Papmochani Ekadashi Vrat Story: इस बार पापमोचनी एकादशी का व्रत 15 मार्च, रविवार को किया जाएगा। ये हिंदू वर्ष विक्रम संवत की अंतिम एकादशी होती है। इसलिए इसका विशेष महत्व धर्म ग्रंथों में बताया गया है। इस बार पापमोचनी एकादशी पर कईं शुभ योग भी बन रहे हैं। 

Papmochani Ekadashi Vrat Katha In Hindi: चैत्र मास के कृष्ण पक्ष की एकादशी को पापमोचनी एकादशी कहते हैं। नाम से ही पता चलता है कि इस एकादशी का व्रत करने से सभी पाप पाप नष्ट हो जाते हैं। इस एकादशी की कथा सुनने से भी एक हजार गायों के दान का फल मिलता है, साथ ही ब्रह्म हत्या, सोने की चोरी आदि भयंकर पापों का भी शमन हो जाता है। इस व्रत को करने वाला मृत्यु के बाद स्वर्ग को प्राप्त होता है। आगे पढ़ें इस व्रत की रोचक कथा…

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पापमोचनी एकादशी की कथा

किसी समय चैत्ररथ नाम का एक घना जंगल था। वहां अप्सरायें आया-जाया करती थीं। उसी वन में मेधावी नाम के एक ऋषि भी तपस्या करते थे। एक दिन मंजुघोषा नाम की एक अप्सरा ने उनको मोहित कर लिया। महर्षि मेधावी भी उस अप्सरा के सौन्दर्य पर मोहित होकर भक्ति मार्ग को भूल गए और काम के वशीभूत होकर उसके साथ रमण करने लगे।

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महर्षि मेधावी और अप्सरा मंजुघोषा को रमण करते हुए 57 वर्ष बीत गए। जब महर्षि मेधावी को अपनी तपस्या भंग होने का भान हुआ तो उन्होंने मंजुघोषा को पिशाचिनी बनने का श्राप दे दिया। जब वह अप्सरा पिशाचिनी बन गई तो उसने महर्षि से अपने श्राप के निवारण का उपाय पूछा। तब महर्षि मेधावी ने उसे पापमोचनी एकादशी का व्रत करने को कहा।
इसके बाद महर्षि मेधावी को भी अपनी गलती का अहसास हुआ और वे अपने पिता च्यवन ऋषि के पास गये और इस पाप से मुक्ति का उपाय पूछा। ऋषि च्यवन ने भी अपने पुत्र को पापमोचनी एकादशी का व्रत करने को कहा। इस तरह ऋषि मेधावी और अप्सरा दोनों ने ही विधि पूर्वक पापमोचनी एकादशी का व्रत किया, जिससे प्रभाव से वे पापमुक्त हो गए।
पाप मुक्त होकर मंजुघोषा पुन: स्वर्ग को लौट गई और ऋषि मेधावी को भी अपना तपोबल पुन: मिल गया। इस एकादशी का व्रत करने से सभी पापों से मुक्ति मिल जाती है और जो इस एकादशी की कथा सुनता है उसके भी पापों का नाश हो जाता है। इसलिए व्रती (व्रत करने वाले) को पापमोचिनी एकादशी व्रत की कथा जरूर सुननी चाहिए।


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