तमिलनाडु चुनाव 2026 में थलापति विजय की पार्टी TVK ने शानदार प्रदर्शन किया है। इसके साथ ही राज्य में DMK और AIADMK का पारंपरिक दबदबा टूटता दिख रहा है। युवा और शहरी वोटर्स के समर्थन से विजय मुख्यमंत्री पद के करीब पहुंचते नजर आ रहे हैं।
Tamilnadu Election Results 2026: तमिलनाडु विधानसभा चुनाव 2026 के नतीजों में ‘तमिलगा वेत्री कड़गम’ (TVK) के संस्थापक थलापति विजय ने अपनी पहली ही चुनावी पारी में इतिहास रच दिया है। फिल्मों के ‘कमांडर’ रहे विजय ने अपनी रणनीति से सभी को चौंका दिया है। चेन्नई की पेरम्बूर और तिरुचिरापल्ली (पूर्व) विधानसभा सीटों पर उन्होंने जबरदस्त बढ़त बना ली है, जो उनके बढ़ते राजनीतिक प्रभाव को दिखाता है।
पारंपरिक राजनीति में बदलाव: DMK-AIADMK का दबदबा टूटा
2026 का यह चुनाव तमिलनाडु की राजनीति में बड़ा बदलाव लेकर आया है। दशकों से राज्य में DMK और AIADMK के बीच सीधी टक्कर होती रही थी, लेकिन इस बार यह समीकरण टूटता नजर आ रहा है। सिनेमा से राजनीति में आए विजय और उनकी पार्टी TVK ने राजनीतिक परिदृश्य को पूरी तरह बदल दिया है। ऐसा लग रहा है कि अपनी पहली ही पारी में विजय मुख्यमंत्री पद तक पहुंच सकते हैं।
सीटों का गणित: TVK सबसे आगे
234 सदस्यीय विधानसभा में बहुमत के लिए 118 सीटों की जरूरत होती है। शुरुआती रुझानों में TVK करीब 109 सीटों पर आगे चल रही है। वहीं AIADMK+ गठबंधन लगभग 65 सीटों पर और DMK+ केवल 60 सीटों पर सिमटता दिख रहा है। इससे साफ है कि TVK ने पूरे चुनावी समीकरण को बदल दिया है।
DMK का कमजोर प्रदर्शन और एंटी-इनकंबेंसी
रुझानों में DMK का प्रदर्शन उम्मीद से कमजोर रहा है। मुख्यमंत्री एमके स्टालिन की पकड़ सत्ता पर ढीली पड़ती दिख रही है। पार्टी को एंटी-इनकंबेंसी और भ्रष्टाचार के आरोपों का सामना करना पड़ा। जनता बदलाव चाहती थी, जिसका असर वोटिंग पैटर्न में दिखा।
‘हिन्दी विरोध’ और ‘द्रविड़ पहचान’ की राजनीति
इस चुनाव में DMK ने अपने अभियान को ‘हिन्दी थोपने’ और ‘द्रविड़ पहचान’ जैसे मुद्दों पर केंद्रित किया। पार्टी ने केंद्र की तीन भाषा नीति का विरोध किया और यह संदेश देने की कोशिश की कि BJP का सत्ता में आना हिन्दी और हिन्दू एजेंडे को लागू करना होगा। हालांकि, इस बार यह रणनीति असरदार साबित नहीं हुई।
सनातन धर्म विवाद और राजनीतिक असर
DMK नेता उदयनिधि स्टालिन के 2023 में दिए गए बयान ने बड़ा विवाद खड़ा कर दिया था। उन्होंने सनातन धर्म को सामाजिक बुराइयों से जोड़ते हुए इसे खत्म करने की बात कही थी। इस बयान को लेकर कई मतदाताओं में नाराजगी देखी गई। खासकर हिन्दू मतदाताओं ने इसे नकारात्मक रूप में लिया।
हिन्दू वोटर और सांस्कृतिक मुद्दे
चुनाव नतीजों से संकेत मिलता है कि DMK की कथित ‘हिन्दू-विरोधी’ छवि ने पार्टी को नुकसान पहुंचाया। मंदिर प्रबंधन और धार्मिक मामलों में हस्तक्षेप के आरोप भी पार्टी के खिलाफ गए। इससे एक बड़ा वोट बैंक उनसे दूर होता नजर आया।
युवा और शहरी वोटर्स का रुझान
इस बार हाई वोटिंग परसेंटेज ने साफ किया कि युवा और शहरी मतदाता बदलाव चाहते थे। वे पारंपरिक द्रविड़ राजनीति से हटकर रोजगार, शिक्षा और बेहतर शासन जैसे मुद्दों पर वोट कर रहे थे। यही कारण रहा कि TVK को इन वर्गों का मजबूत समर्थन मिला।
TVK की रणनीति और विजय का संतुलित रुख
विजय और उनकी पार्टी TVK ने तमिल पहचान पर जोर दिया, लेकिन अतिवादी या विरोधी राजनीति से दूरी बनाए रखी। उन्होंने भ्रष्टाचार, बेरोजगारी और बदलाव को मुख्य मुद्दा बनाया, जिससे मध्य वर्ग और युवाओं का भरोसा जीता।
सिनेमा से सत्ता तक: विजय का अनोखा सफर
अगर विजय समर्थन जुटाकर सरकार बनाने में सफल होते हैं, तो यह तमिल सिनेमा से सीधे सत्ता तक का एक अनोखा उदाहरण होगा। उनकी यह जीत न सिर्फ राजनीतिक बदलाव का संकेत है, बल्कि यह भी दिखाती है कि नए चेहरे और नई सोच को जनता स्वीकार कर रही है।


