मध्य पूर्व तनाव के कारण श्रीलंका में ऊर्जा संकट गहरा गया है। 1 अप्रैल से बिजली की दरें 8.5% बढ़ेंगी। ऊर्जा बचाने के लिए AC, स्ट्रीट लाइट और होर्डिंग्स बंद करने जैसे कड़े कदम उठाए गए हैं। पर्यटन में भी 18% की गिरावट आई है।

कोलंबो: मिडिल ईस्ट में चल रहे तनाव का असर अब श्रीलंका के एनर्जी सेक्टर पर दिखने लगा है। संकट के बीच श्रीलंका ने बिजली की दरें बढ़ाने का फैसला किया है। बिजली अधिकारियों ने बताया कि नई कीमतें 1 अप्रैल से लागू होंगी। श्रीलंका के पब्लिक यूटिलिटीज कमीशन (PUCSL) के चेयरमैन केपीएल चंद्रलाल ने सोमवार को बताया कि सरकारी बिजली कंपनी सीलोन इलेक्ट्रिसिटी बोर्ड (CEB) ने खपत के आधार पर 13.5% से ज्यादा की बढ़ोतरी की मांग की थी। हालांकि, चंद्रलाल ने कहा कि मौजूदा हालात को देखते हुए सिर्फ 8.5% की बढ़ोतरी की जाएगी।

ऊर्जा संकट को देखते हुए अधिकारियों ने कई और निर्देश भी जारी किए हैं। सरकारी दफ्तरों में दोपहर 3 बजे तक सभी एयर कंडीशनर (AC) बंद करने को कहा गया है। रात 8 बजे तक सभी विज्ञापन वाले होर्डिंग्स बंद करने होंगे। सभी स्थानीय परिषदों को शाम 6 बजे से रात 10 बजे तक स्ट्रीट लाइट बंद रखने के लिए कहा गया है। इसके अलावा, 100 से ज्यादा लोगों वाले किसी भी कार्यक्रम में नेशनल ग्रिड से बिजली इस्तेमाल करने पर रोक लगा दी गई है। इससे पहले सरकार पेट्रोल और डीजल के दाम बढ़ा चुकी है और काम के दिन भी घटाए गए थे।

देश में QR कोड पर आधारित फ्यूल राशनिंग सिस्टम भी लागू किया गया है। सरकार ने कहा है कि मिडिल ईस्ट की जंग के कारण सप्लाई चेन में आ रही दिक्कतों को देखते हुए, कच्चे तेल के लिए रूस के साथ मिलकर काम किया जा रहा है। टूरिज्म अथॉरिटी ने सोमवार को बताया कि मिडिल ईस्ट में जंग शुरू होने के बाद 25 मार्च तक टूरिस्टों की संख्या में 18% से ज्यादा की गिरावट आई है।