Durva Ashtami 2025 Date: गणेश उत्सव के दौरान ही हर साल दूर्वा अष्टमी का व्रत मनाया जाता है। इस व्रत में भगवान श्रीगणेश को दूर्वा विशेष रूप से चढ़ाई जाती है। जानें 2025 में कब करें दूर्वा अष्टमी व्रत?
Durva Ashtami 2025 Kab Hai: धर्म ग्रंथों के अनुसार, भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की अष्टमी तिथि पर दूर्वा अष्टमी का व्रत किया जाता है। इस व्रत में भगवान श्रीगणेश की पूजा की जाती है और दूर्वा विशेष रूप से अर्पित की जाती है। मान्यता है कि इस व्रत को करने से भगवान श्रीगणेश प्रसन्न होते हैं और अपने भक्तों की हर मनोकामना पूरी करते हैं। आगे जानिए इस बार कब है दूर्वा अष्टमी, कैसे करें पूजा, कौन-सा मंत्र बोलें आदि पूरी डिटेल…
ये भी पढ़ें-
Radha Ashtami 2025: 30 या 31 अगस्त, कब करें राधा अष्टमी व्रत? जानें पूजा विधि, मंत्र सहित पूरी डिटेल
Mahalakshmi Vrat 2025: महालक्ष्मी व्रत कब से, 30 या 31 अगस्त? जानें पूजा विधि, मुहूर्त और नियम
कब है दूर्वा अष्टमी 2025?
पंचांग के अनुसार, भाद्रपद शुक्ल अष्टमी तिथि 30 अगस्त, शनिवार की रात 10:46 से 31 अगस्त, रविवार की रात 12:58 तक रहेगी। चूंकि अष्टमी तिथि का सूर्योदय 31 अगस्त, रविवार को होगा, इसलिए इसी दिन दूर्वा अष्टमी का व्रत किया जाएगा।
दूर्वा अष्टमी 2025 शुभ मुहूर्त
सुबह 07:46 से 09:19 तक
सुबह 09:19 से 10:53 तक
दोपहर 12:02 से 12:52 तक
दोपहर 02:00 से 03:34 तक
दूर्वा अष्टमी पर कैसे करें पूजा? जानें विधि
- दूर्वा अष्टमी पर शुभ मुहूर्त में भगवान श्रीगणेश की पूजा करें। सबसे पहले श्रीगणेश की प्रतिमा पर कुमकुम से तिलक करें फिर फूलों की माला पहनाएं।
- शुद्ध घी का दीपक जलाएं। इसके अबीर, गुलाल, रोली, हल्दी, चावल, फूल, जनेऊ, आदि चीजें एक-एक करके श्रीगणेश को अर्पित करते रहें।
- इसके बाद भगवान श्रीगणेश दूर्वा भी चढ़ाएं। दूर्वा चढ़ाते समय ये मंत्र बोलें- श्री गणेशाय नमः दूर्वांकुरान् समर्पयामि।
- ध्यान रखें ये दूर्वा साफ और स्वच्छ हो। दूर्वा पर हल्दी लगाकर श्रीगणेश को चढ़ाने से और भी अधिक शुभ फल मिलते हैं।
- दूर्वा चढ़ाने के बाद श्रीगणेश को अपनी इच्छा अनुसार भोग लगाएं और आरती करें। इस तरह दूर्वा अष्टमी की पूजा करनी चाहिए।
श्रीगणेश को क्यों चढ़ाते हैं दूर्वा?
धर्म ग्रंथों के अनुसार, किसी समय अनलासुर नाम का एक पराक्रमी दैत्य था। उसने देवताओं को हराकर स्वर्ग पर अधिकार कर लिया। तब सभी देवता भगवान श्रीगणेश के पास सहायता के लिए पहुंचें। श्रीगणेश और अनलासुर में भयंकर युद्ध हुआ। श्रीगणेश ने अपना आकार विशाल कर अनलासुर को निगल लिया। ऐसा करने से उनके पेट में तेज जलन होने लगी। तब ऋषियों ने दूर्वा पीसकर श्रीगणेश को दी। दूर्वा के शीतल प्रभाव से श्रीगणेश के पेट की जलन शांत हो गई। तभी से श्रीगणेश को दूर्वा विशेष रूप से प्रिय है।
Disclaimer
इस आर्टिकल में जो जानकारी है, वो धर्म ग्रंथों, विद्वानों और ज्योतिषियों से ली गईं हैं। हम सिर्फ इस जानकारी को आप तक पहुंचाने का एक माध्यम हैं। यूजर्स इन जानकारियों को सिर्फ सूचना ही मानें।