सार
बिहार के सरकारी स्कूलों के 10 लाख से ज़्यादा बच्चों के डेटा में बड़ी गड़बड़ी। जन्मतिथि, बैंक खाते और माता-पिता के नाम गलत, 2500 बच्चों के माता-पिता एक ही। जानें पूरा मामला।
पटना। बिहार के शिक्षा विभाग में हाल ही में एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जिसमें सरकारी स्कूलों के 10 लाख से ज्यादा बच्चों के डेटा में भारी गड़बड़ियां पाई गई हैं। जन्मतिथि से लेकर बैंक खाते और माता-पिता के नाम तक गलत दर्ज किए गए हैं। सबसे हैरान करने वाली बात यह है कि करीब 2500 बच्चों के माता-पिता का नाम एक ही है, जिससे ऐसा लग रहा है जैसे ये सभी बच्चे एक ही परिवार के हैं। यह गलती प्रशासनिक लापरवाही की एक बड़ी मिसाल बन गई है। पूरा मामला जानकर आप भी हैरान हो जाएंगे।
सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चों के डेटा में बड़ी गड़बड़ी
बिहार के सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चों का पूरा डेटा ई-शिक्षा कोष पोर्टल पर दर्ज किया जाता है, जिसे सरकारी योजनाओं के लाभ देने के लिए यूज किया जाता है। लेकिन जब हाल ही में इस डेटा की जांच की गई, तो यह पाया गया कि 10 लाख 29 हजार बच्चों की जानकारी में गंभीर गलतियां हैं। इनमें जन्मतिथि, माता-पिता के नाम और बैंक खाते की गलत जानकारी शामिल हैं।
गलत डेटा से सरकारी योजनाओं पर असर
सरकार द्वारा चलाई जा रही छात्रवृत्ति, मिड-डे मील और अन्य कल्याणकारी योजनाओं का लाभ ई-शिक्षा कोष पोर्टल के सही डेटा पर निर्भर करता है। लेकिन जब डेटा ही गलत हो, तो इसका सीधा असर छात्रों को मिलने वाली सुविधाओं पर पड़ सकता है।
ढाई हजार बच्चों के एक ही मम्मी-पापा, यह कैसे हुआ?
इस पूरे मामले में सबसे चौंकाने वाला खुलासा यह है कि करीब 2500 बच्चों के माता-पिता का नाम एक ही दर्ज कर दिया गया है। यानी सरकारी रिकॉर्ड में यह दिखाया जा रहा है कि ये सभी बच्चे एक ही परिवार के हैं। माना जा रहा है कि डेटा एंट्री ऑपरेटर्स की लापरवाही के कारण यह गलती हुई है। कई मामलों में कॉपी-पेस्ट करने के कारण एक ही माता-पिता का नाम हजारों बच्चों के साथ दर्ज हो गया।
जन्मतिथि और बैंक खातों में भी गंभीर गलतियां
गलत माता-पिता के नाम दर्ज होने के अलावा डेटा में कई अन्य बड़ी गड़बड़ियां पाई गई हैं। करीब 5.26 लाख बच्चों की जन्मतिथि उनकी कक्षा के अनुसार मेल नहीं खा रही। इसका मतलब यह हुआ कि या तो उन्हें गलत उम्र में दाखिला दिया गया, या फिर डेटा अपडेट करते समय बड़ी गलती की गई। 4.5 लाख बच्चों के बैंक खाते एक से अधिक नामों से जुड़े पाए गए। यह सरकारी योजनाओं में फर्जीवाड़े की साजिश भी हो सकती है।
शिक्षा विभाग ने दिया 3 दिन में सुधार का अल्टीमेटम
इस लापरवाही को लेकर बिहार शिक्षा विभाग ने सभी जिलों के DEO (District Education Officer) को पत्र लिखकर मामले में कार्रवाई करने के लिए कहा है। तीन दिन के भीतर सभी गलतियों को सुधारने के निर्देश दिए गए हैं। यदि इस अवधि में गड़बड़ियों को ठीक नहीं किया गया, तो संबंधित अधिकारियों पर कार्रवाई की जाएगी।
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