सार

Prayagraj Maha Kumbh 2025: प्रयागराज में महाकुंभ 2025 की शुरूआत हो चुकी है। ये धार्मिक मेला 26 फरवरी तक रहेगा। महाकुंभ मेंले में साधुओं ने अपनी एक अलग ही दुनिया बसाई है। यहां 13 अखाड़ों के अलग-अलग कैंप हैं।

 

Prayagraj Maha Kumbh 2025: साधु-संतों की अपनी एक अलग ही दुनिया है। प्रयागराज में चल रहे महाकुंभ में लाखों साधु-संत एक जगह इकट्ठा होकर अपनी जीवन शैली के बारे में जानने का सभी का मौका दे रहे हैं। जैसे साधुओं की जीवन शैली अलग होती है, वैसे ही इनका भाषा में आम बोल-चाल से थोड़ी अलग होती है। आम लोगों के इसके बारे में पता भी नहीं है। आगे जानिए साधुओं की भाषा के कुछ रोचक शब्द…

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क्या होती है लंका?

साधु अपनी बोल-चाल में मिर्च को लंका बोलते हैं। ये अपने खाने में मिर्च का उपयोग जरूर करते हैं। मिर्च डाले बिना साधुओं की कोई सब्जी नहीं बनती। साधु मिर्च के लिए लंका शब्द का उपयोग कब से कर रहे हैं, इसके बारे में तो कोई नहीं जानता, लेकिन इसके पीछे उनका अभिप्राय मिर्च के तीखे स्वाद से हैं।

क्या होता है रामरस?

साधु नमक को रामरस बोलते हैं। अधिकांश साधु नमकीन खाना पसंद करते हैं, जिसके लिए नमक का होना जरूरी है। नमक के बिना कोई भी सब्जी में रस यानी मजा नहीं आता, उसी तरह जीवन में राम के नाम के बिना रस नहीं। इसी बात को समझते हुए साधुओं ने नमक का नाम रामरस रखा है।


क्या है रंगबदल?

साधुओं की भाषा में हल्दी को रंगबदल कहते हैं। ऐसा इसलिए क्योंकि हल्दी डालने से किसी भी पकवान का रंग तुरंत बदल जाता है। कुछ साधु अपने हर पकवान के पीछे राम नाम भी बोलते हैं जैसे- पुरी राम, सब्जी राम आदि।

ये शब्द भी हैं अलग

1. साधु चावल को चावल या भात नहीं बल्कि महाप्रसाद बोलते हैं।
2. साधुओं की भाषा में रोटी को टिकर कहा जाता है।
3. जब साधु-संत भोजन करने बैठते हैं तो इसे भंडारा कहा जाता है।
4. भोजन बनाने वाले को साधु भंडारी कहते हैं।
5. साधु कभी ये नही कहते कि हमें भोजन करना है, वे इसे प्रसाद पाना कहते हैं।


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