यूपी में एक रिटायर्ड सरकारी कर्मचारी को सरकारी कागजों में मुर्दा बता दिया गया। खुद को जिंदा साबित करने के लिए उन्होंने अनोखा विरोध प्रदर्शन किया। वह जिला मजिस्ट्रेट के ऑफिस के बाहर 'लाश' बनकर लेट गए।
बस्ती (UP). सरकारी कागजों में एक शख्स को मरा हुआ बता दिया गया। अब खुद को जिंदा साबित करने के लिए उसे अपनी ही 'लाश' बनना पड़ा। इस अनोखे विरोध प्रदर्शन का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया है। ये हैरान करने वाला मामला उत्तर प्रदेश के बस्ती जिले का है। यहां जिला मजिस्ट्रेट के ऑफिस के बाहर एक बुजुर्ग सफेद कफन और माला पहनकर लाश की तरह लेट गए। फिर अचानक उठकर एक पोस्टर दिखाया, जिस पर लिखा था- 'साहब, मैं जिंदा हूं'। इस अनोखे तरीके से प्रदर्शन करने वाले शख्स का नाम इशाक अली है, जो एक रिटायर्ड सरकारी कर्मचारी हैं।
इशाक अली का आरोप है कि उन्हें 2012 में ही राजस्व रिकॉर्ड में मृत घोषित कर दिया गया था, जबकि वो उस वक्त नौकरी में थे। हैरानी की बात ये है कि इसके बाद भी उन्होंने सात साल तक नौकरी की और 2019 में रिटायर हुए। पिछले एक दशक से भी ज्यादा समय से वह खुद को जिंदा साबित करने के लिए दफ्तरों के चक्कर काट रहे हैं, लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई। इशाक अली ने राजस्व निरीक्षक (Revenue Inspector) ललित कुमार मिश्रा पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उनका कहना है कि उन्हें कागजों में मृत घोषित करने के पीछे एक बड़ी साजिश है।
कागजों में 'मरने' के बाद उनकी पुश्तैनी जमीन एक महिला के नाम पर ट्रांसफर कर दी गई। उनका कहना है कि उनकी संपत्ति हड़पने के लिए अधिकारियों ने ये फर्जीवाड़ा किया। उन्होंने कई बार अधिकारियों से गुहार लगाई, लेकिन कोई नतीजा नहीं निकला। आखिरकार, उन्होंने यह अनोखा तरीका अपनाया। जब सफेद चादर ओढ़े इशाक अली अचानक उठ बैठे, तो आसपास के लोग पहले तो चौंक गए। बाद में जब उन्हें पूरा मामला समझ आया, तो यह प्रदर्शन सुर्खियों में आ गया। अधिकारियों ने अब इस मामले में जांच कर कार्रवाई का आश्वासन दिया है।
