कौन हैं भारत की मिसाइल वुमन? टेसी थॉमस और अग्नि-IV मिसाइल की लीडर बनने तक के सफर
Who is India’s Missile Woman? भारत की मिसाइल वुमन टेसी थॉमस का सफ़र कैसे बनी अग्नि-IV मिसाइल की लीडर? बचपन की जिज्ञासा, DRDO का करियर और अग्नि प्रोजेक्ट की प्रेरक कहानी जानिए।

Missile Woman India: केरल के शांत तट पर एक छोटी लड़की अक्सर रॉकेट लॉन्च होते देखती। हर लॉन्च की आवाज़ और धुएँ की लकीरें उसके मन में सवाल और उत्सुकता जगातीं। यही जिज्ञासा उसे विज्ञान और तकनीक की ओर खींचने लगी। अलाप्पुझा में जन्मीं टेसी के पिता छोटे व्यवसायी थे और परिवार में पढ़ाई को बहुत महत्व दिया जाता था। घर के पास स्थित थुम्बा इक्वेटोरियल रॉकेट लॉन्चिंग स्टेशन (TERLS) ने उनकी रुचि को और बढ़ाया। क्या आप जानते हैं कि भारत की ‘मिसाइल वुमन’ टेसी थॉमस कैसे बनीं? केरल की एक जिज्ञासु बच्ची से लेकर DRDO में अग्नि-IV मिसाइल प्रोजेक्ट की लीडर बनने तक उनका सफ़र बेहद प्रेरणादायक है।
कैसे टेसी थॉमस ने विज्ञान और मिसाइल टेक्नोलॉजी में कदम रखा?
टेसी का जन्म अप्रैल 1963 में हुआ। उनके पिता का स्वास्थ्य बिगड़ने के बाद, माँ ने परिवार की जिम्मेदारी संभाली। इन परिस्थितियों ने टेसी को मेहनत और लगन सिखाई। स्कूल में गणित और भौतिकी में रुचि ने उन्हें इंजीनियरिंग की ओर प्रेरित किया। उन्होंने गवर्नमेंट इंजीनियरिंग कॉलेज, त्रिशूर में इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग की पढ़ाई शुरू की। वहीं से उनकी दिलचस्पी मिसाइल सिस्टम और डिफेंस टेक्नोलॉजी में बढ़ी।
शिक्षा और शुरुआती चुनौतियां
जब टेसी छोटी थीं, उनके पिता को स्ट्रोक आया और परिवार को कठिनाइयों का सामना करना पड़ा। उनकी माँ ने परिवार संभाला और टेसी ने कठिन परिस्थितियों में भी पढ़ाई जारी रखी। गणित और भौतिकी में उनकी रुचि स्कूल से ही दिखने लगी। टेसी ने गवर्नमेंट इंजीनियरिंग कॉलेज, त्रिशूर में इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग की पढ़ाई की। कॉलेज के दौरान उन्होंने मिसाइल प्रणालियों और रक्षा प्रौद्योगिकी में गहरी दिलचस्पी विकसित की।
टेसी थॉमस का DRDO में सफर
इंजीनियरिंग पूरी करने के बाद, टेसी ने डिफेंस इंस्टीट्यूट ऑफ़ आर्मामेंट टेक्नोलॉजी में गाइडेंस और कंट्रोल सिस्टम की पढ़ाई की। 1988 में उन्होंने DRDO में काम करना शुरू किया। यहाँ उन्होंने एपीजे अब्दुल कलाम के मार्गदर्शन में मिसाइल प्रोजेक्ट्स में योगदान दिया।
अग्नि-IV मिसाइल प्रोग्राम: भारत की रणनीति में टेसी का योगदान
टेसी थॉमस ने गाइडेंस सिस्टम, नेविगेशन टेक्नोलॉजी और फ्लाइट कंट्रोल पर काम किया। धीरे-धीरे उन्हें टीम में बड़े प्रोजेक्ट की जिम्मेदारी मिली। 2011 में अग्नि-IV मिसाइल का सफल परीक्षण हुआ, जिसकी रेंज 4,000 किलोमीटर से अधिक है। इस सफलता ने भारत की रक्षा क्षमता को मजबूती दी।
क्या टेसी थॉमस ने व्यक्तिगत जीवन और करियर दोनों में संतुलन बनाया?
टेसी ने नौसेना अधिकारी सरोज कुमार से शादी की और उनका एक बेटा है। उन्होंने अपने परिवार और करियर को संतुलित तरीके से संभाला। DRDO में डायरेक्टर जनरल एयरोनॉटिकल सिस्टम्स बनने के बाद, उन्होंने विज्ञान और रक्षा अनुसंधान में महिलाओं के लिए नई राह खोली।
टेसी थॉमस की उपलब्धियां और मान्यता
बाद में टेसी DRDO में एयरोनॉटिकल सिस्टम्स की डायरेक्टर जनरल बनीं। उन्हें लाल बहादुर शास्त्री राष्ट्रीय पुरस्कार समेत कई सम्मान मिले। उनके प्रयास ने महिलाओं के लिए विज्ञान और रक्षा के क्षेत्र में नई राह खोली।
क्यों टेसी थॉमस की कहानी युवा लड़कियों के लिए प्रेरणादायक है?
टेसी ने दिखाया कि जिज्ञासा, मेहनत और शिक्षा किसी भी लड़की को उच्चतम स्तर तक पहुंचा सकती है। आज वह नई पीढ़ी की लड़कियों को विज्ञान में करियर बनाने और बड़े सपने देखने के लिए प्रेरित करती हैं। टेसी थॉमस का सफर यह सवाल उठाता है: क्या केवल जिज्ञासा और लगन से कोई लड़की भारत की मिसाइल कार्यक्रम की स्टार बन सकती है? जवाब है हाँ, टेसी थॉमस की कहानी इसके लिए सबसे बड़ा सबूत है।
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