिया गया।

ये भी पढे़ं- Ranchi News: झारखंड विधानसभा मानसून सत्र फिर हुआ शुरू, शिबू सोरेन को भारत रत्न देने की मांग

2019 से अब तक 619 कैदियों की रिहाई

झारखंड राज्य सजा पुनरीक्षण पर्षद की बैठक में आम सहमति के बाद, वर्ष 2019 से अब तक राज्य के 619 कैदियों को रिहा किया जा चुका है। इसमें विभाग द्वारा 558 कैदियों का भौतिक सत्यापन भी किया जा चुका है। 61 कैदियों का भौतिक सत्यापन अभी किया जाना बाकी है। अधिकारियों द्वारा मुख्यमंत्री को यह भी बताया गया कि वर्ष 2019 से अब तक रिहा किए गए 619 कैदियों में से 470 को सरकार द्वारा संचालित योजनाओं से जोड़ा जा चुका है। इनमें वृद्धावस्था पेंशन, विधवा पेंशन, राशन कार्ड, आयुष्मान कार्ड, पीएम आवास योजना, मनरेगा ई-श्रम कार्ड आदि शामिल हैं। जो कैदी रिहा हो चुके हैं और सरकारी योजनाओं का लाभ नहीं मिल रहा है, उन्हें संबंधित योजनाओं से जोड़ा जा रहा है और जल्द ही उन्हें सरकार द्वारा संचालित सामाजिक सुरक्षा योजनाओं से लाभान्वित किया जाएगा।

ये भी पढ़ें- Voter Adhikar Yatra का 7वां दिन, मखाना खेत में घुसकर Rahul Gandhi ने सुनी किसानों की समस्या