अमेरिका-इज़राइल 60 दिनों से ईरान के खिलाफ 'ऑपरेशन एपिक फ्यूरी' चला रहे हैं। पेंटागन का लक्ष्य ईरान की परमाणु क्षमता खत्म करना है, जिस पर अब तक 25 अरब डॉलर खर्च हो चुके हैं। अमेरिका में इस युद्ध का विरोध हो रहा है।
तेहरान: पश्चिम एशिया को एक बड़े युद्ध में धकेलने वाली सैन्य कार्रवाई 60वें दिन में पहुंच गई है। यह कार्रवाई अमेरिका और इज़राइल मिलकर ईरान के खिलाफ कर रहे हैं। 28 फरवरी की सुबह 'ऑपरेशन एपिक फ्यूरी' के नाम से शुरू हुए इस हमले ने देश के अंदर भी एक बड़ा संकट खड़ा कर दिया है।
पेंटागन चीफ पीट हेगसेथ ने अमेरिकी संसद की एक समिति को बताया कि उनका मकसद ईरान की परमाणु क्षमता को खत्म करना है। रक्षा सचिव पीट हेगसेथ ने यह भी दावा किया कि इस हमले ने ईरान को बहुत कमजोर कर दिया है। पेंटागन ने खुलासा किया कि अमेरिका ने ईरान के साथ इस जंग पर अब तक 25 अरब डॉलर (लगभग 2।08 लाख करोड़ रुपये) खर्च कर दिए हैं।
बुधवार को हाउस आर्म्ड सर्विसेज कमेटी की बैठक में पीट हेगसेथ ने युद्ध में हुए खर्च के पहले आधिकारिक आंकड़े जारी किए। उन्होंने कहा, "ईरान को परमाणु हथियार बनाने से रोकने के लिए अमेरिका कोई भी कीमत चुकाने को तैयार है।" हेगसेथ ने यह भी कहा कि होर्मुज की नौसैनिक घेराबंदी जारी रहेगी, लेकिन उन्होंने यह साफ नहीं किया कि यह जंग कब खत्म होगी।
इस पर ईरान ने जवाब दिया है कि उसके तेल के कुओं को कुछ नहीं हुआ है और अगर अमेरिका चाहे तो वह इसका लाइव-स्ट्रीमिंग करके दिखा सकता है। वहीं, अमेरिका में डेमोक्रेटिक पार्टी के नेता इस जंग का कड़ा विरोध कर रहे हैं। उनका कहना है कि युद्ध के इस आर्थिक बोझ का असर आम लोगों की रोजमर्रा की जिंदगी पर पड़ रहा है।
