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स्वच्छ छवि से लेकर साउथ स्ट्रैटेजी तक-वो 5 बड़ी वजहें, जिनसे राधाकृष्णन बने NDA की पहली पसंद
Vice President Election 2025 Update: NDA ने किया बड़ा दांव! ‘कोयंबटूर के वाजपेयी’ कहलाने वाले CP राधाकृष्णन को उपराष्ट्रपति उम्मीदवार घोषित किया। 2 बार सांसद, झारखंड के राज्यपाल और बेदाग छवि वाले नेता पर क्यों जताया भरोसा? 5 वजहें आपको चौंका देंगी…
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NDA का गेमचेंजर फैसला
उपराष्ट्रपति चुनाव 2025 को लेकर NDA ने बड़ा कदम उठाया है। गठबंधन ने तमिलनाडु के वरिष्ठ नेता चंद्रपुरम पोन्नुसामी राधाकृष्णन को उम्मीदवार बनाया। बीजेपी ने सहयोगी दलों और संघ के साथ मंथन के बाद उनका नाम फाइनल किया। राज्यसभा में NDA की संख्या को देखते हुए उनकी जीत लगभग तय मानी जा रही है। यह कदम कई राजनीतिक समीकरणों को बदलने वाला माना जा रहा है।
आरएसएस की पाठशाला से निकले नेता
सीपी राधाकृष्णन का सफर साधारण कार्यकर्ता से शुरू होकर राष्ट्रीय राजनीति तक पहुँचा। 1974 में उन्होंने जनसंघ और आरएसएस से जुड़कर राजनीति की पहली सीढ़ी चढ़ी। 2004 में वे तमिलनाडु बीजेपी के अध्यक्ष बने। गौंडर समुदाय से ताल्लुक रखने के कारण उन्हें मजबूत सामाजिक आधार मिला। जमीनी स्तर पर सेवा और ओबीसी वर्ग के बीच पकड़ ने उन्हें पार्टी का भरोसेमंद चेहरा बना दिया।
चुनावी जीत का इतिहास
1998 और 1999 में राधाकृष्णन ने तमिलनाडु से दो बार लोकसभा की सीट जीती। यह जीत इसलिए ऐतिहासिक रही क्योंकि उस समय डीएमके और कांग्रेस का दबदबा था। 1998 के चुनाव में उन्होंने 1.5 लाख वोटों के अंतर से जीत दर्ज की थी। बाद में उन्हें झारखंड का राज्यपाल भी बनाया गया। उनका यह अनुभव उन्हें राष्ट्रीय राजनीति में और अहम बनाता है।
साफ-सुथरी और स्पष्टवादी छवि
राजनीति में सबसे बड़ी पूंजी होती है भरोसा। राधाकृष्णन अपनी स्पष्टवादिता और स्वच्छ छवि के लिए जाने जाते हैं। वे विवादों से दूर रहते हैं और सहयोगियों को साथ लेकर चलने की क्षमता रखते हैं। यही कारण है कि पार्टी नेतृत्व और कार्यकर्ताओं के बीच उनकी साख बेहद ऊँची है। उन्होंने खुद भी कहा है कि वे अंतिम सांस तक राष्ट्रसेवा के लिए समर्पित रहेंगे।
सीपी राधाकृष्णन को क्यों कहा जाता है ‘कोयंबटूर के वाजपेयी’?
उनका सौम्य स्वभाव और संवाद कौशल उन्हें ‘कोयंबटूर का वाजपेयी’ कहलाने पर मजबूर करता है। वे विरोधियों से भी रिश्ते मधुर रखते हैं और गैर-विवादास्पद राजनीति के लिए जाने जाते हैं। उनके मृदुभाषी अंदाज़ ने उन्हें दक्षिण भारत में एक अलग पहचान दी है। यही गुण उन्हें उपराष्ट्रपति पद के लिए और भी उपयुक्त बनाते हैं।
दक्षिण भारत में BJP की पकड़ मजबूत करने की कोशिश
NDA का यह फैसला केवल चुनाव जीतने का कदम नहीं बल्कि 2026 में होने वाले तमिलनाडु विधानसभा चुनाव की तैयारी भी है। बीजेपी दक्षिण भारत में अपनी उपस्थिति बढ़ाना चाहती है और राधाकृष्णन जैसे लोकप्रिय नेता इस रणनीति में फिट बैठते हैं। उनकी जातीय और सामाजिक पृष्ठभूमि भी बीजेपी के लिए राजनीतिक बढ़त दिला सकती है।
पीएम मोदी और नेतृत्व का विश्वास
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और शीर्ष नेतृत्व राधाकृष्णन की ईमानदारी और संगठन के प्रति समर्पण को लंबे समय से पहचानते हैं। यही भरोसा उनकी उम्मीदवारी की सबसे बड़ी ताकत है। राधाकृष्णन को न सिर्फ एक काबिल प्रशासक बल्कि एक संवेदनशील नेता भी माना जाता है, जो राष्ट्रीय राजनीति को संतुलन दे सकते हैं।
कब है उपराष्ट्रपति का चुनाव?
उपराष्ट्रपति चुनाव के लिए नामांकन 22 अगस्त तक होगा और अगर विपक्ष भी उम्मीदवार उतारता है तो मतदान 9 सितंबर को होगा। सूत्र बताते हैं कि रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह इस चुनाव की देखरेख करेंगे जबकि किरेन रिजिजू पोलिंग एजेंट होंगे। कुल मिलाकर, NDA के लिए यह चुनाव सिर्फ औपचारिकता बनकर रह गया है।