Nitish Kumar Rajya Sabha news: बिहार में नीतीश कुमार के राज्यसभा जाने की चर्चा तेज है। अगर ऐसा होता है तो राज्य का अगला मुख्यमंत्री कौन होगा? 16 मार्च को 37 सीटों पर चुनाव से पहले एनडीए और इंडिया ब्लॉक की रणनीति पर नजर।
बिहार की राजनीति में एक बार फिर हलचल तेज है। चर्चा है कि मुख्यमंत्री Nitish Kumar को राज्यसभा भेजा जा सकता है। हालांकि अभी तक कोई आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है, लेकिन सूत्रों के हवाले से चल रही खबरों ने सियासी गलियारों में सवाल खड़े कर दिए हैं, अगर नीतीश राज्यसभा जाते हैं तो बिहार का अगला मुख्यमंत्री कौन होगा?
गठबंधन की गणित क्या कहती है?
बिहार में इस वक्त एनडीए गठबंधन की सरकार है, जिसमें भाजपा सबसे बड़ी पार्टी है। ऐसे में अगर मुख्यमंत्री पद खाली होता है तो स्वाभाविक तौर पर भाजपा अपनी दावेदारी पेश कर सकती है। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि यह फैसला सिर्फ एक व्यक्ति का नहीं, बल्कि गठबंधन की रणनीति का हिस्सा होगा। आने वाले लोकसभा चुनाव और राज्यसभा की संख्या संतुलन को देखते हुए हर कदम बेहद सोच-समझकर उठाया जाएगा।
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पहले बेटे के नाम की चर्चा, फिर बदली दिशा
कुछ समय पहले तक यह चर्चा थी कि नीतीश कुमार के बेटे निशांत को राज्यसभा भेजा जा सकता है। लेकिन हाल के घटनाक्रम ने सियासी अटकलों को नया मोड़ दे दिया। जदयू के कार्यकारी अध्यक्ष संजय झा के दिल्ली से पटना रवाना होने और केंद्रीय मंत्री लल्लन सिंह से उनकी मुलाकात के बाद अटकलें और तेज हो गईं। राजनीतिक हलकों में इसे संभावित बड़े फैसले से जोड़कर देखा जा रहा है।
भाजपा ने जारी की उम्मीदवारों की सूची
इसी बीच, भाजपा ने मंगलवार को 9 राज्यसभा उम्मीदवारों के नाम घोषित किए, जिनमें बिहार से दो नाम शामिल हैं। पार्टी ने नितिन नवीन और शिवेश कुमार को उम्मीदवार बनाया है। शिवेश कुमार को पार्टी का मजबूत दलित चेहरा माना जाता है। वे 2024 में सासाराम लोकसभा सीट से चुनाव लड़ चुके हैं। उनके पिता मुनीलाल भी केंद्र सरकार में मंत्री रह चुके हैं। अन्य राज्यों में असम से तेराश गोवाला और जोगेन मोहन, छत्तीसगढ़ से लक्ष्मी वर्मा, हरियाणा से संजय भाटिया, ओडिशा से मनमोहन सामल और सुजीत कुमार, तथा पश्चिम बंगाल से राहुल सिन्हा को उम्मीदवार बनाया गया है।
16 मार्च को होगा चुनाव, 37 सीटों पर मुकाबला
10 राज्यों की 37 राज्यसभा सीटों के लिए मतदान 16 मार्च को होना है। इन 37 सीटों में से फिलहाल 25 सीटें इंडिया ब्लॉक के पास हैं, जबकि 12 सीटें एनडीए के खाते में हैं। ऐसे में यह चुनाव एनडीए के लिए अपनी संख्या बढ़ाने का मौका है। लेकिन चुनौती सिर्फ विपक्ष नहीं, बल्कि सहयोगी दलों के बीच तालमेल बनाए रखना भी है।
आगे क्या हो सकता है?
जानकारों की मानें तो, अगर नीतीश कुमार राज्यसभा जाते हैं तो बिहार में नेतृत्व परिवर्तन तय माना जाएगा। ऐसे में भाजपा और जदयू के बीच शक्ति संतुलन की नई तस्वीर सामने आ सकती है। हालांकि, जब तक आधिकारिक घोषणा नहीं होती, तब तक यह चर्चा सियासी अटकलों तक ही सीमित है। लेकिन इतना तय है कि बिहार की राजनीति में आने वाले दिन काफी दिलचस्प रहने वाले हैं।
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