Maha Shivaratri 2026 Date: भगवान शिव से जुड़ी अनेक कथाएं प्रचलित हैं। ऐसा भी कहा जाता है कि भगवान शिव ने स्वयं के लिए सोने की लंका बनवाई थी लेकिन रावण ने इसे दान में मांग लिया। इस कहानी में कितनी सच्चाई है, ये बहुत कम लोग जानते हैं?

2026 Mai Shivratri Kab Hai: फाल्गुन मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि पर हर साल महाशिवरात्रि का पर्व मनाया जाता है। इस बार ये पर्व 15 फरवरी, रविवार को मनाया जाएगा। महादेव से जुड़ी अनेक कथाएं और किवदंतियां प्रचलित है। ऐसी ही एक मान्यता सोने की लंका को लेकर भी है। अधिकांश लोग ये मानते हैं कि सोने की लंका महादेव ने स्वयं के लिए बनवाई थी लेकिन बाद में इसे रावण को दान में दे दी। इस मान्यता से जुड़ी सच्चाई क्या है, आगे जानिए…

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क्या सचमुच महादेव ने बनवाई थी सोने की लंका?

प्रचलित मान्यता के अनुसार एक बार जब देवी पार्वती ने देवी लक्ष्मी का यश और वैभव देखा तो उन्होंने भी महादेव से एक सुंदर महल बनवाने के लिए आग्रह किया। पहले तो महादेव ने इस पर ध्यान नहीं दिया लेकिन जब देवी पार्वती इस बात पर अड़ गई तो शिवजी अपने परम भक्त रावण से सोने का सुंदर महल बनाने को कहा। रावण ने एक उपयुक्त स्थान देखकर वहां सोने का महल बनवाया लेकिन ऐसा करते बनाते समय स्वयं उसके मन में लालच आ गया। जब शिवजी ने रावण के काम से खुश होकर उसे वरदान मांगने को कहा तो रावण ने वही सोने का महल महादेव से दान में मांग लिया। महादेव ने खुशी-खुशी सोने का महल रावण को दान कर दिया।

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किसने बनाई थी सोने की लंका?

वाल्मीकि रामायण के अनुसार प्राचीन समय में सुकेश नाम का एक दैत्य था। उसके तीन पुत्र थे, माली, सुमाली और माल्यवान। इन तीनों के कहने पर देवताओं के शिल्पी विश्वकर्मा ने सोने की लंका का निर्माण किया था। यहां राक्षसों का राज था। बाद में भगवान विष्णु के भय से राक्षस इस स्थान को छोड़कर अन्यत्र चले गए। बाद में विश्रवा ऋषि के पुत्र और रावण के बड़े भाई कुबेर की तपस्या करके ब्रह्माजी को प्रसन्न कर लिया। ब्रह्मदेव ने ही कुबेर को लंका का राज्य सौंपा था।

रावण को कैसे मिली सोने की लंका?

रावण के नाना माल्यवान ने राक्षसों को एकत्र कर फिर से सोने की लंका पर कब्जा करने की योजना बनाई। इस योजना के अतंर्गत रावण ने अपने सैनिकों सहित अपने बड़े भाई कुबेर पर हमला कर दिया। रावण के पराक्रम से भयभीत होकर कुबेरदेव को लंका छोड़नी पड़ी। इस तरह लंका पर एक बार फिर से राक्षसों का राज्य स्थापित हो गया। यानी सोने की लंका का महादेव की कथा से कोई भी संबंध नहीं है। ये सिर्फ एक मान्यता है जो सालों से चली आ रही है।


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