Chaitra Navratri 2026 5th Day: चैत्र नवरात्रि की पंचमी तिथि पर देवी स्कंदमाता की पूजा की जाती है। ये देवी भगवान स्कंद यानी कार्तिकेय की माता है। भगवान स्कंद की माता होने से ही इनका ये नाम पड़ा। इनकी पूजा से संतान सुख मिलता है।

Chaitra Navratri 2026 Skandmata Puja Vidhi: इस बार चैत्र नवरात्रि की पंचमी तिथि 23 मार्च, सोमवार को रहेगी। इस तिथि के देवी स्कंदमाता हैं। इनकी गोद में भगवान स्कंद यानी कार्तिकेय दिखाई देते हैं। जिन लोगों की कोई संतान नहीं है, वे यदि देवी के इस रूप की पूजा करें तो उन्हें जल्दी ही संतान सुख मिलता है। आगे जानिए देवी स्कंद माता की पूजा विधि, मंत्र, आरती और महत्व आदि पूरी डिटेल…

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23 मार्च 2026 शुभ मुहूर्त

सुबह 06:31 से 08:02 तक
सुबह 09:32 से 11:03 तक
दोपहर 12:09 से 12:57 तक (अभिजीत मुहूर्त)
दोपहर 02:03 से 03:34 तक
शाम 05:04 से 06:35 तक

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इस विधि से करें देवी स्कंदमाता की पूजा

- 23 मार्च, सोमवार की सुबह स्नान आदि करने के बाद व्रत-पूजा का संकल्प लें।
- घर में किसी स्थान पर गौमूत्र या गंगा जल छिड़ककर उसे पवित्र कर लें।
- इस स्थान पर लकड़ी का पटिया रख लाल कपड़ा इसके ऊपर बिछाएं।
- इस पटिए के ऊपर देवी स्कंदमाता की तस्वीर या मूर्ति स्थापित करें।
- देवी की तस्वीर पर फूलों की माला पहनाएं, कुमकुम से तिलक करें।
- शुद्ध घी का दीपक लगाएं। अबीर, गुलाल, सिंदूर, मेहंदी, हल्दी आदि चढ़ाएं।
- केले का भोग लगाएं और नीचे लिखा मंत्र बोलने के बाद देवी की आरती करें-
या देवी सर्वभूतेषु स्कंदमाता रूपेण संस्थिता।
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नम:।।

स्कंदमाता की आरती (Skandmata Ki Aarti)

नाम तुम्हारा आता, सब के मन की जानन हारी।
जग जननी सब की महतारी।।
तेरी ज्योत जलाता रहूं मैं, हरदम तुम्हें ध्याता रहूं मैं।
कई नामों से तुझे पुकारा, मुझे एक है तेरा सहारा।।
कहीं पहाड़ों पर है डेरा, कई शहरो मैं तेरा बसेरा।
हर मंदिर में तेरे नजारे, गुण गाए तेरे भगत प्यारे।
भक्ति अपनी मुझे दिला दो, शक्ति मेरी बिगड़ी बना दो
इंद्र आदि देवता मिल सारे, करे पुकार तुम्हारे द्वारे
दुष्ट दैत्य जब चढ़ कर आए, तुम ही खंडा हाथ उठाए
दास को सदा बचाने आई, चमन की आस पुराने आई।


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