Who was Mukhtar Ansari’s shooter Shoaib Bobby: बाराबंकी में मुख्तार अंसारी के कथित शूटर शोएब बॉबी की दिनदहाड़े 15 गोलियां मारकर हत्या। जेलर हत्याकांड का आरोपी रहा बॉबी, पुलिस गैंगवार और पुरानी रंजिश के एंगल से जांच में जुटी।

बाराबंकी की एक दोपहर अचानक गोलियों की आवाज से कांप उठी। भीड़भाड़ वाले इलाके में अज्ञात हमलावरों ने शोएब उर्फ बॉबी पर ताबड़तोड़ फायरिंग की। पुलिस के अनुसार करीब 15 राउंड गोलियां चलाई गईं। घायल अवस्था में अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया। यह सिर्फ एक आपराधिक वारदात नहीं, बल्कि उस नेटवर्क की कहानी का नया अध्याय है, जो वर्षों से उत्तर प्रदेश की अपराध राजनीति में चर्चा का केंद्र रहा है।

अपराध जगत में पहचान: कैसे बना ‘शार्पशूटर’?

शोएब उर्फ बॉबी को पूर्व बाहुबली नेता मुख्तार अंसारी के गिरोह से जुड़ा माना जाता था। पुलिस रिकॉर्ड के मुताबिक उसका नाम हत्या, रंगदारी और गैंग से जुड़े मामलों में सामने आ चुका था। लखनऊ के चर्चित जेलर हत्याकांड में आरोपी के रूप में नाम आने के बाद उसकी पहचान प्रदेश स्तर पर हुई। जांच एजेंसियों के अनुसार वह लंबे समय तक जेल में रहा और बाद में जमानत पर बाहर आया था। स्थानीय सूत्र उसे गैंग का सक्रिय सदस्य बताते रहे हैं।

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घात लगाकर हमला: वारदात की पूरी टाइमलाइन

प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि हमलावर पहले से इलाके में मौजूद थे। जैसे ही शोएब वहां पहुंचा, उसे चारों तरफ से घेर लिया गया। प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक फायरिंग बेहद करीब से की गई। वारदात के बाद हमलावर बाइक से फरार हो गए। पुलिस आसपास के सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगाल रही है और संभावित रूट पर जांच तेज कर दी गई है। घटनास्थल से जुटाए गए साक्ष्य फॉरेंसिक जांच के लिए भेजे गए हैं।

मुख्तार के बाद बदले समीकरण?

गौरतलब है कि मुख्तार अंसारी के खिलाफ हत्या, अपहरण और रंगदारी सहित कई संगीन मुकदमे दर्ज थे। 2005 में कृष्णानंद राय हत्याकांड के बाद उन्हें जेल भेजा गया था। 28 मार्च 2024 को बांदा जेल में उनकी मौत हार्ट अटैक से हुई थी। विशेषज्ञों का मानना है कि किसी बड़े गिरोह के प्रमुख चेहरे के हटने के बाद अक्सर आंतरिक शक्ति संतुलन बदलता है। ऐसे में वर्चस्व की लड़ाई या पुराने विवाद उभरकर सामने आ सकते हैं। पुलिस इसी एंगल से भी जांच कर रही है।

गैंगवार, रंजिश या सुनियोजित साजिश?

जांच एजेंसियां फिलहाल तीन प्रमुख बिंदुओं पर काम कर रही हैं:

  • क्या यह गैंगवार का परिणाम है?
  • क्या किसी पुरानी रंजिश ने इस हत्या को जन्म दिया?
  • या फिर यह किसी बड़े आपराधिक समीकरण का हिस्सा है?

तकनीकी सर्विलांस, कॉल डिटेल रिकॉर्ड और स्थानीय इनपुट के आधार पर पुलिस हमलावरों की पहचान में जुटी है।

कानून-व्यवस्था पर फिर सवाल

दिनदहाड़े हुई इस घटना ने एक बार फिर सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं। भीड़भाड़ वाले इलाके में इस तरह की वारदात आम नागरिकों में असुरक्षा की भावना बढ़ाती है। फिलहाल पुलिस की प्राथमिकता आरोपियों की गिरफ्तारी और घटना के पीछे की सच्चाई सामने लाना है। आने वाले दिनों में जांच की दिशा यह तय करेगी कि यह महज एक व्यक्तिगत टकराव था या संगठित अपराध की नई पटकथा।

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