सार

दिल्ली विधानसभा चुनाव में कुछ प्रतिशत वोट इधर से उधर होने से आप की सत्ता छीन गई तो 27 साल बाद बीजेपी की वापसी हो गई। आइए जानते हैं पिछले चार चुनावों का वोटिंग ट्रेंड और जनादेश…

Delhi Assembly Election 2025: दिल्ली में बीजेपी की एक और हसरत पूरी हो गई। देश की राजधानी में 27 साल बाद भाजपा ने सरकार में वापसी की है। मोदी के प्रधानमंत्री कार्यकाल में यह पहला मौका है जब दिल्ली में बीजेपी का मुख्यमंत्री होगा। हालांकि, पिछले चार चुनावों का ट्रेंड देखे तो यह साफ है कि बीजेपी धीरे-धीरे अपना वोट शेयर बढ़ाती गई। दिल्ली विधानसभा चुनावों में वोटर टर्नआउट (Voter Turnout) और पार्टियों के वोट शेयर (Vote Share) में वर्षों से बड़ा बदलाव देखने को मिला है। यह बदलता ट्रेंड दिल्ली चुनाव (Delhi Elections 2025) में आम आदमी पार्टी (AAP) की कमजोर होती पकड़ की कहानी कह रहा तो भारतीय जनता पार्टी (BJP) के लगातार उठ रहे ग्राफ को बता रहा। वैसे सीट जीतने के मामले में कांग्रेस (Congress) को निराशा हाथ लगी है, थोड़ी उम्मीद जगाने वाली इसलिए क्योंकि इस बार इसके वोट में 2 प्रतिशत इजाफा दर्ज हुआ है। लेकिन सीटों के मामले में स्थिति जस की तस बनी रही।

यह है दिल्ली में 2013 से 2025 तक का वोटर टर्नआउट ट्रैंड?

दिल्ली में 2013 के वोटों का ट्रेंड कैसा रहा?

दिल्ली विधानसभा चुनाव 2013(Delhi Assembly Elections 2013) का ट्रेंड एंटी कांग्रेस रहा। 2013 का जनादेश, लगातार तीन बार से दिल्ली की सत्ता पर काबिज तत्कालीन सीएम शीला दीक्षित के नेतृत्व वाली कांग्रेस सरकार के विरोध में था। अन्ना आंदोलन के बाद अरविंद केजरीवाल के नेतृत्व में आम आदमी पार्टी का गठन हुआ। आम आदमी पार्टी पहली बार दिल्ली चुनाव मैदान में थी। पहली बार ही आप ने 28 सीटें जीती। जबकि बीजेपी को 31 सीटों पर जीत हासिल हुई। कांग्रेस यह चुनाव बुरी तरह हारी। तत्कालीन सीएम शीला दीक्षित को अरविंद केजरीवाल ने हराया। कांग्रेस के तमाम दिग्गज चुनाव हार चुके थे लेकिन केजरीवाल को जब सरकार बनाने के लिए बहुमत के लिए संख्या की दरकार हुई तो कांग्रेस ने अपने 8 विधायकों का बाहर से समर्थन दिया। कांग्रेस के समर्थन से केजरीवाल पहली बार दिल्ली के सीएम बनें।

2013 में जनता ने पहली बार चुनाव लड़ी AAP को हाथों-हाथ लिया और 29.49% वोट शेयर उसके हिस्से में आया। हालांकि, BJP ने 33.07% वोट शेयर के साथ बढ़त बनाए रखी। उधर, कभी दिल्ली में राज करने वाली Congress का वोट प्रतिशत गिरकर 24.55% पर आ गया।

2015 में आम आदमी पार्टी ने रच दिया इतिहास

2013 के बाद दूसरी बार दिल्ली की जनता के बीच आम आदमी पार्टी 2015 में थी। 2015 दिल्ली विधानसभा चुनाव (Delhi Assembly Elections 2015) में AAP ने ऐतिहासिक जीत दर्ज करते हुए 54.34% वोट शेयर हासिल किया। बीजेपी को मामूली झटका वोट शेयर में लगा और उसकी 28 सीटें छीन गई। वोट शेयर और सीटों के मामले में सबसे बड़ा झटका कांग्रेस को लगा, वह 2015 में शून्य सीट पर पहुंच गई तो वोट शेयर परसेंटेज भी 9.65% रह गया। इस चुनाव में आप ने 70 में 67 सीटें जीतकर इतिहास बना दिया तो बीजेपी 31 सीट से 3 सीट पर सिमट गई। कांग्रेस का खाता तक न खुल सका।

कैसा रहा 2020 में दिल्ली का मिजाज

2020 दिल्ली विधानसभा चुनाव (Delhi Assembly Elections 2020) में आम आदमी पार्टी को वोट शेयर परसेंटेज में मामूली झटका लगा लेकिन वह सत्ता कायम रखने में कामयाब रही। AAP ने 53.57% वोट शेयर के साथ बढ़त बनाई। BJP ने अपनी स्थिति मजबूत करते हुए 38.51% वोट शेयर हासिल किया। लेकिन Congress का प्रदर्शन बेहद खराब रहा और पार्टी सिर्फ 4.26% वोट शेयर तक सिमट गई। सीटों पर जीत की दृष्टि से देखें तो आप का प्रदर्शन खराब होना शुरू हो चुका था। वह 2020 में 67 से 62 सीटों पर खिसक गई। पांच सीटें उससे बीजेपी ने छीन ली और भाजपा इस बार 8 सीट जीती। कांग्रेस का दूसरी बार खाता न खुल सका।

2025 में आप को जबर्दस्त झटका तो बीजेपी को प्रचंड बढ़त

2025 दिल्ली विधानसभा चुनाव (Delhi Assembly Elections 2025) में आम आदमी पार्टी की लोकप्रियता में जबर्दस्त गिरावट देखने को मिला। AAP का वोट शेयर 53.57% से घटकर 43.57% पर आ गया है। जबकि बीजेपी ने 7 प्रतिशत अपने वोट शेयर में इजाफा कर प्रचंड बहुमत हासिल कर लिया। BJP ने 38.51% से बढ़कर 45.56% वोट शेयर हासिल किया है। हालांकि, लगातार तीसरी बार कांग्रेस अपना खाता न खोल सकी लेकिन उसके लिए इकलौती राहत यह रही कि उसका वोट शेयर 4.26% से बढ़कर 6.34% हो गया। वोट शेयर में उतार-चढ़ाव का नतीजा यह रहा कि सात प्रतिशत वोट शेयर बढ़ने की वजह से बीजेपी इस बार 8 सीटों से 48 सीटों पर पहुंच गई है। जबकि दस प्रतिशत वोट शेयर कम होने का नतीजा यह है कि आम आदमी पार्टी 62 सीटों से घटकर 22 सीटों पर पहुंच गई है। हालांकि, कांग्रेस के वोट परसेंटेज में 2.08 प्रतिशत इजाफा तो जरूर है लेकिन सीटों का फायदा शून्य रहा।

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