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Supreme Court Divorce: 80 केस, 5 करोड़ और 3BHK फ्लैट-कैसे खत्म हुई 10 साल की ‘महाभारत’?

सुप्रीम कोर्ट ने 10 साल पुराने तलाक विवाद को खत्म करते हुए 5 करोड़ रुपये सेटलमेंट का आदेश दिया। 80 केस और 3BHK फ्लैट विवाद को कोर्ट ने “महाभारत जैसी लड़ाई” बताया। कोर्ट ने इस रिश्ते को खत्म तो कर दिया, लेकिन क्या ये न्याय है या समझौते की मजबूरी?

4 Min read
Author : Surya Prakash Tripathi
Published : Apr 09 2026, 12:37 PM IST
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Image Credit : ChatGPT

Supreme Court Divorce Case India: कभी प्यार से शुरू हुई शादी जब कोर्ट-कचहरी की जंग बन जाए, तो उसका अंजाम कितना जटिल हो सकता है-इसका ताज़ा उदाहरण सामने आया है। 10 साल से चल रहे एक हाई-प्रोफाइल तलाक विवाद में आखिरकार सुप्रीम कोर्ट को दखल देना पड़ा। मामला इतना उलझ गया था कि इसे खुद अदालत ने “महाभारत जैसी लड़ाई” कहा। 80 से ज्यादा केस, करोड़ों रुपये का विवाद और बच्चों की कस्टडी-इन सबके बीच कोर्ट ने एक ऐसा फैसला दिया जिसने इस लंबे विवाद पर हमेशा के लिए विराम लगा दिया।

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शादी से शुरू हुई कहानी कैसे बनी कानूनी जंग?

इस जोड़े की शादी साल 2010 में हुई थी। शुरुआती कुछ साल ठीक रहे और उनके दो बेटे भी हुए। लेकिन धीरे-धीरे रिश्ते में तनाव बढ़ता गया। बात इतनी बिगड़ गई कि 2016 में दोनों अलग हो गए। इसके बाद शुरू हुआ एक लंबा कानूनी संघर्ष, जो करीब एक दशक तक चलता रहा। अलग होने के बाद दोनों के बीच भरोसा पूरी तरह खत्म हो गया और मामला सिर्फ तलाक तक सीमित नहीं रहा, बल्कि आरोप-प्रत्यारोप, केस और जवाबी केस की श्रृंखला शुरू हो गई।

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Image Credit : Getty

80 केस और ‘लीगल बैटल’: मामला इतना क्यों उलझा?

इस पूरे विवाद की सबसे चौंकाने वाली बात यह थी कि पति ने पत्नी, उसके परिवार और यहां तक कि उसके वकीलों के खिलाफ भी 80 से ज्यादा केस दर्ज कर दिए। कोर्ट ने इस पर कड़ी टिप्पणी करते हुए कहा कि ये केस ज्यादातर “परेशान करने और बदले की भावना” से प्रेरित लगते हैं। इससे साफ था कि मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि व्यक्तिगत दुश्मनी का रूप ले चुका था। यही वजह रही कि कोर्ट को हस्तक्षेप करना पड़ा, क्योंकि सामान्य प्रक्रिया से इस विवाद का अंत संभव नहीं लग रहा था।

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Image Credit : Getty

पत्नी के आरोप: भरण-पोषण से बचने की कोशिश?

पत्नी का कहना था कि पति ने अपनी जिम्मेदारियों से पूरी तरह किनारा कर लिया। उसने बच्चों और पत्नी के खर्च के लिए पर्याप्त सहायता नहीं दी और कोर्ट के आदेशों का भी पालन नहीं किया। कोर्ट ने भी पाया कि पति कई कंपनियों में डायरेक्टर था, लेकिन उसने अपनी आर्थिक जिम्मेदारियों से बचने के लिए उन पदों से इस्तीफा दे दिया। अदालत ने इसे एक “चाल” के रूप में देखा। पत्नी इस दौरान खुद काम करके अपना और बच्चों का गुजारा कर रही थी, लेकिन बच्चों की पढ़ाई और भविष्य को देखते हुए उसे स्थिर आर्थिक सहायता की जरूरत थी।

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Image Credit : Getty

पति का पक्ष: झूठे केस और मानसिक प्रताड़ना का दावा

दूसरी तरफ, पति ने भी खुद को पीड़ित बताया। उसने कहा कि पत्नी ने उसके खिलाफ घरेलू हिंसा और अन्य आपराधिक केस दर्ज कराए, जिसके कारण उसे जेल भी जाना पड़ा। उसका दावा था कि इन मामलों ने उसकी छवि और करियर को नुकसान पहुंचाया। साथ ही उसने यह भी आरोप लगाया कि पत्नी ने बच्चों को उससे दूर कर दिया। पति ने यह भी कहा कि वह पहले ही लाखों रुपये दे चुका है और आर्थिक रूप से इतना सक्षम नहीं है कि भारी-भरकम गुजारा-भत्ता दे सके।

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Image Credit : X

सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला: 5 करोड़ और तलाक

मामले की गंभीरता को देखते हुए सुप्रीम कोर्ट ने संविधान के अनुच्छेद 142 का इस्तेमाल किया, जो “पूर्ण न्याय” सुनिश्चित करने के लिए विशेष शक्ति देता है। कोर्ट ने साफ कहा कि यह शादी अब “व्यावहारिक रूप से खत्म हो चुकी है” और इसे जारी रखना संभव नहीं है। सुप्रीम कोर्ट के मुख्य आदेश में कहा गया है-

  • पति को एक साल के अंदर पत्नी को 5 करोड़ रुपये देने होंगे।
  • दोनों बच्चों की कस्टडी पत्नी के पास रहेगी।
  • पति को बच्चों से मिलने का अधिकार मिलेगा।
  • दोनों पक्षों के बीच चल रहे सभी केस खत्म माने जाएंगे।

यह फैसला इसलिए भी खास है क्योंकि इससे एक ही आदेश में दर्जनों मुकदमों का अंत हो गया।

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Image Credit : Getty

3BHK फ्लैट और अंतिम शर्त: समझौते की पूरी कहानी

इस केस में एक अहम मुद्दा मुंबई का 3BHK फ्लैट भी था, जिसमें पत्नी रह रही थी। यह फ्लैट पति के पिता का था और पति चाहता था कि पत्नी इसे खाली करे। कोर्ट ने संतुलन बनाते हुए आदेश दिया कि पत्नी को 5 करोड़ रुपये मिलने के दो हफ्ते के अंदर फ्लैट खाली करना होगा। पति भविष्य में पत्नी या उसके परिवार के खिलाफ कोई नया केस दर्ज नहीं करेगा। इस तरह कोर्ट ने दोनों पक्षों को साफ और अंतिम शर्तों के साथ अलग कर दिया।

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Image Credit : Getty

क्यों खास है यह फैसला?

यह मामला सिर्फ एक तलाक नहीं, बल्कि भारतीय न्याय व्यवस्था में एक मिसाल बन गया है। यह दिखाता है कि जब केस जरूरत से ज्यादा लंबा और जटिल हो जाए, तो सुप्रीम कोर्ट सीधे हस्तक्षेप कर सकता है। अनुच्छेद 142 का इस्तेमाल कर “पूर्ण न्याय” सुनिश्चित किया जा सकता है। और सबसे महत्वपूर्ण-कानूनी लड़ाई को हथियार बनाकर किसी को परेशान करना अंततः उल्टा पड़ सकता है। आखिरकार, 10 साल तक चली यह “महाभारत” खत्म हुई।

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About the Author

SP
Surya Prakash Tripathi
सूर्य प्रकाश त्रिपाठी। 20 जुलाई 2003 से पत्रकारिता के क्षेत्र में कार्यरत। कुल 22 साल का अनुभव। 19 फरवरी 2024 से एशियानेट न्यूज हिंदी के साथ जुड़े हुए हैं। पत्रकारिता में परास्नातक की डिग्री के साथ इन्होंने डबल MA LLB भी किया हुआ है। इन्होंने क्राइम, धर्म और राजनीति के साथ सामाजिक मुद्दों पर लिखने की रुचि है। हिंदी दैनिक आज, डेली न्यूज एक्टिविस्ट, अमर उजाला, दैनिक भास्कर डिजिटल (DB DIGITAL) जैसे मीडिया संस्थानों में भी सूर्या सेवाएं दे चुके हैं।
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