Lazy Girl Jobs trend: एक नया वर्कप्लेस ट्रेंड 'लेज़ी गर्ल जॉब्स' वायरल हो रहा है। इसमें युवा पीढ़ी ऐसी नौकरियां चुन रही है, जहां काम का बोझ कम, फ्लेक्सिबिलिटी ज्यादा और वर्क-लाइफ बैलेंस अच्छा हो, बजाय पारंपरिक करियर के दबाव के।

पहले 'क्वाइट क्विटिंग' का ट्रेंड वायरल हुआ था, जिसने वर्कप्लेस में बाउंड्री सेट करने पर नई बहस छेड़ दी थी। अब एक नया इंटरनेट ट्रेंड 'लेज़ी गर्ल जॉब्स' Gen Z यानी युवा प्रोफेशनल्स के बीच तेजी से पॉपुलर हो रहा है। इसका मतलब ऐसी नौकरियों से है, जिनमें स्ट्रेस बहुत कम हो, लेकिन सैलरी अच्छी-खासी मिले, काम के घंटे फ्लेक्सिबल हों और पर्सनल लाइफ के लिए भी पूरा टाइम मिले। दिन-रात काम करने वाले 'हसल कल्चर' को छोड़कर, कई युवा अब ऐसी नौकरियां ढूंढ रहे हैं, जो उन्हें बिना थके आराम से कमाई करने का मौका दें।

'लेज़ी गर्ल जॉब्स' ऐसी नौकरियां हैं, जहां कर्मचारी एक तरह से 'क्वाइट क्विटिंग' कर सकते हैं। मतलब, वे अपना काम पूरा तो करते हैं, लेकिन बहुत ज्यादा वर्कलोड या बाउंड्री बनाने पर किसी बुरे नतीजे का डर नहीं होता। मार्केटिंग एसोसिएट, अकाउंट मैनेजर और कस्टमर सक्सेस मैनेजर जैसी भूमिकाएं अक्सर इस ट्रेंड से जोड़ी जाती हैं।

एक्सपर्ट्स का मानना है कि यह आइडिया वायरल चर्चाओं से और भी ज्यादा फैला है, जहां युवा कर्मचारी खुलकर करियर सलाह और वर्कप्लेस के अनुभव शेयर करते हैं। फिर भी, इसकी अपील असली है। रिमोट वर्क और फ्लेक्सिबल शेड्यूल के इस दौर में, कई प्रोफेशनल्स ऐसी नौकरियां खोज रहे हैं जो प्रोडक्टिविटी के साथ-साथ पर्सनल लाइफ को भी सपोर्ट करें।

क्या बर्नआउट है इस बदलाव की वजह?

वर्कप्लेस पर हुई रिसर्च बताती है कि बर्नआउट (काम का अत्यधिक तनाव) युवाओं के नजरिए को बदलने में एक बड़ा फैक्टर है। गैलप की 'स्टेट ऑफ द ग्लोबल वर्कप्लेस' रिपोर्ट के मुताबिक, 76% कर्मचारी कभी-न-कभी काम पर बर्नआउट महसूस करते हैं, जबकि करीब 28% का कहना है कि वे बहुत बार या हमेशा बर्नआउट महसूस करते हैं।

बर्नआउट के असली नतीजे होते हैं। गैलप के रिसर्चर्स का कहना है कि जो कर्मचारी अक्सर बर्नआउट का शिकार होते हैं, वे 63% ज्यादा बीमार होने की छुट्टी लेते हैं और दूसरी नौकरी खोजने की संभावना भी उनमें काफी ज्यादा होती है।

गैलप के 2025 के वर्कप्लेस डेटा के अनुसार, दुनिया भर में केवल 33% कर्मचारी ही कहते हैं कि वे अपनी जिंदगी में खुश हैं। यह डेटा कर्मचारियों की भलाई को लेकर बढ़ती चिंताओं को दिखाता है। ये दबाव कई प्रोफेशनल्स, खासकर युवाओं को, पारंपरिक 'हमेशा ऑन' रहने वाले वर्कप्लेस कल्चर पर फिर से सोचने के लिए मजबूर कर रहे हैं।

इस ट्रेंड के सपोर्टर्स का कहना है कि इसका मतलब आलस नहीं, बल्कि एक सस्टेनेबल करियर बनाना है। कई महिलाएं इन नौकरियों को सुरक्षित, अच्छी सैलरी वाली रिमोट जॉब्स के मौके के तौर पर देखती हैं। ये नौकरियां उन्हें फाइनेंशियल आजादी देती हैं और साथ ही क्रिएटिविटी, सेल्फ-डेवलपमेंट और पर्सनल लाइफ के लिए भी जगह छोड़ती हैं।

इन नौकरियों में मिलने वाली फ्लेक्सिबिलिटी अक्सर करियर ग्रोथ और पारिवारिक जिम्मेदारियों के बीच एक प्रैक्टिकल रास्ता बनाती है। साथ ही, यह सेल्फ-केयर के लिए भी समय देती है - जिसकी कमी कई कर्मचारियों को पारंपरिक हाई-प्रेशर वाली नौकरियों में महसूस होती थी।

यह ट्रेंड सोशल मीडिया पर आग की तरह फैल गया है, जहां #LazyGirlJobs हैशटैग लगातार जोर पकड़ रहा है। इस टैग के तहत की गई पोस्ट में लोग अपने परिवार के साथ ज्यादा समय बिताने, मेंटल हेल्थ को बनाए रखने और फिर भी एक स्थिर प्रोफेशनल लाइफ बनाने की खुशी मना रहे हैं।