अल जज़ीरा की एक रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिका ने 21वीं सदी में 10 देशों पर हमला करने के लिए 8 ट्रिलियन डॉलर खर्च किए। इन सैन्य कार्रवाइयों की वजह से सीधे और परोक्ष रूप से करीब 47 लाख लोगों की मौत हुई और लाखों लोग शरणार्थी बन गए।
न्यूयॉर्क: सोवियत संघ के टूटने के बाद 21वीं सदी शुरू हुई। इन 25 सालों में अमेरिका ने 10 देशों पर हमला करने के लिए खरबों डॉलर पानी की तरह बहा दिए। अंतरराष्ट्रीय मीडिया अल जज़ीरा ने एक लंबी लिस्ट जारी की है, जिसमें 2001 से लेकर 2026 में ईरान पर हुए हमले तक का ज़िक्र है। रिपोर्ट बताती है कि ये हमले चार अलग-अलग अमेरिकी राष्ट्रपतियों के कार्यकाल में हुए।
अमेरिका ने जिन देशों को निशाना बनाया, उनमें अफगानिस्तान, इराक, यमन, पाकिस्तान, सोमालिया, लीबिया, सीरिया, वेनेजुएला, नाइजीरिया और ईरान शामिल हैं। इनमें ड्रोन हमलों से लेकर बड़ी सैन्य चढ़ाई तक शामिल थी। ब्राउन यूनिवर्सिटी के 'वॉटसन इंस्टीट्यूट' की एक स्टडी के मुताबिक, इन लड़ाइयों में सीधे हमलों में 9,40,000 लोग मारे गए। लेकिन अगर हमलों के बाद फैली भुखमरी, बीमारी और इलाज न मिलने से हुई मौतों को भी जोड़ लें, तो यह आंकड़ा 45 लाख से 47 लाख के बीच पहुंच जाता है।
इन लड़ाइयों पर अमेरिका ने पिछले 25 सालों में करीब 5.8 ट्रिलियन डॉलर खर्च किए। इसके अलावा, इन युद्धों में शामिल सैनिकों के इलाज और दूसरी सुविधाओं पर 2.2 ट्रिलियन डॉलर और खर्च होने का अनुमान है। यानी कुल खर्च 8 ट्रिलियन डॉलर बैठेगा। यह रिपोर्ट ऐसे समय में आई है जब 2026 की शुरुआत में ईरान पर अमेरिका और इज़राइल के साझा हमलों ने पश्चिम एशिया में एक बड़े युद्ध का खतरा फिर से बढ़ा दिया है। रिपोर्ट के मुताबिक, आतंकवाद को खत्म करने के नाम पर की गई इन अमेरिकी कार्रवाइयों ने कई देशों में गंभीर राजनीतिक अस्थिरता पैदा कर दी, जिससे लाखों लोग अपने ही देश में शरणार्थी बनने को मजबूर हो गए।


