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Unique Ganesh Mandir: श्रीगणेश के 5 अजब-गजब मंदिर, कोई ऊंचे पहाड़ पर तो कोई श्मशान में
Ganesh Chaturthi 2025: इस बार गणेश चतुर्थी का पर्व 27 अगस्त, बुधवार को है। इस दिन प्रमुख गणेश मंदिरों में भक्तों की भीड़ उमड़ती है। यूं तो हमारे देश में अनेक गणेश मंदिर हैं, लेकिन इनमें से कुछ बहुत ही खास हैं।
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कब से कब तक मनाया जाएगा गणेश उत्सव 2025?
5 unique temples of Shri Ganesha in India: भगवान श्रीगणेश को प्रथम पूज्य कहा जाता है यानी किसी भी शुभ काम से पहले इनकी पूजा अनिवार्य है। हमारे देश में श्रीगणेश के अनेक प्राचीन मंदिर हैं लेकिन इनमें से कुछ बहुत ही खास और अनोखे हैं। इन मंदिरों से खास मान्यताएं और परंपराएं भी जुड़ी हुई हैं। गणेश उत्सव के दौरान इन मंदिरों में भक्तों की भीड़ उमड़ती है। इस बार गणेश उत्सव 27 अगस्त से 5 सितंबर तक मनाया जाएगा। इस मौके पर जानिए भगवान श्रीगणेश के 5 अजब-गजब मंदिरों के बारे में…
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दंतेवाड़ा का ढोलकल गणेश मंदिर
छत्तीसगढ़ के दंतेवाड़ा में 3 हजार फीट ऊंची पहाड़ी पर भगवान श्रीगणेश का एक प्रसिद्ध मंदिर है, जिसे ढोलकल गणपति का मंदिर कहते हैं। यहां स्थापित प्रतिमा लगभग 1 हजार साल पुरानी है। ये दुनिया में भगवान गणपति की सबसे दुर्लभ प्रतिमाओं में से एक मानी जाती है। ढोलकल गणपति को दंतेवाड़ा का रक्षक भी कहा जाता है। मान्यताओं के अनुसार नागवंशी राजाओं 10वीं-11वीं शताब्दी में इस प्रतिमा की स्थापना की थी।
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चित्तूर का कनिपकम श्री वरसिद्धि विनायक स्वामी मंदिर
आंध्र प्रदेश के चित्तूर जिले में भगवान श्रीगणेश का एक प्राचीन मंदिर है, इसे कनिपकम श्री वरसिद्धि विनायक स्वामी मंदिर के नाम से जाना जाता है। इस मंदिर में भगवान श्रीगणेश की जो प्रतिमा स्थापित है, वो जमीन से निकली है, ऐसी मान्यता है। स्थानीय लोगों का दावा है गणेशजी की इस प्रतिमा का आकार लगातार बढ़ रहा है क्योंकि 50 वर्ष पहले चढ़ाया गया चांदी का कवच अब इस गणेश प्रतिमा पर फिट नहीं होता। इस मंदिर का निर्माण 11वीं शताब्दी में चोल सम्राट कुलोत्तुंग प्रथम ने कराया था।
कूथनूर का श्री आदि विनयगर मंदिर
तमिलनाडु के तिरुवरूर जिले के कूथनूर में भगवान श्रीगणेश का एक प्राचीन मंदिर है। इसे श्री आदि विनयगर मंदिर के नाम से जाना जाता है। इस मंदिर में भगवान श्रीगणेश की जो प्रतिमा है वो दुनिया में और कहीं देखने को नहीं मिलती क्योंकि यहां गणेशजी की मानव मुख वाली मूर्ति है। इस प्रतिमा को नार मुख विनायक कहते हैं। श्रीगणेश का ये स्वरूप हाथी का सिर लगने से पहले का है।
रणथंबौर का त्रिनेत्र गणेश मंदिर
राजस्थान के रणथंबौर में भगवान श्रीगणेश का 700 साल पुराना मंदिर है, जो त्रिनेत्र गणेश मंदिर के नाम से प्रसिद्ध है। यहां भगवान श्रीगणेश की जो प्रतिमा स्थापित है उसके 3 नेत्र हैं, इसलिए इस मंदिर का ये नाम रखा गया है। इस मंदिर में श्रीगणेश के साथ उनकी पत्नी रिद्धि,सिद्धि, पुत्र शुभ-लाभ और वाहन मूषक की पूजा भी की जाती है। मान्यता है कि इस मंदिर का निर्माण साल 1299 में राजा हम्मीरदेव ने करवाया था।
उज्जैन के दसभुजा गणेश मंदिर
मध्य प्रदेश के उज्जैन में श्मशान में भगवान श्रीगणेश का एक प्राचीन मंदिर है। यहां स्थापित प्रतिमा में भगवान श्रीगणेश के 10 हाथ हैं, इसलिए इसे 10 भुजा गणेश मंदिर कहा जाता है। श्मशान में स्थित होने से इस मंदिर का महत्व और भी अधिक माना जाता है। दूर-दूर से लोग यहां दर्शन करने आते हैं। विशेष मौकों पर यहां भक्तों की भीड़ उमड़ती है। खास बात ये है इस प्रतिमा में गणेश जी को गोद में उनकी पुत्री संतोषी माता भी दिखाई देती हैं।
Disclaimer
इस आर्टिकल में जो जानकारी है, वो धर्म ग्रंथों, विद्वानों और ज्योतिषियों से ली गईं हैं। हम सिर्फ इस जानकारी को आप तक पहुंचाने का एक माध्यम हैं। यूजर्स इन जानकारियों को सिर्फ सूचना ही मानें।