Rang Panchami 2026 Kab Hai: होली के बाद रंग पंचमी का पर्व मनाने की परंपरा है। लेकिन ये उत्सव सिर्फ मध्य प्रदेश के मालवा क्षेत्र में ही मनाया जाता है। रंग पंचमी पर लोग एक-दूसरे को पक्का रंग लगाते हैं, इसलिए इसे रंग पंचमी कहते हैं।

2026 Me Rang Panchami Kab Hai: होली रंगों का त्योहार है। होली उत्सव फाल्गुन मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी से शुरू होकर चैत्र मास के कृष्ण पक्ष की पंचमी तिथि तक मनाया जाता है यानी पूरे 10 दिन। रंग पंचमी उत्सव के साथ ही ये पर्व समाप्त होता है। रंग पंचमी का पर्व देश को कुछ हिस्सों में ही मनाया जाता है। मध्य प्रदेश के मालवा प्रांत में इसकी सबसे ज्यादा धूम देखने को मिलती है। जानें इस बार रंग पंचमी का पर्व किस तारीख को मनाया जाएगा और इस पर्व से जुड़ी अन्य खास बातें…

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कब है रंग पंचमी 2026?

धर्म ग्रंथों के अनुसार रंग पंचमी का पर्व चैत्र मास के कृष्ण पक्ष की पंचमी तिथि को मनाया जाता है। इस बार ये तिथि 07 मार्च, शनिवार की शाम 07 बजकर 17 मिनिट से शुरू होगी जो 08 मार्च, रविवार की रात 09 बजकर 11 मिनिट तक रहेगी। चूंकि पंचमी तिथि का सूर्योदय 8 मार्च, रविवार को होगा, इसलिए इसी दिन रंग पंचमी का पर्व मनाया जाएगा।

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क्यों मनाते हैं रंगपंचमी?

प्रचलित कथाओं के अनुसार हिरण्यकश्यिपु नाम का एक राक्षस था जो भगवान विष्णु को अपना दुश्मन मानता था। लेकिन उसका पुत्र प्रह्लाद भगवान विष्णु का परम भक्त था। जब ये बात हिरण्यकश्यिपु को पता चली तो उसने अपने पुत्र को मारने के लिए कईं प्रयास किए लेकिन वह असफल रहा। अंत में उसने प्रह्लाद को मारने के लिए अग्नि में अपनी बहन होलिका के साथ बैठा दिया। 5 दिन तक प्रह्लाद और होलिका अग्नि में बैठे रहे। इस दौरान होलिका का अंत हो गया और प्रह्लाद जीवित बच गए। जब लोगों ने ये देखा तो उनमें उत्साह और हर्ष छा गया और सभी ने रंग-गुलाल से उत्सव मनाया। तभी से रंगपंचमी का पर्व मनाया जा रहा है।

इंदौर में निकलती है विश्व प्रसिद्ध गैर

रंगपंचमी के मौके पर पर मध्य प्रदेश के इंदौर में परंपरागत गैर निकाली जाती है यानी जुलूस निकाला जाता है। इस गैर का आयोजन स्थानीय प्रशासन द्वारा ही किया जाता है। खास बात ये है कि गैर में 4 से 5 लाख लोग शामिल होते हैं। यही कारण है कि इस गैर को यूनेस्कों की विश्व धरोहर सूची में शामिल किया गया है। वर्तमान में ये गैर इंदौर की पहचान बन चुकी है।


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इस आर्टिकल में जो जानकारी है, वो धर्म ग्रंथों, विद्वानों और ज्योतिषियों से ली गईं हैं। हम सिर्फ इस जानकारी को आप तक पहुंचाने का एक माध्यम हैं। यूजर्स इन जानकारियों को सिर्फ सूचना ही मानें।