Bahraich Pregnant Woman Incident: बहराइच में प्रसव पीड़ा से तड़प रही गर्भवती महिला ने खुद को चाकू से घायल कर लिया। गंभीर हालत में पहले सीएचसी, फिर जिला अस्पताल और लखनऊ ट्रॉमा सेंटर रेफर किया गया। सुनिए महिला ने होश में आकर क्या कहा…

उत्तर प्रदेश के बहराइच जिले से एक ऐसी घटना सामने आई है, जिसने पूरे इलाके को स्तब्ध कर दिया। प्रसव पीड़ा से तड़प रही एक गर्भवती महिला ने कथित तौर पर असहनीय दर्द के बीच खुद को चाकू से घायल कर लिया। गंभीर रूप से जख्मी हालत में उसे पहले सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र और फिर जिला अस्पताल ले जाया गया, जहां से उसे लखनऊ ट्रॉमा सेंटर रेफर कर दिया गया। महिला ने एक बच्ची को जन्म दिया है, लेकिन उसकी स्थिति नाजुक बनी हुई है।

बौंडी थाना क्षेत्र के नंदवल गांव की घटना

मामला बौंडी थाना क्षेत्र के नंदवल गांव का है। 38 वर्षीय ननकई अपने चार बेटों-निवास (16), दीवान (12), रवि (8) और रोहन (5) के साथ रहती है। करीब छह महीने पहले उसके पति की बीमारी से मौत हो चुकी है। परिवार की जिम्मेदारी और गर्भावस्था के अंतिम चरण के बीच गुरुवार दोपहर करीब डेढ़ बजे उसे अचानक प्रसव पीड़ा शुरू हुई। उस समय घर पर कोई मौजूद नहीं था। बच्चे गांव में खेलने गए थे।

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असहनीय दर्द और आत्म-क्षति की कोशिश

स्थानीय लोगों के अनुसार, दर्द बढ़ने पर महिला ने घर में रखा चाकू उठाया और खुद को गंभीर रूप से घायल कर लिया। चीख-पुकार सुनकर पड़ोसी मौके पर पहुंचे तो वह खून से लथपथ हालत में मिली। घटना की पुष्टि करते हुए जिला अस्पताल के सीएमएस एन.एन. त्रिपाठी ने बताया कि महिला के पेट पर गहरा घाव था और उसकी आंतें बाहर आ गई थीं। उसे दोपहर 3:20 बजे जिला अस्पताल की इमरजेंसी में लाया गया।

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पहले सीएचसी, फिर जिला अस्पताल और लखनऊ रेफर

पड़ोसियों ने एंबुलेंस की मदद से महिला को सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पहुंचाया, जहां डॉक्टरों ने तत्काल प्रसव कराया। उसने एक बच्ची को जन्म दिया।हालांकि, पेट पर लगे गंभीर घाव का समुचित उपचार वहां संभव नहीं था। प्राथमिक उपचार के बाद उसे जिला अस्पताल भेजा गया। हालत में सुधार न होने पर डॉक्टरों ने उसे लखनऊ ट्रॉमा सेंटर रेफर कर दिया। एंबुलेंस से उसकी मां नीता भी साथ गईं।

महिला का बयान और चिकित्सकीय दृष्टिकोण

परिजनों के मुताबिक, होश में आने पर महिला ने बताया कि दर्द इतना तीव्र था कि वह सहन नहीं कर पा रही थी। डॉक्टरों का कहना है कि प्रसव के दौरान अत्यधिक दर्द सामान्य है, लेकिन ऐसी स्थिति में तत्काल चिकित्सकीय सहायता आवश्यक होती है। चिकित्सकीय विशेषज्ञों के अनुसार, गर्भवती महिलाओं को प्रसव से पहले नियमित जांच और संस्थागत डिलीवरी की सलाह दी जाती है, ताकि आपात स्थिति में तुरंत इलाज मिल सके।

सामाजिक और स्वास्थ्य तंत्र पर सवाल

यह घटना ग्रामीण क्षेत्रों में मातृ स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच और जागरूकता पर भी प्रश्न खड़े करती है। विशेषज्ञों का मानना है कि समय पर एंबुलेंस सुविधा और सामुदायिक स्वास्थ्य कर्मियों की सक्रियता कई गंभीर स्थितियों को टाल सकती है। फिलहाल महिला का इलाज लखनऊ में जारी है। नवजात बच्ची स्वस्थ बताई जा रही है, जबकि मां की हालत गंभीर बनी हुई है। प्रशासनिक स्तर पर भी मामले को गंभीरता से लिया गया है।

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